Awarapan 2: इमरान हाशमी की 'आवारापन 2' ने जीता दिल, मगर इन 5 बातों का ध्यान रखते तो बन जाती ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर!

Published on 15 अग॰ 2026

Awarapan 2: इमरान हाशमी की 'आवारापन 2' ने जीता दिल, मगर इन 5 बातों का ध्यान रखते तो बन जाती ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर!

आवारापन 2 की क्या कमियां रही हैं?

Awarapan 2: साल 2007 में आई फिल्म ‘आवारापन’ भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में से है, जिसने समय के साथ ‘कल्ट क्लासिक’ का दर्जा हासिल किया. पूरे 19 साल के लंबे इंतजार के बाद जब इमरान हाशमी ने एक बार फिर बड़े पर्दे पर ‘शिवम पंडित’ के टूटे हुए और खामोश किरदार में वापसी की, तो थिएटर्स में उनके पुराने फैंस की यादें ताजा हो गईं. फिल्म जज्बातों पर खरी उतरती है और इमरान हाशमी की मैच्योर एक्टिंग ये साबित करती है कि शिवम का दर्द आज भी उनके भीतर जिंदा है.

लेकिन, सिनेमाई कसावट और मेकिंग के नजरिए से अगर ‘आवारापन 2’ का बारीकी से विश्लेषण किया जाए, तो 5 ऐसी बातें साफ नजर आती हैं, जिन्होंने इसे एक बहुत अच्छी फिल्म तो बनाया, मगर एक ‘ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर’ बनने से रोक दिया.

1. पहली फिल्म जैसी ‘डार्क और रॉ’ इंटेंसिटी की कमी

पहली ‘आवारापन’ की यूएसपी उसका डार्क, तल्ख और रियलिस्टिक टोन था, जो निर्देशक मोहित सूरी का ट्रेडमार्क माना जाता है. इस बार कमान नितिन कक्कड़ के हाथों में थी. नितिन एक बेहतरीन निर्देशक हैं, लेकिन उनका ट्रीटमेंट थोड़ा ज्यादा मेलोड्रामाटिक और सॉफ्ट हो गया. पहली फिल्म में अपराध की दुनिया, बंदूकों का खौफ और शिवम का अंदरूनी खालीपन जिस खुरदुरे (Raw) अंदाज में दिखाया गया था, वो धार इस बार कुछ जगहों पर कुंद नजर आती है.

2. संगीत में मिसिंग रहा ‘तो फिर आओ’ जैसा रूहानी जादू

विशेष फिल्म्स और इमरान हाशमी के किसी भी प्रोजेक्ट की 50% जान उसका म्यूजिक होता है. पहली फिल्म के गाने ‘तो फिर आओ’ और ‘तेरा मेरा रिश्ता’ आज भी हर टूटे दिल की आवाज हैं. आवारापन 2′ का बैकग्राउंड स्कोर और गाने सुनने में अच्छे जरूर लगते हैं, लेकिन उनमें वो रूहानी कशिश और पागलपन गायब है जो किसी एल्बम को हमेशा-हमेशा के लिए अमर बना देता है. एक कल्ट सीक्वल के लिए जिस नए चार्टबस्टर म्यूजिक की जरूरत थी, वहां पर फिल्म का म्यूजिक थोड़ा पीछे रह गया.

Awarapan 2 Poster

आवारापन 2 का पोस्टर

3. नए किरदारों की कमजोर बॉन्डिंग और बैकस्टोरी

पहली फिल्म में आलिया (श्रिया सरन) और मलिक (आशुतोष राणा) जैसे किरदारों के साथ शिवम का जो रिश्ता था, उसमें एक रॉ इमोशंस थे. ‘आवारापन 2’ में दिशा पाटनी और बाकी नए किरदारों को स्क्रीन स्पेस तो दिया गया, लेकिन उनकी बैकस्टोरी इतनी मजबूत नहीं रखी गई कि दर्शक उनके साथ पूरी तरह इमोशनल रूप से जुड़ सकें. शबाना आजमी ने अपने ग्रे शेड किरदार में जरूर जान फूंकी है, लेकिन कई नए चेहरे सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाने का जरिया बनकर रह गए.

