मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-सरस्वती मंदिर विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट आगामी पांच अगस्त को अंतिम और निर्णायक सुनवाई करने जा रहा है। सर्वोच्च अदालत ने परिसर के भीतर नमाज पढ़ने की अनुमति देने से साफ इनकार करते हुए प्रशासन को बाहर वैकल्पिक स्थान तलाशने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने देश की शीर्ष पुरातात्विक संस्था, एएसआई को भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है।
- Published: 17 Jul 2026, 04:23 PM IST
- Last Updated: 17 Jul 2026, 04:24 PM IST
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के भोजशाला-सरस्वती मंदिर विवाद को लेकर देश की सुप्रीम कोर्ट से बड़ा आदेश सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील धार्मिक विवाद से जुड़े सभी लंबित पहलुओं पर आगामी पांच अगस्त को अपनी अंतिम और निर्णायक सुनवाई करेगी।
इस प्रक्रिया के दौरान मध्य प्रदेश सरकार और धार जिला प्रशासन को अनिवार्य रूप से अदालत के समक्ष यह लिखित जानकारी प्रस्तुत करनी होगी कि मुस्लिम पक्ष के लिए प्रत्येक शुक्रवार को अदा की जाने वाली जुमे की नमाज हेतु परिसर से बाहर कौन सा उपयुक्त वैकल्पिक स्थान निर्धारित किया गया है। फिलहाल, न्यायालय ने कानून-व्यवस्था और पुरातात्विक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भोजशाला परिसर के आंतरिक भाग में नमाज पढ़ने की अनुमति देने से पूरी तरह इनकार कर दिया है।
14 जुलाई के पूर्व आदेश का हवाला, दोपहर 1 से 3 बजे के बीच दो घंटे की समय सीमा में वैकल्पिक स्थान देने के निर्देश
उच्च न्यायालय के पूर्व फैसलों के खिलाफ आई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बीते 14 जुलाई को जारी अपने विस्तृत दिशा-निर्देशों में मध्य प्रदेश शासन को कड़े निर्देश दिए थे। अदालत ने स्पष्ट किया था कि मुस्लिम समाज के लोगों को प्रत्येक शुक्रवार को जुमे की नमाज अदा करने के लिए दोपहर 1 बजे से लेकर 3 बजे के बीच, दो घंटे की समय सीमा के भीतर भोजशाला परिसर के नजदीक ही किसी अन्य उपयुक्त और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था कराई जाए।
पीठ ने अपने आदेश में यह पूरी तरह साफ कर दिया था कि किसी भी अप्रत्याशित विवाद या तनाव से बचने के लिए मुख्य विवादित स्मारक के ऐतिहासिक और विधिक परिधि के भीतर किसी भी प्रकार की मजहबी प्रार्थनाएं आयोजित नहीं की जा सकेंगी।
हिंदू पक्ष की नियमित पूजा-अर्चना पहले की तरह रहेगी जारी, मां वाग्देवी की आराधना पर किसी प्रकार की रोक नहीं
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने इस आदेश के माध्यम से यह भी पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि भोजशाला परिसर के भीतर हिंदू पक्ष द्वारा की जाने वाली पारंपरिक और नियमित पूजा-अर्चना की व्यवस्था पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध या रोक नहीं लगाई गई है।
हिंदू धर्मावलंबियों द्वारा सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक मां वाग्देवी की जाने वाली दैनिक आराधना और अनुष्ठानिक गतिविधियां पूर्व की स्थापित व्यवस्था के अनुसार ही सतत रूप से संचालित होती रहेंगी। इस स्पष्ट विधिक व्यवस्था के बाद परिसर में शांति बनाए रखने के लिए स्थानीय सुरक्षा बलों को कड़े पहरे पर तैनात किया गया है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को मूल ढांचे में छेड़छाड़ न करने की हिदायत, धार जिला प्रशासन विधिक तैयारियों में जुटा
इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने देश की शीर्ष पुरातात्विक संस्था, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भी कड़ा निर्देश जारी किया है। अदालत ने कहा कि एएसआई सक्षम न्यायालय की लिखित और आधिकारिक अनुमति प्राप्त किए बिना भोजशाला-सरस्वती मंदिर के मूल पुरातात्विक ढांचे, दीवारों या स्तंभों में किसी भी प्रकार का कोई भौतिक बदलाव, जीर्णोद्धार या छेड़छाड़ बिल्कुल नहीं करेगा।
इसके साथ ही, अदालत ने इस विवाद से जुड़े अन्य सभी विधिक पक्षों और प्रतिवादियों को औपचारिक नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका दिया है। वर्तमान में, धार जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी स्थानीय मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर पांच अगस्त की सुनवाई से पहले एक सर्वमान्य वैकल्पिक स्थान तय करने की विधिक कवायद में जुट गए हैं।