Mumbai News: मुंबई पुलिस में करोड़ों रुपए के फर्जी वेतन घोटाले का मामला सामने आने के बाद कार्रवाई तेज हो गई है. इस मामले में दो पुलिस कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और जालसाजी समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है. अब इस पूरे मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है.
वेतन घोटाले के मामले में तत्कालीन हेड क्लर्क विजया चव्हाण और तत्कालीन जूनियर क्लर्क अमोल मेश्राम को सस्पेंड कर दिया गया है. दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. संयुक्त पुलिस आयुक्त (प्रशासन) की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जांच पूरी होने तक दोनों कर्मचारी निलंबित रहेंगे.
कैसे हुआ करोड़ों रुपए का घोटाला?
जांच में सामने आया है कि कुछ लोगों ने गैर-पुलिसकर्मियों को पुलिस कर्मचारी दिखाकर उनके नाम पर फर्जी वेतन जारी कराया. आरोप है कि फर्जी दस्तावेज, फर्जी वेतन पर्चियां और बैंक खातों का इस्तेमाल कर सरकारी धन का गबन किया गया. इस तरह सरकार को करीब 6 करोड़ 41 लाख 14 हजार 36 रुपए का नुकसान पहुंचाया गया.
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5 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला
इस मामले में तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी रामकिशन गोस्वामी, नागेश तलवाडेकर, विजया चव्हाण, मुख्य क्लर्क अजय राठौड़ और जूनियर क्लर्क अमोल मेश्राम समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह घोटाला प्रशासनिक और वेतन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से किया गया.
समता नगर पुलिस थाने में दर्ज FIR में आरोपियों पर BNS की धारा 409, 420, 406, 467, 465, 471, 201, 120(बी) और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है. आरोपियों पर सरकारी धन के गबन, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, जालसाजी और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
कब हुआ था यह घोटाला?
प्राथमिक जांच के अनुसार, यह घोटाला वर्ष 2019 और 2020 के दौरान हुआ. दिसंबर 2019 के अलावा जनवरी, फरवरी और जून से सितंबर 2020 के बीच जारी किए गए वेतन में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं. जांच में इन महीनों के वेतन खातों और भुगतान रिकॉर्ड में कई संदिग्ध लेन-देन पाए गए हैं.
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब समता नगर पुलिस से लेकर मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट-12 को सौंप दी गई है. इससे पहले FIR समता नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी. अब क्राइम ब्रांच पूरे नेटवर्क, फर्जी बैंक खातों, वेतन रिकॉर्ड और दस्तावेजों की विस्तृत जांच करेगी.
फर्जी प्रोफाइल और बैंक खातों का इस्तेमाल
जांच एजेंसियों के अनुसार, सरकारी धन निकालने के लिए फर्जी पुलिसकर्मियों की प्रोफाइल बनाई गईं. उनके नाम पर बैंक खाते खोलकर वेतन ट्रांसफर किया गया. आशंका है कि इस पूरे खेल को अंजाम देने में प्रशासनिक और मंत्रालयी कर्मचारियों की भी भूमिका रही है. जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे और कुल कितनी राशि का गबन हुआ.
मुंबई पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है. यदि जांच में अन्य कर्मचारियों या अधिकारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल क्राइम ब्रांच इस फर्जी वेतन घोटाले से जुड़े सभी दस्तावेजों और बैंक लेन-देन की जांच में जुटी हुई है.

जयप्रकाश सिंह
जयप्रकाश सिंह का नाम देश के चुनिंदा क्राइम रिपोर्टर में आता है. लंबे समय से टीवी जर्नलिस्ट के तौर पर सेवाएं जारीं. करीब तीन दशकों से सक्रिय पत्रकारिता का हिस्सा. प्रोड्यूसर, एंकर और क्राइम रिपोर्टर की भूमिका. फिलहाल टीवी9 भारतवर्ष में एसोसिएट एडिटर के रूप में मुंबई से कार्यरत. इसके पहले 2012 से 2022 तक मुंबई में इंडिया टीवी के ब्यूरो चीफ रहे. 2005 से 2012 तक नेटवर्क18 ग्रुप के आईबीएन7 चैनल में डिप्टी ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाली. 2004 से 2005 तक सहारा समय मुंबई में बतौर सीनियर स्पेशल कॉरस्पॉन्डेंट काम किया. 2002 से 2004 तक मुंबई ब्यूरो में बीएजी फिल्म्स के चीफ रहे. नवभारत टाइम्स मुंबई में 1997 में जॉइन किया और यहां 2 साल काम किया. इससे पहले भी चार संस्थानों में काम किया.
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