
बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल से पहले वित्त मंत्रालय ने यूनियनों से आंदोलन का रास्ता छोड़कर बातचीत के जरिए लंबित मुद्दों को सुलझाने की अपील की है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने विभिन्न मांगों को लेकर 28 सितंबर से तीन दिन की हड़ताल का आह्वान किया है। सरकार का कहना है कि कर्मचारियों की कई प्रमुख मांगों पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि बाकी मुद्दों पर बातचीत जारी है।
28 सितंबर से प्रस्तावित है तीन दिन की हड़ताल
बैंक यूनियनों की प्रस्तावित हड़ताल 28 सितंबर से शुरू होगी। इसका समय बैंकों के छमाही खातों के समापन की अवधि के साथ भी पड़ रहा है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, 30 सितंबर को हाफ-इयर्ली अकाउंट्स क्लोजिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम होते हैं।
हड़ताल से पहले और बाद की छुट्टियों को मिलाकर बैंकिंग सेवाओं पर कई दिनों तक असर पड़ने की आशंका है। इसका प्रभाव ग्राहकों के साथ-साथ कारोबारियों, सरकारी लेनदेन और बैंकिंग से जुड़े अन्य कामकाज पर भी पड़ सकता है।
सरकार ने कर्मचारियों से क्या कहा?
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि श्रमिक संगठनों की अधिकांश चिंताओं पर काफी हद तक समाधान निकाला जा चुका है। जो मांगें अभी लंबित हैं, उन पर विचार जारी है। मंत्रालय ने बैंक कर्मचारियों से हड़ताल से बचने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है।
सरकार का कहना है कि बैंकिंग सेवाएं आम लोगों के दैनिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं और इनके निर्बाध संचालन को बनाए रखना जरूरी है।
PLI योजना को लेकर भी था विवाद
बैंक कर्मचारियों के संगठनों की प्रमुख मांगों में प्रदर्शन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना यानी Performance Linked Incentive (PLI) को वापस लेने का मुद्दा भी शामिल था।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, विस्तृत चर्चा के बाद इस योजना को सितंबर की शुरुआत में फिलहाल रोक दिया गया। सरकार ने इसे श्रमिक संगठनों की दो प्रमुख मांगों में से एक के समाधान के तौर पर बताया है।
मंत्रालय के मुताबिक, बातचीत जारी रहने के बावजूद 11 सितंबर को बैंक कर्मचारियों की ओर से एक दिन की हड़ताल की गई थी।
कर्मचारियों के लिए सरकार ने गिनाए ये कदम
वित्त मंत्रालय ने बैंक कर्मचारियों के वेतन, कामकाजी परिस्थितियों और कल्याण से जुड़े कई कदमों का भी उल्लेख किया है। इनमें सभी श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए वेतन और भत्तों मं संशोधन तथा नए वेतनमान शामिल हैं।
इसके अलावा कर्मचारी कल्याण कोष (SWF) से जुड़े प्रावधानों और विभिन्न वरिष्ठ प्रबंधन स्तरों पर कार्यकारी पदों की संख्या बढ़ाने का भी जिक्र किया गया है।
सरकार के मुताबिक आगामी द्विपक्षीय वेतन समझौते को लेकर बातचीत भी शुरू की जा चुकी है। इसका उद्देश्य नवंबर 2027 की समयसीमा से पहले समझौते को पूरा करना है।
बैंक बंद रहने से किन सेवाओं पर असर पड़ सकता है?
अगर प्रस्तावित हड़ताल होती है तो शाखाओं में होने वाले कई नियमित काम प्रभावित हो सकते हैं। इनमें कैश जमा और निकासी, चेक से जुड़े काम, शाखा स्तर की बैंकिंग सेवाएं और अन्य ऑफलाइन सेवाएं शामिल हो सकती हैं।
हालांकि डिजिटल बैंकिंग, UPI और एटीएम जैसी सेवाओं की स्थिति अलग हो सकती है और उनका संचालन बैंक तथा सेवा के आधार पर जारी रह सकता है।
30 सितंबर की क्लोजिंग क्यों महत्वपूर्ण?
वित्त मंत्रालय ने खास तौर पर 30 सितंबर की तारीख का उल्लेख किया है। यह बैंकों के छमाही खातों के समापन की तारीख है। इस दौरान मिलान, प्रावधान, ट्रेजरी और बाजार से जुड़े कई काम पूरे किए जाते हैं।
मंत्रालय का कहना है कि हड़ताल और उससे पहले की छुट्टियों का एक साथ पड़ना बैंकिंग कामकाज को कई दिनों तक प्रभावित कर सकता है। इसका असर ग्राहकों, कारोबारियों और सरकारी लेनदेन पर पड़ने की संभावना है।
सरकार का जोर बातचीत पर
वित्त मंत्रालय ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक वित्तीय समावेशन, डिजिटल बैंकिंग, वित्तीय साक्षरता और ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सरकार का कहना है कि बैंक कर्मचारियों की वास्तविक चिंताओं और कल्याण से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए किया जा सकता है। ऐसे में मंत्रालय ने यूनियनों से प्रस्तावित हड़ताल से बचने और बैंकिंग सेवाओं को सामान्य बनाए रखने की अपील की है।