भारतीय कंपनियों के सिस्टम में घुसे AI एजेंट्स, CERT-In ने जारी की सिक्योरिटी एडवाइजरी - cert in issues critical advisory over autonomous ai agents infiltrating indian companies live systems

Published on 17 अक्टू॰ 2026

इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) ने गुरुवार को ऑटोनॉमस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट्स को लेकर एक गंभीर साइबर सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है।

CERT-In ने जारी की गंभीर एडवाइजरी। Photo- Freepik.

CERT-In ने जारी की गंभीर एडवाइजरी। Photo- Freepik. 

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने गुरुवार को एक क्रिटिकल साइबर सिक्योरिटी एडवाइजरी जारी की है, जब ऑटोनॉमस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंट्स द्वारा भारतीय कंपनियों के लाइव सिस्टम्स को कथित तौर पर एक्सेस करने की बात सामने आई। सरकारी एजेंसी ने प्रभावित ऑर्गनाइजेशन्स के नाम नहीं बताए हैं, लेकिन टेस्टिंग के तहत चल रहे AI मॉडल्स ने दावा किया कि उन्होंने उनके लाइव सिस्टम्स में सेंध लगाई और बिना ऑथराइजेशन के कॉन्फिडेंशियल रिकॉर्ड्स पढ़ लिए। इसमें शामिल AI कंपनियों ने कहा कि उन्होंने खुद इन घटनाओं का खुलासा किया था। CERT-In ने चेतावनी दी कि साइबर क्रिमिनल्स साइबर अटैक्स को अंजाम देने के लिए ओपन-सोर्स एजेंटिक AI टूल्स का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं।

CERT-In ने जारी की क्रिटिकल वॉर्निंग

अपनी एडवाइजरी CIAD-2026-0049, जिसका टाइटल ‘AI Agents as Attack Vectors’ है, में CERT-In ने भारतीय संस्थाओं के इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (ICT) इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मामलों को हाइलाइट किया। एजेंसी ने नोट किया कि कुछ AI एजेंट्स रिसर्च और इवैल्यूएशन एक्टिविटीज के दौरान अपने ऑथराइज्ड टास्क्स की बाउंड्रीज को पार कर गए, जिससे उन्होंने ICT एसेट्स को एक्सेस किया, उनका दुरुपयोग किया और फाइनेंशियल प्रॉफिट के के लिए अनधिकृत घुसपैठ की।

CERT-In का कहना है कि ये इंसिडेंट्स AI मॉडल प्रोवाइडर्स द्वारा वॉलंटरी डिस्क्लोजर के जरिए सामने आए। इसमें कहा गया है कि AI मॉडल प्रोवाइडर्स ने स्वीकार किया कि रिसर्च और इवैल्यूएशन एक्टिविटीज के दौरान उनके मॉडल्स भारतीय ऑर्गनाइजेशन्स के लाइव सिस्टम्स तक पहुंच गए थे। प्रभावित ऑर्गनाइजेशन्स इस अनऑथराइज्ड एक्सेस को अपने दम पर डिटेक्ट नहीं कर सके। इन घटनाओं के दौरान, AI एजेंट्स ने कथित तौर पर उन बिजनेस रिकॉर्ड्स को एक्सेस किया जिनमें पर्सनल इंफॉर्मेशन और कॉन्फिडेंशियल डेटा शामिल था। एजेंसी का कहना है कि ये अनऑथराइज्ड एक्सेस सोर्स कोड, रिपॉजिटरीज, CI/CD वेरिएबल्स, कॉन्फिगरेशन फाइल्स, क्लाइंट एप्लिकेशन्स और क्लाउड स्टोरेज में एक्सपोज्ड क्रेडेंशियल्स की वजह से मुमकिन हुआ।

इसके अलावा, सरकारी एजेंसी की जांच में भारतीय संस्थाओं के खिलाफ एक फाइनेंशियली मोटिवेटेड कैंपेन का भी पता चला, जिसमें साइबर थ्रेट एक्टर्स ने पब्लिकली अवेलेबल AI-नेटिव ऑफेंसिव-सिक्योरिटी फ्रेमवर्क्स का गलत इस्तेमाल किया। ये टूल्स कथित तौर पर कई देशों के आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर में इस्तेमाल किए जा रहे थे।

CERT-In का कहना है कि AI-असिस्टेड साइबर अटैक्स ने इनिशियल ब्रीच और डैमेजिंग एक्टिविटीज के एग्जीक्यूशन के बीच के समय को काफी कम कर दिया है, जिससे कुछ अटैक्स जिनमें पहले कई दिन लगते थे, वे अब कुछ ही घंटों में पूरे हो रहे हैं। एजेंसी ने यह भी चेतावनी दी कि जो ऑर्गनाइजेशन्स इस खतरे को दूर करने में फेल रहते हैं, उन्हें कुछ ही दिनों में रिपीट अटैक्स का सामना करना पड़ सकता है, जिससे अटैकर्स को उनके सिस्टम्स में और डीप एक्सेस मिल जाता है।

CERT-In की ये चेतावनी कॉन्फिडेंशियल डेटा के एक्सपोजर को कम करने के लिए AI एजेंट्स को दिए गए एक्सेस को रिस्ट्रिक्ट करने, क्रेडेंशियल्स को सिक्योर करने और क्लाउड परमिशन्स को रिव्यू करने की अहमियत को रेखांकित करती है।