बिहार में परिसीमन शुरू, आपकी पंचायत बंटेगी या बचेगी: आपका गांव किस पंचायत में जाएगा, सीट रिजर्व होगी या नहीं, 8 सवालों में पूरा हिसाब - Bihar News

Published on 26 अग॰ 2026

बिहार में 8,053 पंचायतों का परिसीमन शुरू हो गया है। जुलाई 2027 तक पूरा होने का अनुमान है। इसके बाद पंचायत चुनाव होगा।

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परिसीमन कैसे होगा, मेरी पंचायत का क्या होगा, कौन सी सीट रिजर्व होगी, मेरा गांव किस पंचायत में होगा...इन्हीं 8 सवालों का जवाब आज जानेंगे; बूझे की नाही में...।

सवाल-1ः परिसीमन क्या है और बिहार में इस बार इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

जवाबः लोकसभा, विधानसभा और पंचायतों का भौगोलिक और जनसंख्या के आधार पर नए सिरे से पुनर्गठन को परिसीमन कहते हैं।

परिसीमन में तय किया जाएगा कि कौन सा गांव किस ग्राम पंचायत में रहेगा। पंचायत का एरिया कितना होगा और पंचायतों/वार्डों की सीमाएं कहां होंगी।

खास बात है कि परिसीमन का मतलब सिर्फ पंचायतों की संख्या बढ़ाना या घटाना नहीं है। किसी पंचायत की सीमा बदलना, गांवों को दूसरी पंचायत में जोड़ना या अलग पंचायत बनाना भी परिसीमन की प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।

2 कारणों से इस बार परिसीमन की जरूरत

1. 35 साल से परिसीमन नहीं हुआ, आबादी बढ़ गई है

बिहार में पंचायतों का आखिरी बार 1991 की जनगणना के आधार पर 1993-94 में परिसीमन हुआ था। तब राज्य की आबादी 8.63 करोड़ थी। उस वक्त बिहार में झारखंड भी शामिल था।

2000 में झारखंड के अलग होने पर बिहार की आबादी 6.45 करोड़ बच गई थी। जबकि, बिहार जातीय गणन-2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की आबादी 13.2 करोड़ है। इसमें 89% आबादी गांवों में रहती है।

  • 15 जुलाई को सम्राट कैबिनेट ने पंचायतों का परिसीमन कराने की मंजूरी दी। इसमें कहा गया कि 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन होगा। इसके आधार पर ही पंचायत चुनाव होगा।
  • सरकार ने बताया है कि परिसीमन का मकसद आबादी के हिसाब से संतुलित प्रतिनिधित्व देना है। अभी करीब 20 हजार की आबादी पर एक मुखिया हैं।

2. आरक्षण का रोस्टर बदलना है

बिहार पंचायत राज अधिनियम-2006 की धारा 13, 15, 38, 65 और 91 के तहत पंचायतों के सभी 6 पदों (वार्ड सदस्य, मुखिया, पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य) के लिए सीटों का आरक्षण रोटेशन के आधार पर तय होता है।

बिहार पंचायत राज (संशोधन) अधिनियम के तहत अनिवार्य किया गया है कि आरक्षण रोस्टर प्रत्येक दो चुनावों के बाद बदला जाएगा।

  • जैसे- यदि 2016 और 2021 के पंचायत चुनावों में एक ही आरक्षण रोस्टर लागू रहा, तो अगले चुनाव 2026 में नियमतः आरक्षण रोस्टर का चक्र पूरी तरह बदल जाएगा।
  • आखिरी बार 2016 में रिजर्वेशन का रोस्टर बदला था। इस कारण इस बार अपने-आप OBC, EBC, SC-ST और महिलाओं के लिए रिजर्व सीटों में बदलाव होगा।

सवाल-2ः नई पंचायत कैसे बनेगी, उसका आधार क्या होगा और कौन बनाएगा?

जवाबः नई पंचायत बनाने का मूल आधार गांव/क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, आबादी और प्रशासनिक सुविधा होगी। बिहार पंचायत राज अधिनियम-2006 की धारा 11, 12, 37 और 62 के मुताबिक…

  • करीब 7,000 आबादी पर ग्राम पंचायत, ग्राम कचहरी।
  • 500 की आबादी पर वार्ड और पंच।
  • 5,000 की आबादी पर पंचायत समिति।
  • 50,000 की आबादी पर जिला परिषद क्षेत्र।

लेकिन हर पंचायत में बिल्कुल 7,000 लोग ही होंगे, ऐसा जरूरी नहीं है। भौगोलिक स्थिति, गांवों की स्थिति आदि को ध्यान में रखकर नई पंचायत बनाई जाएगी। इसलिए परिसीमन के बाद किसी पंचायत की वास्तविक आबादी इस दायरे से ऊपर-नीचे हो सकती है।

