Published: Sunday, July 26, 2026, 10:18 [IST]
Punjab: CJP के नेतृत्व में देशभर में स्टूडेंट्स के आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा दे दिया है। उसके इस्तीफे के बाद अब पंजाब में भी पेपर लीक का मुद्दा फिर से गरमा गया है। कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल ने भगवंत मान सरकार को घेरते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह के इस्तीफे की मांग की है।
विपक्ष का कहना है कि जब केंद्र में पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय हो सकती है, तो पंजाब में परीक्षा गड़बड़ियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के लिए नई राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
कांग्रेस ने साधा AAP पर निशाना
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को युवाओं के संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से भी इस्तीफा मांगा। वड़िंग ने फार्मेसी भर्ती, 12वीं अंग्रेजी, ग्रुप-बी, नायब तहसीलदार, कृषि अधिकारी और फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप लगाए। उनका दावा है कि चार पेपर लीक मामलों में अब तक कोई ठोस जांच या जवाबदेही तय नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं हुई तो कांग्रेस पंजाब की सड़कों पर आंदोलन करेगी।
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बीजेपी ने केजरीवाल पर उठाए सवाल
बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए अरविंद केजरीवाल पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली में छात्र आंदोलनों का समर्थन करने वाले नेता पंजाब के युवाओं के मुद्दे पर चुप क्यों हैं। सिरसा ने CJP संस्थापक अभिजीत दिपके को भी उनके कथित वादे की याद दिलाई कि पंजाब में पेपर लीक होने पर वह छात्रों की आवाज उठाएंगे।
अकाली दल भी हमलावर
अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने दावा किया कि साढ़े चार साल में छह परीक्षा घोटालों से करीब पांच लाख युवा प्रभावित हुए हैं।
चुनाव से पहले बढ़ा दबाव
विपक्ष का आरोप है कि आम आदमी पार्टी केंद्र में पेपर लीक पर इस्तीफे मांगती है, लेकिन पंजाब में ऐसे मामलों पर चुप है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब पंजाब सरकार और शिक्षा मंत्री पर नैतिक दबाव बढ़ गया है। कांग्रेस और अकाली दल ने आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं, जबकि पंजाब सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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