
NCERT ने 9वीं सोशल साइंस की नई किताब जारी की
नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 9वीं सोशल साइंस की नई किताब जारी कर दी है. क्लास 9 की सोशल साइंस की नई किताब Understanding Society: India and Beyond Part 2 मंगलवार को जारी की गई, जो मार्केट में उपलब्ध है. सोशल साइंस की इस नई किताब में कुछ नए टाॅपिक और चैप्टर जोड़े गए हैं, जिसके तहत 9वीं के स्टूडेंट्स को सोशल साइंस की किताब में युद्ध और धार्मिक परंपराओं के संबंध के बारे में पढ़ाया जाएगा. यह किताब नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के करीब छह महीने बाद आई है. इससे पहले 9वीं सोशल साइंस की नई किताब का पहला भाग जून में जारी किया गया था.
आइए, विस्तार से 9वीं सोशल साइंस की नई किताब के बारे में जानते हैं. जानते हैं कि नई किताब में युद्ध और धार्मिक संबंध के बारे में क्या-क्या पढ़ाया जाएगा.
युद्ध के समय राजा करते थे देवीय शक्तियों का आह्वान
9वीं सोशल साइंस की नई किताब में युद्ध और धार्मिक मान्यता के संबंध पर चैप्टर जोड़ा गया है. किताब के मुताबिक, भारत में देवी-देवताओं की पूजा की परंपरा काफी पुरानी रही है और सातवीं शताब्दी के बाद भी कई राजा और राजकुमार युद्ध और संघर्ष के समय देवी शक्तियों का आह्वान करते थे.
राजा देवियों को अपनी रक्षक शक्ति के रूप में देखते थे
9वीं सोशल साइंस की नई किताब के Resistance and Resilience नाम के चैप्टर में सातवीं शताब्दी के बाद भारतीय उपमहाद्वीप में हुए विभिन्न आक्रमणों और संघर्षों का जिक्र किया गया है. इसी चैप्टर में युद्ध से जुड़ी धार्मिक परंपराओं को भी समझाया गया है.किताब में बताया गया है कि भारत में देवी की पूजा की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. सातवीं शताब्दी के बाद भी कई शासक संघर्ष के समय देवियों को अपनी रक्षक शक्ति के रूप में देखते थे. किताब में काली, दुर्गा, भवानी और शक्ति के दूसरे रूपों का जिक्र किया गया है. युद्ध के समय शासकों द्वारा इन देवियों का आह्वान किए जाने की परंपरा का उल्लेख किया गया है.
शिवाजी को मिली थी देवी भवानी से तलवार
किताब के अनुसार, कुछ ऐतिहासिक परंपराओं में यह मान्यता भी रही कि राजाओं या योद्धाओं को उनकी तलवारें या युद्ध में इस्तेमाल होने वाले हथियार देवी की ओर से प्राप्त हुए थे.इस संदर्भ में किताब में छत्रपति शिवाजी, बस्तर के राजा और विजयनगर के राजकुमार का उदाहरण दिया गया है. इन शासकों से जुड़ी परंपराओं में देवी से प्राप्त तलवार या हथियार के जरिए युद्ध और संघर्ष किए जाने का उल्लेख मिलता है.
शिवाजी के संदर्भ में देवी भवानी से जुड़ी तलवार की परंपरा का उल्लेख किया गया है. इसी तरह बस्तर के राजा और विजयनगर के राजकुमार से जुड़ी परंपराओं में भी देवी से प्राप्त हथियारों को उनके संघर्षों से जोड़ा गया है.चैप्टर में इन उदाहरणों के जरिए यह बताया गया है कि उस दौर में युद्ध केवल राजनीतिक या सैन्य संघर्ष नहीं माना जाता था, बल्कि धार्मिक विश्वास और देवी-देवताओं से जुड़ी मान्यताएं भी शासकों और योद्धाओं की सोच का हिस्सा थीं.

शालिनी बाजपेयी
शालिनी बाजपेयी टीवी9 भारतवर्ष न्यूज चैनल में सीनियर रिपोर्टर के तौर पर दिल्ली में काम कर रही हैं. टीवी9 भारतवर्ष से 2019 से जुड़ी हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. शिक्षा, स्वास्थ्य और दिल्ली सरकार जैसी अहम बीट को कवर करती हैं. शालिनी ने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक और परास्नातक किया है
Read More