प्रखंड को इकाई मानकर AI से होगा परिसीमन

  • 20 जुलाई 2026 को जारी पंचायती राज विभाग के आदेश के मुताबिक, पंचायतों और पंचायत समिति क्षेत्र के परिसीमन के लिए प्रखंड को प्रशासनिक इकाई माना जाएगा।
  • जिला परिषद क्षेत्र के परिसीमन के लिए जिला प्रशासनिक इकाई होगा। वार्ड पार्षद एवं पंच के लिए प्रशासनिक इकाई पंचायत होगी।
  • पंचायत का परिसीमन उत्तर-पश्चिम (भंडार कोना) से शुरू होकर दक्षिण-पूर्व में समाप्त होगा। किसी भी राजस्व गांव का बंटवारा नहीं किया जाएगा। पूरा गांव एक ही पंचायत में रहेगा।

सवाल-3ः मेरी पंचायत का क्या होगा, क्या वह टूट सकती है?

जवाबः हां, परिसीमन के दौरान ऐसा संभव है। पंचायत की सीमा बदली जा सकती है। किसी गांव/क्षेत्र को एक पंचायत से निकालकर दूसरी पंचायत में शामिल किया जा सकता है और जरूरत के अनुसार किसी पंचायत को पुनर्गठित किया जा सकता है।

मतलब मौजूदा पंचायत का वही क्षेत्र और वही गांव अगली व्यवस्था में भी रहें, यह जरूरी नहीं है। लेकिन किसी गांव को दूसरी पंचायत में शामिल करने का फैसला मनमाने तरीके से नहीं होगा। इसके लिए निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया और सरकारी अधिसूचना का पालन किया जाएगा। इसे ऐसे समझिए…

  • यदि आपकी पंचायत में अभी 7 गांव हैं। पंचायत की कुल आबादी 10,000 है। तब इस परिस्थिति में नए परिसीमन में कुछ गांवों को अलग किया जाएगा।
  • अगर आपका गांव दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित है। तब संभव है कि आपका गांव बगल की पंचायत में चला जाए। मान लीजिए आपकी पंचायत के 3 गांवों…

गांव A- 2,500 लोग

गांव B- 3,000 लोग

गांव C- 2,000 लोग

तीनों की कुल आबादी करीब 7,500 है। तब इस परिस्थिति में तीनों गांवों को मिलाकर एक पंचायत बनाई जा सकती है, यदि प्रशासनिक और भौगोलिक परिस्थितियां इसके अनुकूल हों।

हालांकि, पंचायत की सीमा तय करते समय भौगोलिक स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

सवाल-4ः कौन सी पंचायत रिजर्व रहेगी, कैसे तय होगी?

जवाबः बिहार पंचायती राज अधिनियम-2006 के मुताबिक, हर 10 साल यानी दो चुनाव के बाद सीटों का आरक्षण रोस्टर बदलना अनिवार्य है। संविधान के ऑर्टिकल-243D के मुताबिक, पंचायतों में SC-ST का रिजर्वेशन जनसंख्या के अनुपात में दिया जाता है।

वहीं, बिहार पंचायती राज अधिनियम-2006 के मुताबिक, EBC-OBC को अलग से 20% रिजर्वेशन दिया जाता है। महिलाओं के लिए 50% सीटें रिजर्व रहेंगी।

हालांकि, सभी कोटे के रिजर्वेशन को मिलाकर 50% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। यदि किसी पंचायत में SC, ST और OBC की कुल आबादी 50% से अधिक है, तो पंचायत मुख्यालय उसी गांव में बनेगा, जहां इन वर्गों की आबादी सबसे ज्यादा होगी। इससे महिलाओं और पिछड़े वर्गों को मौका मिलेगा।

हर तीसरे चुनाव पर बदलेगा रिजर्वेशन

बिहार सरकार के नियम के मुताबिक, हर तीसरे चुनाव में सीटों का रिजर्वेशन बदलना अनिवार्य है। इसे ऐसे समझिए…

  • पंचायत-A 2021 और 2016 में SC के लिए रिजर्व थी। इससे पहले 2011 और 2006 में EBC के लिए रिजर्व थी। तब इस बार यह सीट जनरल या जनरल महिला के लिए हो सकती है।
  • अगर पंचायत-B 2021 और 2016 में जनरल महिला थी। इससे पहले 2011 और 2006 में EBC/OBC के लिए रिर्जव थी। तब इस बार यह सीट SC या SC महिला के लिए रिजर्व हो सकती है।
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग अलग-अलग माध्यमों से लोगों को परिसीमन को लेकर जागरूक कर रहा है। फोटो सोर्स-@SECBihar

बिहार राज्य निर्वाचन आयोग अलग-अलग माध्यमों से लोगों को परिसीमन को लेकर जागरूक कर रहा है। फोटो सोर्स-@SECBihar

सवाल-5ः क्या परिसीमन के बाद प्रखंड, वोटर कार्ड और एड्रेस भी बदलेगा?

