यूरोप पहुंची पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों की आवाज... बच्चियों के जबरन धर्म परिवर्तन पर EU ने शहबाज सरकार को लताड़ा| Navbharat Live

Published on 12 जुल॰ 2026

Updated On: Jul 12, 2026 | 05:15 PM IST

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सार

Forced Conversion Minority Girls in Pakistan: यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन पर चिंता जताते हुए एक सख्त प्रस्ताव पारित कर नाराजगी जताई।

Forced Conversion Minority Girls in Pakistan

प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

EU Parliament Pakistan Resolution: हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें पाकिस्तान के अधिकारियों से धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों के अपहरण और जबरन इस्लाम धर्म अपनाने की घटनाओं को रोकने की मांग की गई है। प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र के 2025 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि जबरन धार्मिक परिवर्तन और विवाह से जुड़े मामलों में लगभग 25 प्रतिशत पीड़ित ईसाई लड़कियां होती हैं।

यूरोपीय संसद के सदस्यों ने पाकिस्तान से बाल विवाह को समाप्त करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने और अल्पसंख्यक समुदायों की उन लड़कियों के परिवारों की शिकायतों से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय तंत्र बनाने का आग्रह किया, जिनका अपहरण या जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया है।

रिपोर्ट में मारिया शहबाज मामले का जिक्र

यूरोपीय संसद ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए 13 वर्षीय ईसाई लड़की मारिया शहबाज के मामले का भी जिक्र किया। प्रस्ताव के मुताबिक, मारिया का कथित रूप से जुलाई 2025 में 30 वर्षीय शेहरयार अहमद ने अपहरण किया था, जिस पर उसे जबरन इस्लाम धर्म अपनाकर शादी के लिए मजबूर करने का आरोप है।

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सांसदों ने इस मामले से जुड़ी कानूनी कार्यवाही का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आधिकारिक दस्तावेजों में कथित हेरफेर और लड़की के नाबालिग होने के सबूतों के बावजूद, पाकिस्तान की संघीय संवैधानिक अदालत ने आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाया और बच्ची को उसके पास वापस भेज दिया।

पाकिस्तानी अदालत के फैसले की आलोचना

यूरोपीय संसद ने अदालत के इस फैसले की कड़ी आलोचना की और मांग की कि मारिया शहबाज को कानूनी सहायता और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहयोग उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह इस कठिन अनुभव से उबर सके।

हर साल 1,000 लड़कियां हो रही शिकार

प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि मानवाधिकार संगठनों के अनुमान के मुताबिक, हर साल अल्पसंख्यक समुदायों के 1,000 से अधिक नाबालिग इस तरह के अत्याचारों का सामना करते हैं। यूरोपीय संसद ने उन आरोपों पर भी चिंता जताई कि कई बार स्थानीय अधिकारी ऐसे मामलों में मिलीभगत करते हैं, जबकि अदालतें बाल संरक्षण कानूनों की अनदेखी करती हैं, जिससे जबरन धर्म परिवर्तन को बढ़ावा मिलता है या उसे वैधता मिलती है।

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संस्थागत कार्रवाई को मजबूत करने की मांग करते हुए यूरोपीय संसद के सदस्यों ने इस्लामाबाद से अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के सभी मामलों की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित बच्चियों को उनके परिजनों तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए साथ ही कानूनी सुरक्षा उपायों को भी मजबूत किया जाना चाहिए।

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