8th Pay Commission: 69 लाख पेंशनर्स की बढ़ी टेंशन, ToR में बदलाव की मांग; जानिए पूरा मामला

Published on 9 सित॰ 2026

Sep 09, 2026 09:19 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

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मुख्य बातें

  • मुख्य चिंता 8वें वेतन आयोग के ToR के Point 2(e) को लेकर है
  • इसमें कर्मचारियों के Death-cum-Retirement Gratuity और पेंशन स्ट्रक्चर की समीक्षा की बात कही गई है
  • इसमें NPS, UPS और NPS से बाहर की पेंशन का भी उल्लेख है
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8वें वेतन आयोग की बैठकों का दौर जारी है। चेन्नई में 7 और 8 सितंबर को बैठक के बाद आयोग की आज पुडुचेरी में दिनभर बैठक हो रही है। इन बैठकों में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, पेंशन और भत्तों में संभावित बदलाव की दिशा तैयार हो रही है। इसी बीच पेंशनर्स के एक प्रमुख संगठन रिटायर्ड इम्प्लॉयी वेलफेयर एसोसिशन (REWA) ने 8वें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रिफरेंस यानी ToR में बदलाव की मांग उठाई है। यह संगठन चाहता है कि सरकार साफ-साफ लिखे कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए सभी पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन में भी संशोधन 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में शामिल होगा।

69 लाख पेंशनर्स को लेकर क्यों है असमंजस?

REWA के मुताबिक करीब 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि क्या 8वां वेतन आयोग उनकी पेंशन और फैमिली पेंशन में संशोधन की सिफारिश करेगा या नहीं।

संगठन की मुख्य चिंता 8वें वेतन आयोग के ToR के Point 2(e) को लेकर है। इसमें कर्मचारियों के Death-cum-Retirement Gratuity और पेंशन स्ट्रक्चर की समीक्षा की बात कही गई है। इसमें NPS, UPS और NPS से बाहर की पेंशन का भी उल्लेख है।

REWA का कहना है कि इसमें 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। यही वजह है कि पेंशनर्स के बीच सवाल खड़ा हो गया है कि पुराने पेंशनर्स की पेंशन संशोधन के दायरे में आएगी या नहीं।

पहले के वेतन आयोगों में क्या था?

पेंशनर्स संगठन ने अपनी मांग के समर्थन में पिछले वेतन आयोगों के ToR का भी हवाला दिया है। REWA के मुताबिक 7वें वेतन आयोग के ToR में रिटायरमेंट बेनिफिट्स और प्री-रिटायरमेंट पेंशन के संशोधन का स्पष्ट उल्लेख था। वहीं 5वें और छठे वेतन आयोग के ToR में भी पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स का उल्लेख किया गया था। इसी तुलना के आधार पर संगठन चाहता है कि 8वें वेतन आयोग के ToR में भी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट की जाए।

वित्त मंत्रालय से पहले भी मांगी जा चुकी है सफाई

REWA का कहना है कि उसने इस मुद्दे पर पहले वित्त मंत्री और वित्त सचिव से भी स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन संगठन के मुताबिक अभी तक इस मामले में कोई स्पष्ट जवाब जारी नहीं किया गया है। इसके कारण पेंशनर्स संगठनों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा बढ़ रही है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर तरह-तरह की आशंकाएं सामने आ रही हैं।

प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर क्या मांग की?

7 सितंबर को प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में REWA ने सरकार से 8वें वेतन आयोग के ToR में स्पष्ट संशोधन करने की मांग की है। संगठन चाहता है कि ToR में साफ तौर पर लिखा जाए कि आयोग 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए सभी पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन और फैमिली पेंशन में संशोधन की सिफारिश करेगा।

जब तक औपचारिक तौर पर ToR में संशोधन नहीं होता, तब तक REWA ने सरकार से स्पष्टता देने के लिए प्रेस नोट या आधिकारिक बयान जारी करने की भी मांग की है।

अभी सबसे बड़ा सवाल क्या है?

फिलहाल विवाद पेंशन बढ़ेगी या नहीं से ज्यादा इस बात पर है कि 8वें वेतन आयोग के मौजूदा ToR में पुराने पेंशनर्स को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है या नहीं। इसलिए पेंशनर्स की नजर अब सरकार के अगले स्पष्टीकरण और 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर है। अगर ToR में संशोधन कर पुराने पेंशनर्स को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाता है, तो 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए करीब 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन संशोधन का रास्ता साफ हो सकता है।

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें