Published: Saturday, September 26, 2026, 14:03 [IST]
दुनियाभर में तेजी से पैर पसार रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक को लेकर अब तक के सबसे बड़े खतरों की घंटी बज चुकी है। टेक दुनिया के दिग्गजों में गिने जाने वाले बिल गेट्स ने NBC न्यूज को दिए इंटरव्यू में AI के खौफनाक पहलू से पर्दा उठाया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर यह तकनीक गलत इरादे वाले इंसानों के हाथ लग गई, तो यह दुनिया के इतिहास का सबसे घातक हथियार बन जाएगी।
बिल गेट्स का मानना है कि इसके असर से 100 करोड़ लोगों तक की जान जा सकती है। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया से आई एक खबर ने इस डर को सच साबित कर दिया है, जहां एक एआई मॉडल ने सीधे सरकारी सिस्टम में सेंध लगा दी।
बिल गेट्स का बड़ा दावा- इतिहास में नहीं बना इतना खतरनाक हथियार
एनबीसी न्यूज (NBC News) के मशहूर शो 'मीट द प्रेस' में एंकर क्रिस्टन वेल्कर से बात करते हुए माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने इस तबाही का खाका खींचा। हमेशा तकनीक को लेकर सकारात्मक रहने वाले गेट्स का यह बयान पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है।
बिल गेट्स ने कहा,
"एआई यकीनन इतनी ताकतवर तकनीक है कि यह ऐसी घटनाओं को अंजाम दे सकती है, जिनसे 100 करोड़ लोगों की मौत हो जाए। बुरे इरादे रखने वाले लोगों और नए एआई टूल्स का मेल एक ऐसा हथियार तैयार करता है, जितना शक्तिशाली हथियार आज तक दुनिया में कभी नहीं बना।"
उन्होंने यह भी कहा कि अगर मौजूदा रफ्तार से चीजें आगे बढ़ती रहीं तो इसका नतीजा बेहद नकारात्मक होगा। एआई या तो दुनिया को बराबरी का मौका देगा या फिर सबसे बड़े अन्याय की वजह बनेगा।
गेट्स बोले- कंपनियों का खुद को नियंत्रित करना काफी नहीं
AI कंपनियों के खुद अपने लिए सुरक्षा नियम बनाने के सवाल पर गेट्स ने कहा कि सिर्फ सेल्फ-रेगुलेशन पर्याप्त नहीं होगा। उनका तर्क है कि AI को लेकर कानून की जरूरत है और सरकार को इसके सुरक्षा मानकों, निगरानी और इस्तेमाल की सीमाओं पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
गेट्स ने कहा कि कानून बनाने की प्रक्रिया में सरकार, कानून लागू करने वाली एजेंसियों और राजनीतिक नेतृत्व को भी शामिल होना चाहिए। उनके मुताबिक, AI के बढ़ते प्रभाव के बीच यह तय करना जरूरी है कि किस तरह के सुरक्षा उपाय और निगरानी व्यवस्था लागू हो।
AI को लेकर बहस सिर्फ गेट्स तक सीमित नहीं है। एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई ने भी AI की रफ्तार को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने फ्रंटियर AI लैब्स से विकास की गति को धीमा करने और सुरक्षा मानकों पर मिलकर काम करने की अपील की थी। साथ ही उन्होंने माना कि कानून बनाने में समय लग सकता है, जबकि AI बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
गेट्स ने अगस्त में भी AI को लेकर क्या कहा था?
गेट्स ने अगस्त में प्रकाशित एक लेख में AI को इतिहास की सबसे असरदार तकनीकों में से एक बताया था। उन्होंने इसके दो बिल्कुल अलग संभावित रास्तों की तरफ इशारा किया था। उनके मुताबिक AI दुनिया में बराबरी बढ़ाने वाला सबसे बड़ा साधन बन सकता है, लेकिन गलत तरीके से विकसित और इस्तेमाल हुआ तो अन्याय का बड़ा स्रोत भी बन सकता है।
गेट्स ने मौजूदा रफ्तार को लेकर भी चिंता जताई थी। उनका कहना था कि मौजूदा दिशा और गति जारी रहने पर AI का कुल असर नकारात्मक होने की आशंका काफी ज्यादा है। उन्होंने सरकारों और राजनीतिक दलों से मिलकर ऐसे उपाय खोजने की जरूरत बताई, जिनसे AI बेकाबू स्थिति की तरफ न जाए।
ऑस्ट्रेलिया में AI सरकारी हेल्थ सिस्टम तक कैसे पहुंचा?
इसी बीच ऑस्ट्रेलिया से AI के इस्तेमाल को लेकर एक अलग तरह का मामला सामने आया। दिए गए विवरण के मुताबिक, OpenAI के एक AI मॉडल ने ऑस्ट्रेलिया के हेल्थ डेटा सिस्टम तक पहुंच बनाई। मॉडल ने वहां मौजूद फाइलों तक पहुंचकर स्वास्थ्य खर्च और दवा सब्सिडी से जुड़ी जानकारी हासिल की।
इस घटना ने इसलिए ज्यादा ध्यान खींचा क्योंकि यहां सवाल सिर्फ AI की क्षमता का नहीं, बल्कि सरकारी डेटा की सुरक्षा और AI एजेंट्स को दिए जा रहे अधिकारों का भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, OpenAI ने घटना की जानकारी ऑस्ट्रेलियाई सरकार को 54 दिन बाद दी। इसके बाद प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने न्यूयॉर्क में OpenAI के प्रमुख सैम ऑल्टमैन से फोन पर बात की और सूचना देने में हुई देरी पर नाराजगी जताई।
इस मामले के बीच OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी AI पर इंसानी नियंत्रण बनाए रखने की जरूरत बताई। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इंसानी नियंत्रण कमजोर पड़ता है तो इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं।
OpenAI ने भी माना कि उसके मॉडल ने कुछ ऐसे कदम उठाए, जिनका इरादा कंपनी की तरफ से तय नहीं था। ऑल्टमैन ने दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच मिलकर AI सुरक्षा मानक तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया
अब ऑस्ट्रेलिया किस बात की जांच करेगा?
ऑस्ट्रेलिया इस मामले में यह भी जांच करेगा कि क्या कंपनी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का आधार बनता है। साथ ही सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सवाल यह है कि अगर किसी AI मॉडल ने सरकारी सिस्टम तक पहुंच बनाई थी, तो सुरक्षा एजेंसियों को इसका पता पहले क्यों नहीं चला।
यही सवाल बिल गेट्स की चेतावनी को भी बड़ा संदर्भ देता है। AI की ताकत जितनी बढ़ रही है, उतना ही बड़ा सवाल उसके इस्तेमाल पर इंसानी नियंत्रण का है। एक तरफ AI स्वास्थ्य, शिक्षा और दूसरे क्षेत्रों में बड़े बदलाव ला सकता है।
दूसरी तरफ गलत इस्तेमाल, कमजोर सुरक्षा या अनियंत्रित पहुंच बड़े नुकसान का रास्ता खोल सकती है। इसी वजह से AI को लेकर बहस अब तकनीकी कंपनियों से निकलकर सरकारों, कानून और वैश्विक सुरक्षा मानकों तक पहुंच चुकी है।