हैदराबाद की नेशनल एकेडमी ऑफ़ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (नालसार) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 400 से ज्यादा पूर्व छात्रों ने एक ओपन लैटर साइन किया है. इसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा द्वारा जारी उन सर्कुलर की निंदा की गई है, जिनमें छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई थी.
पत्र के अनुसार बीसीआई के संदेशों में अभिव्यक्ति की आजादी और छात्रों की मानसिक सेहत के प्रति अनदेखी दिखाई दी. पत्र में तर्क दिया गया है कि रेगुलेटर के पास यूनिवर्सिटी के आंतरिक मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं था.
‘बीसीआई के पास इसका कोई अधिकार नहीं था’
पत्र में कहा गया है कि ये पत्र छात्रों और उनकी मानसिक सेहत के प्रति सहानुभूति की कमी पर है. पत्र में बताया गया है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी के मौलिक अधिकार की अनदेखी और युवा छात्रों व पढ़े-लिखे फैकल्टी के मामलों से मनमाने और कठोर तरीके से निपटने की प्रवृत्ति को दर्शाते हैं. यह स्पष्ट है कि बीसीआई के पास ये पत्र जारी करने का कोई अधिकार नहीं था. इसमें भी चिंताजनक बात यह है कि पहले पत्र की भाषा छात्रों और फैकल्टी पर दबाव डालने वाली धमकियों के जरिए हावी होने की मंशा दिखाती है. इससे यूनिवर्सिटी कैंपस में अभिव्यक्ति पर रोक लगती है और छात्रों की मानसिक सेहत पर भारी दबाव पड़ता है.
‘वैधानिक संस्था के लिए ये बातें शोभा नहीं देती’
लेटर में कहा गया कि पहले पत्र की भाषा न सिर्फ आपत्तिजनक है, बल्कि यह छात्रों और फैकल्टी की छवि भी खराब करती है. इसमें उन पर गुटबाजी, गंदी राजनीति, घटिया राजनीति और छात्रों को भड़काने और गुमराह करने के आरोप लगाए गए हैं. कानूनी पेशे के प्रति जिम्मेदारियों वाली एक वैधानिक संस्था के लिए ऐसी बेतुकी बातें शोभा नहीं देतीं.”
लेटर में कहा गया कि भारत की आजादी की लड़ाई को देखें तो पता चलता है कि अलग-अलग विचारधाराओं वाले वकील औपनिवेशिक शासन का विरोध करने के लिए एक साथ आए थे और उन्होंने अपनी आजादी से बोलने के अधिकार का इस्तेमाल किया था. भारत के लॉ छात्र उसी विरासत के वारिस हैं. वे अपनी जिंदगी के ऐसे दौर में हैं. यहां उन्हें नए विचारों के साथ प्रयोग करने चाहिए. इस माहौल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और इसकी रक्षा की जानी चाहिए, न कि उत्पीड़न की धमकियों का शिकार बनाया जाना चाहिए.

पीयूष पांडे
प्रमुखत: सुप्रीम कोर्ट, वित्त मंत्रालय और भारतीय निर्वाचन आयोग की खबरों की जिम्मेदारी. पत्रकारिता में 22 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक भास्कर और आज में सेवाएं दीं. खबरिया चैनल और अखबार के अलावा दैनिक भास्कर के डिजिटल प्लेटफॉर्म में जिम्मेदारी निभाई, जबकि ऑल इंडिया रेडियो के आमंत्रण पर कई विशिष्ट जनों के साक्षात्कार किए.
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