4. प्रेडिक्टेबल क्लाइमेक्स

फिल्म का फर्स्ट हाफ जहां शिवम के अतीत, उसके दर्द और पुरानी यादों को बड़े सलीके से बुनता है, वहीं सेकंड हाफ में रफ्तार सुस्त पड़ जाती है. कहानी कई जगह खिंचती हुई महसूस होती है. इसके अलावा, क्लाइमेक्स में जिस भारी शॉक-वैल्यू और एंडिंग की उम्मीद दर्शक 19 साल के इंतजार के बाद कर रहे थे, वो थोड़ा प्रेडिक्टेबल हो गया. अगर आखिरी 20 मिनट में ट्विस्ट्स को और धार दी जाती, तो थिएटर्स से निकलने वाले दर्शक सन्न रह जाते.

5. एक्शन और कोर इमोशन के बीच असंतुलन

‘आवारापन’ मूल रूप से एक पश्चाताप की कहानी है. इस बार फिल्म को मॉडर्न टच और लार्जर-दैन-लाइफ अपील देने के चक्कर में कुछ एक्शन सीन्स को जरूरत से ज्यादा स्टाइलाइज्ड कर दिया गया. जब गोलियां और भारी-भरकम स्टंट्स पर्दे पर ज्यादा हावी होते हैं, तो शिवम पंडित की खामोशी और उसकी आंखों का दर्द पीछे छूट जाता है. एक्शन और इमोशन के बीच यह संतुलन थोड़ा और बेहतर होना चाहिए था.

इसमें कोई शक नहीं है कि ‘आवारापन 2’ इमरान हाशमी के फैंस और 2000 के दौरान को मिस करने वाले सिनेप्रेमियों के लिए एक दिल छू लेने वाला अनुभव है. इमरान ने एक बार फिर दिखा दिया है कि दर्द को स्क्रीन पर जीना उनसे बेहतर कोई नहीं जानता. लेकिन अगर फिल्म के म्यूजिक, रॉ ट्रीटमेंट और स्क्रीनप्ले की बुनावट पर थोड़ी और बारीकी से काम किया गया होता, तो ये फिल्म सिर्फ दिल जीतने तक सीमित न रहती, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचते हुए एक ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर साबित होती.

सोनाली नाईक

सोनाली नाईक

सोनाली करीब 15 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रहार न्यूज पेपर से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. इस न्यूज पेपर में बतौर रिपोर्टर काम करते हुए सोनाली ने एंटरटेनमेंट बीट के साथ-साथ सीसीडी (कॉलेज कैंपस और ड्रीम्स) जैसे नए पेज पर काम किया. उन्होंने वहां 'फैशनेरिया' नाम का कॉलम भी लिखा. इस दौरान एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन पत्रकारिता के जुनून की वजह से इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के इरादे से 2017 में टीवी9 से सीनियर कोरेस्पोंडेंट के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. टीवी9 गुजराती चैनल में 3 साल तक एंटरटेनमेंट शो की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनाली 2020 में टीवी9 हिंदी डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम में शामिल हुईं. सोनाली ने टीवी9 के इस सफर में कई ब्रेकिंग, एक्सक्लूसिव न्यूज और ऑन ग्राउंड कवरेज पर काम किया है. हिंदी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, इंग्लिश भाषा की जानकारी होने के कारण डिजिटल के साथ-साथ तीनों चैनल के लिए भी उनका योगदान रहा है. रियलिटी शोज और ग्लोबल कंटेंट देखना सोनाली को पसंद है. नई भाषाएं सीखना पसंद है. संस्कृत भाषा के प्रति खास प्यार है. नुक्कड़ नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखना पसंद है. सोनाली के लिखे हुए स्ट्रीट प्लेज 'पानी', 'मेड इन चाइना' की रीडिंग 'आल इंडिया रेडियो' पर सोशल अवेयरनेस के तौर पर की जा चुकी है.

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