70 रुपए वाली चीनी का इंपैक्ट,30% बढ़े मिठाई के दाम: 15 रुपए की कटिंग चाय, ₹150Kg महंगी हुई चमचम; 30 वाला प्याज 60 रुपए किलो - Patna News

Published on 26 अग॰ 2026

‘चीनी महंगी होने से चाय से लेकर त्योहार के पकवान तक हर चीज पर असर पड़ा है। मैंने पहले खर्च घटाने की योजना बनाई थी। अब महंगाई ने मुसीबत खड़ी कर दी है। रोजमर्रा की जरूरी चीजें महंगी हो जाएंगी तो आखिर किस चीज में कटौती की जाएगी।’

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यह सवाल सिर्फ पटना में रहने वाली सीमा देवी का नहीं। बिहार के करीब हर घर की गृहणी प्याज, चीनी और दूसरी जरूरी चीजों की कीमत बढ़ने से इसी कशमकश में है कि घर का बजट कैसे संभालें।

चीनी की कीमत 70 रुपए प्रति किलो होने से मिठाई के दाम 30% तक बढ़ गए हैं। कटिंग चाय 15 रुपए में मिल रही है। 10-15 रुपए में मिलने वाला रसगुल्ला 20 रुपए प्रति पीस बिक रहा है। प्याज अलग 60 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। दो-तीन महीना पहले यह 30 रुपए किलो था।

चीनी, गुड़, प्याज और सरसों तेल जैसे जरूरी सामानों के दाम बढ़ने से लोगों को क्या परेशानी हो रही है? कारोबारियों पर कितना असर पड़ रहा है? पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट..।

थोक मंडी में चीनी की कीमत 6700 रुपए प्रति क्विंटल

पटना सिटी की थोक मंडी में पिछले एक महीने में चीनी के भाव में लगभग 1600 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। एक महीना पहले चीनी का थोक भाव 4800 रुपए प्रति क्विंटल था। अब बढ़कर 6400-6700 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है। खुदरा बाजार में चीनी 65 से 70 रुपए प्रति किलो बिक रही है। इससे आम लोगों के साथ-साथ मिठाई कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।

चीनी के साथ-साथ गुड़ के दाम भी बढ़े हैं। थोक बाजार में गुड़ का भाव 50-52 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 65-70 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया है। खुदरा बाजार में गुड़ करीब 75 से 80 रुपए प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है। त्योहारों के दौरान मिठाई, पकवान और प्रसाद बनाने के लिए चीनी और गुड़ की मांग बढ़ी है।

थोक मंडी के कारोबारी लाल बाबू चौधरी ने कहा, ‘पटना में रोजाना लगभग 28 से 30 ट्रक चीनी पहुंच रही है। प्रत्येक ट्रक में करीब 30 टन चीनी होती है। इसके बावजूद कीमतों में तेजी बनी हुई है। पटना में चीनी की मासिक खपत लगभग 30 हजार टन है।’

कारोबारी राकेश कुमार ने बताया, ‘बिहार की चीनी मिलों में फिलहाल उत्पादन लगभग न के बराबर है। राज्य में गन्ने की फसल सितंबर-अक्टूबर के बाद तैयार होती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर उत्पादन शुरू होने में अभी समय है। मांग के मुकाबले चीनी की सप्लाई कम है। इसका असर कीमतों में दिख रहा है।

रक्षा बंधन से पहले मिठाई की कीमत बढ़ी

चीनी की कीमतों में वृद्धि का असर मिठाई कारोबार पर पड़ा है। कीमतें बढ़ गई हैं। मिठाई दुकानदार अनिल कुमार ने कहा, ‘मिठाई बनाने में बड़ी मात्रा में चीनी लगती है। कच्चे माल की कीमत बढ़ने का सीधा असर मिठाई की लागत पर पड़ रहा है। अगर चीनी इसी तरह महंगी होती रही तो मिठाई की कीमत बढ़ानी पड़ेगी।’

‘इसका असर ग्राहकों पर पड़ेगा और मिठाई की खपत कम हो सकती है। त्योहार के सीजन में कारोबारियों को सबसे ज्यादा चिंता इसी बात की है कि ग्राहक खरीदारी कम न कर दें।’

60 रुपए किलो हुआ प्याज

प्याज की कीमत तेजी से बढ़ी है। महाराष्ट्र के नासिक मंडी में प्याज का भाव 3600 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। इसका असर पटना के बाजार में दिख रहा है। प्याज की कीमत 60 रुपए किलो तक पहुंच गई है।

मानसून की अनिश्चितता के चलते प्याज के नए फसल की बुआई में देर हुई है। रबी फसल कमजोर रही है। इसके चलते प्याज की कीमत बढ़ी है।

सब्जियों की कीमत बढ़ी, 60 रुपए किलो बिक रहा बैगन

बारिश का मौसम आने से पटना के बाजार में स्थानीय सब्जियों की सप्लाई कम हुई है। इसके चलते कीमतें बढ़ी हैं। ज्यादातर सब्जियों की औसत कीमत 40-50 रुपए किलो तक पहुंच गई है।

