पति ने जज को दिखाए पत्नी के अफेयर के 92 वीडियो, SC ने मेंटेनेंस पर सुना दिया बड़ा फैसला

Published on 2 अग॰ 2026

Aug 02, 2026 09:33 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

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Supreme Court News: निचली अदालत और राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अंतरिम भरण-पोषण देने से पहले एडल्ट्री के आरोपों की जांच करने का अनुरोध किया था।

पति ने जज को दिखाए पत्नी के अफेयर के 92 वीडियो, SC ने मेंटेनेंस पर सुना दिया बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट।

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने बीते शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। इसमें देश की सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यदि पत्नी पर किसी दूसरे पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाने के आरोप लगा है और प्रथम दृष्टया में सच प्रतीत होता है तो उसे अंतरिम भरण पोषण (मेंटेनेंस) नहीं दिया जा सकता है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि सीआरपीसी की धारा 125(4) के तहत पति द्वारा दायर याचिका के लंबित रहने के दौरान पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण देने से मना नहीं किया जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने पति की याचिका को स्वीकार कर लिया। निचली अदालत और राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अंतरिम भरण-पोषण देने से पहले एडल्ट्री के आरोपों की जांच करने का अनुरोध किया था। CrPC की धारा 125(4) के अनुसार, यदि कोई पत्नी दूसरे पुरुष से संबंध बनाती है, बिना किसी पर्याप्त कारण के पति के साथ रहने से मना करती है या यदि वे आपसी सहमति से अलग रह रहे हैं तो वह भरण-पोषण या अंतरिम भरण-पोषण प्राप्त करने की हकदार नहीं होगी।

पीठ ने स्पष्ट करते हुए कहा, "जब किसी मामले को साक्ष्यों से साबित करना होता है तो परिस्थितियों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों आदि के विस्तृत अध्ययन और सत्यापन में समय लगता है। चूंकि धारा 125(4) में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि व्यभिचार साबित हो जाता है तो पत्नी न तो अंतिम और न ही अंतरिम भरण-पोषण की हकदार होगी। इसलिए यदि पति धारा 125(4) के तहत आवेदन दाखिल करता है और शुरुआती चरण में ही साक्ष्यों के जरिए आरोप स्थापित कर देता है तब ही अंतरिम भरण-पोषण पर रोक लगाई जा सकती है।"

पति ने दिखाए 92 वीडियो और फोटो

इस मामले में पति ने अपनी पत्नी के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए बड़ी संख्या में तस्वीरें और 92 वीडियो प्रस्तुत किए थे। अदालत ने कहा कि ये साक्ष्य संभवतः किसी निजी जासूस के माध्यम से प्राप्त किए गए थे। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निजी जांच के क्षेत्र को रेग्यूलेट करने के लिए कानून बनाने की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि जानकारी और साक्ष्य जुटाने के लिए निजी जासूसों पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।