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सार
Aluminium Bharat 2026: ‘एल्युमिनियम भारत-2026’ पहल की शुरूआत ALEMAI ने की। 26-29 सितंबर 2026 को गांधीनगर में पहली राष्ट्रीय एल्युमिनियम प्रदर्शनी होगी, जिसमें उद्योग सुधार और निवेश पर फोकस रहेगा।

एल्युमिनियम भारत-2026 (फोटो नवभारत)
विस्तार
ALEMAI Aluminium Bharat 2026: एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALEMAI) ने भारत के वैल्यू-ऐडेड एल्युमिनियम मिडस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘एल्युमिनियम भारत– 2026’ नामक राष्ट्रीय पहल की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विज़न को गति देना है।
राष्ट्रीय पदाधिकारी रहे उपस्थित
मुंबई में आयोजित पत्रकार वार्ता प्रेस में इस पहल के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र चोपड़ा,सचिव अंकुर अग्रवाल, सह सचिव शाश्वत यादव, कोषाध्यक्ष प्रतीक शाह, नार्थ जोन के उपाध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। बताया गया कि यह प्रदर्शनी 26 से 29 सितंबर 2026 तक हेलिपैड एग्ज़िबिशन सेंटर, गांधीनगर, गुजरात में ALUMEX INDIA 2026 के साथ आयोजित होगी। इसे भारत की एल्युमिनियम वैल्यू चेन की पहली व्यापक औद्योगिक प्रदर्शनी के रूप में विकसित किया जा रहा है।
भारत के पास प्रचुर संसाधन
एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि भारत के पास पर्याप्त बॉक्साइट भंडार हैं और देश दुनिया के प्रमुख एल्युमिना उत्पादकों में शामिल है। इसके बावजूद भारतीय एल्युमिनियम निर्माताओं, विशेषकर MSME क्षेत्र को कच्चा माल, उच्च ब्याज दर, ऊर्जा की बढ़ी लागत और करों के कारण महंगा पड़ रहा है। वैश्विक स्तर पर चीन जैसे देश अब प्राथमिक धातु निर्यात के बजाय वैल्यू-ऐडेड और इंजीनियर्ड एल्युमिनियम उत्पादों पर ध्यान दे रहे हैं। इससे उन्हें अधिक मूल्य संवर्धन और रोजगार मिला है। उद्योग का मानना है कि भारत को भी अपनी नीतियों का केंद्र प्राथमिक उत्पादन से हटाकर डाउनस्ट्रीम विनिर्माण पर लाना चाहिए।
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एक मंच पर आएगा पूरा इकोसिस्टम
एल्युमिनियम भारत-2026 में प्राथमिक उत्पादक, एक्सट्रूज़न-रोलिंग इकाइयां, रीसाइक्लिंग उद्योग, मशीनरी प्रदाता, नीति-निर्माता, वित्तीय संस्थान और वैश्विक खरीदार एक साथ आएंगे। यहां उद्योग सुधार, निवेश और नवाचार पर चर्चा होगी।
ALEMAI ने सरकार के सामने रखी चार प्रमुख मांगें
ALEMAI ने सरकार के सामने रखी चार प्रमुख मांगें की हैं। इनमें शुल्क संरचना को तर्कसंगत बनाना है। प्राथमिक एल्युमिनियम पर 7.5% सीमा शुल्क है, जबकि Free Trade Agreement के तहत कई डाउनस्ट्रीम उत्पाद शून्य शुल्क पर आ रहे हैं। इससे घरेलू उद्योग पर दबाव है। ऊर्जा और वित्तीय लागत घटाना, ताकि MSMEs वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें।
घरेलू खपत बढ़ाना भारत की 30 लाख टन वार्षिक एक्सट्रूज़न क्षमता है, लेकिन उत्पादन केवल 12-13 लाख टन है। मांग पूरी करने के लिए 15 लाख टन आयात हो रहा है। इसके साथ नीति को वैश्विक रुझानों के अनुरूप बनाना है।
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उद्योग के सामने बड़ी चुनौती
बताया गया की ASEAN और UAE जैसे देशों से FTA के कारण तैयार एल्युमिनियम उत्पाद बिना शुल्क के भारत आ रहे हैं। इससे घरेलू मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम उद्योग घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में कमजोर हो रहा है। क्षमता का कम उपयोग, निवेश में गिरावट और MSMEs का संघर्ष इसी का परिणाम है। ALEMAI का कहना है कि एल्युमिनियम भारत-2026 के जरिए देशभर में इस बात पर विमर्श शुरू होगा कि कैसे भारत अपने बॉक्साइट संसाधनों का बेहतर उपयोग कर वैल्यू-ऐडेड एल्युमिनियम उत्पादों का वैश्विक केंद्र बन सकता है।