जवाबः सिर्फ पंचायत की सीमा बदलने से आपका प्रखंड, विधानसभा क्षेत्र या वोटर कार्ड अपने-आप नहीं बदल जाएगा।

इनकी अलग-अलग प्रशासनिक/निर्वाचन सीमाएं हैं। जैसे- पंचायत बदलना, प्रखंड बदलना, विधानसभा क्षेत्र बदलना।

  • अगर परिसीमन के दौरान केवल पंचायत की सीमा बदली है और आपका गांव उसी प्रखंड में है, तो सिर्फ पंचायत बदलने के कारण प्रखंड नहीं बदलेगा।
  • इसी तरह मतदाता पहचान पत्र (EPIC) केवल पंचायत परिसीमन के कारण अपने-आप नया नहीं हो जाएगा। हालांकि, आपकी मतदाता सूची में वार्ड संख्या या मतदान केंद्र का विवरण अपडेट हो सकता है।
  • एड्रेस के मामले में भी यही बात लागू होती है। अगर सरकारी रिकॉर्ड में प्रशासनिक पता बदलता है तो संबंधित रिकॉर्ड को अपडेट करने की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन पंचायत परिसीमन होते ही हर व्यक्ति का वोटर कार्ड और सभी दस्तावेज अपने-आप बदल जाएंगे, ऐसा नहीं है।

सवाल-6ः कैसे पता चलेगा कि मेरा गांव किस पंचायत में है, सूची कहां मिलेगी?

जवाबः सबसे सटीक जानकारी सरकार की ओर से प्रकाशित प्रारंभिक और अंतिम अधिसूचना/सूची से मिलेगी। मुंगेर के जिला पंचायत पदाधिकारी कमल किशोर ने बताया, 'पंचायतों के परिसीमन के लिए प्रस्ताव निचले स्तर से तैयार होगा।

पंचायत के पंचायत सचिव, राजस्व कर्मी एवं अंचल अमीन इसके लिए प्रस्ताव तैयार करेंगे। इस प्रस्ताव में एक पंचायत की सीमा रेखा में क्या-क्या शामिल होगा, इसका उल्लेख किया जाएगा।'

कमल किशोर ने बताया, 'लोग अपनी पंचायत के इन कर्मियों से परिसीमन की जानकारी ले सकते हैं। तैयार प्रस्ताव को प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के पास भेजा जाएगा।’

‘BDO एक निर्धारित समय के अंदर इस प्रस्ताव पर आमलोगों से दावा-आपत्ति प्राप्त करेंगे। इसके बाद प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर अनुमंडल पदाधिकारी को भेजा जाएगा। जब सब डेटा जुट जाएगा तब आरक्षण रोस्टर बनेगा।'

आप इन जगहों पर भी जानकारी देख सकते हैं...

  • बिहार पंचायती राज विभाग की वेबसाइट
  • जिला प्रशासन/जिलाधिकारी की वेबसाइट
  • संबंधित प्रखंड कार्यालय
  • संबंधित अंचल/स्थानीय प्रशासनिक कार्यालय
  • सरकार की ओर से जारी परिसीमन की अधिसूचना और गांव/पंचायतवार सूची।
  • चुनाव संबंधी जानकारी के लिए बिहार राज्य निर्वाचन आयोग।

सवाल-7ः अगर गांव गलत पंचायत में चला जाए तो शिकायत कहां कर सकते हैं?

जवाबः बिहार के पंचायती राज विभाग के मुताबिक, पंचायत की सीमाओं और वार्डों के बंटवारे का शुरुआती ढांचा प्रपत्र-3 (Form-3) में तैयार किया जाएगा। इसे पंचायत और प्रखंड कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चिपकाया जाएगा। साथ ही खबर के अलग-अलग माध्यमों से इसकी जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी।

  • प्रारूप जारी होने की तारीख से आपके पास 15 दिनों का समय होगा। अगर किसी को इसमें कोई गड़बड़ी लगती है या बदलाव का सुझाव देना है, तो वे अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। जिलाधिकारी (DM) सभी आपत्तियों पर ध्यान से विचार करेंगे।
  • आपत्तियों का निपटारा करने के बाद DM पंचायत के नए क्षेत्रों को अंतिम रूप देंगे। इसकी आधिकारिक घोषणा प्रपत्र-4 (Form-4) के जरिए की जाएगी और इसे जिला गजट में प्रकाशित कर दिया जाएगा।

सवाल-8ः परिसीमन का पूरा शेड्यूल क्या है और अगला चुनाव कब होगा?

जवाबः पंचायती राज विभाग ने 20 जुलाई 2026 को परिसीमन का आदेश जारी कर दिया। परिसीमन बिहार राज्य निर्वाचन आयोग करेगा। जुलाई 2027 तक पूरा होने की संभावना है। हालांकि, अभी तक सरकार ने कोई डेट लाइन तय नहीं की है।

बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा, 'परिसीमन पूरा होने के बाद ही पंचायत चुनाव से जुड़ी आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। पूरी प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग की देखरेख में हो रही है।' ज्यादा संभव है कि अगले साल नवंबर-दिसंबर 2027 में पंचायत चुनाव होगा।