किराना के सामान के दाम बढ़े

चावल, दाल, आटा और तेल जैसे किराना के सामान के दाम भी बढ़े हैं। कंपनियां कीमत बढ़ाने के साथ ही पैकेट का वजन कम कर रही हैं। नूडल्स, तेल, साबुन, चाय, शैंपू, पैक्ड आटा, टूथ पेस्ट जैसे सामानों के पैकेट का वजन कम किया गया है। सरसों तेल की कीमत 200 रुपए के पार पहुंच गई है।

रिटेल दुकानदार राहुल ने बताया, ‘चीनी मिलों से ही बढ़े हुए रेट पर आ रही है। ग्राहक दुकान पर चीनी का भाव सुनकर चौंक जाते हैं। अब पहले से कम मात्रा में चीनी खरीदते हैं।’

किराना दुकानदार आलोक तिवारी ने कहा, ‘चीनी के अलावा तेल और प्याज के दाम में भी काफी वृद्धि हुई है। अचानक रेट बढ़ने पर लोग सवाल करने लगते हैं। कई बार ग्राहकों से बहस भी हो जाती है। हम लोग 2 से 3 रुपए की मार्जिन पर काम करते हैं। रेट मंडी से बढ़कर आ रहा है तो हम लोग क्या करें?’

खाने-पीने की चीजों की कीमत बढ़ने पर क्या कहते हैं लोग

पटना में रहने वाले अशोक कुमार ने कहा, ‘महंगाई से जनता पहले से परेशान है। खाने के सामानों की कीमत बढ़ने से हर वर्ग प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर घर के बजट पर पड़ता है। सीमित आमदनी में परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।’

पटना के पटेल नगर निवासी किशोर कुमार अग्रवाल ने कहा, ‘महंगाई की मार झेल रही जनता पर अब और बोझ बढ़ गया है। एथेनॉल बनाने में गन्ना का इस्तेमाल हो रहा है। इसके चलते चीनी की कीमत बढ़ गई है। दूसरे खाद्य पदार्थों के दाम भी बढ़े हैं। इसका बड़ा असर मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है।’

गृहिणी सीमा देवी ने बताया, ‘हमें सरकार से उम्मीद थी कि महंगाई से राहत दिलाएगी, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों ने परेशानी बढ़ा दी है। चीनी, प्याज और तेल जैसी चीजें छोटी जरूर लगती हैं, लेकिन इनके दाम बढ़ने का असर पूरे महीने के बजट पर पड़ता है।’

अनीता देवी ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘मध्यम वर्ग के लिए 2 रुपए की बढ़ोतरी भी मायने रखती है। ऐसे में किसी जरूरी खाद्य पदार्थ की कीमत में 25-30 रुपए का इजाफा सीधे परिवार की कमर तोड़ देता है। अब परिवारों को खाने, घूमने-फिरने और दूसरी जरूरतों में कटौती करनी पड़ रही है। यही स्थिति रही तो चीनी जैसी रोजमर्रा की चीजें भी सोच-समझकर खरीदनी होगी।’

गयाजी में रक्षा बंधन के चलते नहीं बढ़ी मिठाइयों की कीमत

चीनी की बढ़ी कीमत का असर गयाजी में मिठाई कारोबार पर पड़ रहा है। हालांकि रक्षा बंधन को देखते हुए स्थानीय कारोबारियों ने मिठाइयों के दाम नहीं बढ़ाए हैं।

प्रमोद लड्डू शोरूम के डायरेक्टर प्रमोद भदानी ने कहा, 'चीनी की बढ़ती कीमत का असर कारोबार पर पड़ रहा है। केवल चीनी ही नहीं, बल्कि मक्का और चावल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। त्योहार एकदम करीब है। ग्राहकों की सुविधा को देखते हुए फिलहाल मिठाई की कीमत नहीं बढ़ाई गई है।'

कंचन स्वीट एंड कैफे के मालिक रूपेश कुमार ने बताया, 'मेरे पास पहले का चीनी का स्टॉक बचा हुआ था, फिलहाल उसी से काम चल रहा है। नया स्टॉक अभी नहीं मंगाया है। जब नया माल मंगाएंगे, तब असर पता चलेगा।'

गयाजी में रक्षा बंधन पर्व के चलते मिठाई की कीमत अभी नहीं बढ़ी है।

गयाजी में रक्षा बंधन पर्व के चलते मिठाई की कीमत अभी नहीं बढ़ी है।

नालंदा में रक्षाबंधन से पहले मिठाइयां महंगी

नालंदा में रक्षा बंधन पर्व से पहले मिठाइयां महंगी हो गई हैं। पारंपरिक, खोआ और छेना आधारित मिठाइयों की कीमत बढ़ी है। काला जामुन 220 रुपए किलो से बढ़कर 300 रुपए किलो हो गया है। इसी तरह 400 रुपए किलो बिकने वाला कलाकंद 460 रुपए किलो बिक रहा है।

खंदक रोड स्थित 'मिठास' प्रतिष्ठान के संचालक सोनू कुमार ने कहा, ‘चीनी और रिफाइंड तेल के साथ-साथ मिठाई बनाने में लगने वाले सभी जरूरी कच्चे माल के रेट काफी बढ़ गए हैं। इसलिए मिठाई की कीमत बढ़ानी पड़ी है। बाजार में खरीदारी के लिए भीड़ तो उमड़ रही है, लेकिन बढ़े हुए दामों ने उत्साह थोड़ा फीका कर दिया है। लोग अब बजट को ध्यान में रखकर मिठाई खरीद रहे हैं।’