Bhopal illegal House Nagar Nigam Action: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal News) में अवैध कॉलानियों पर निगम का शिकंजा कसने लगा है। यहां वाबंडियां कलां (Bawadiya Kalan) के 12 मकानों को निगम ने अवैध घोषित कर दिया है। ऐसे में यदि आपका भी यहां मकान हैं तो आपको अलर्ट रहने वालों की लिए जरूरी खबर है।
शुभालय विहार में 22 मकानों पर नगर निगम की कार्रवाई
भोपाल के बावड़िया कलां स्थित शुभालय विहार (Shubhalye Vihar) में नगर निगम ने 22 मकानों को अवैध निर्माण मानते हुए नोटिस जारी किए हैं। यह मामला गौरव गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित से जुड़ा है। निगम के मुताबिक इन मकानों का निर्माण टीएंडसीपी यानी टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से स्वीकृत नक्शे के विपरीत किया गया है। कार्रवाई के तहत 17 मकान मालिकों को 15 दिन का समय दिया गया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने स्तर पर अवैध निर्माण को हटा लें।
वहीं 5 ऐसे मकान हैं, जिनका निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है। इन मकानों के मालिकों को तत्काल निर्माण कार्य रोकने के लिए कहा गया है। इस कार्रवाई के बाद कॉलोनी में निर्माण को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। खास बात यह है कि जिन निर्माणों को अब अवैध बताया जा रहा है, उनमें से बिल्डिंग परमिशन नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने ही जारी की थी।
हाईकोर्ट की अवमानना याचिका के बाद शुरू हुई कार्रवाई
शुभालय विहार के इन निर्माणों पर नगर निगम की कार्रवाई हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिका के बाद हुई है। जानकारी के मुताबिक उपायुक्त सहकारिता ने 13 फरवरी 2026 को नगर निगम को एक पत्र भेजकर मामले में कार्रवाई करने के लिए कहा था। इसके बाद निगम की ओर से निर्माणों की जांच और नोटिस की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। पहले 17 मकानों को नोटिस जारी किए गए थे।
अब शेष 5 मकानों को भी नोटिस जारी कर दिए गए हैं। इस तरह कुल 22 निर्माण निगम की कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं। अधिकारियों की ओर से अधूरे मकानों में काम तत्काल बंद करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि बाकी मकान मालिकों को खुद निर्माण हटाने के लिए 15 दिन की समयसीमा दी गई है।
मामले में याचिकाकर्ता विवेक दीक्षित ने भी जमीन और प्लॉट बिक्री से जुड़े कई सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार इस मामले में संस्था के वास्तविक सदस्यों के अधिकार प्रभावित हुए हैं।
44 संस्थापक सदस्यों की जमीन पर 48 प्लॉट बेचने का आरोप
याचिकाकर्ता विवेक दीक्षित के मुताबिक गौरव गृह निर्माण सहकारी संस्था (Grah Nirman Sanstha) के 44 संस्थापक सदस्यों की करीब 5 एकड़ जमीन पर 48 प्लॉट अवैध तरीके से बेचे गए। उनका दावा है कि जिन लोगों ने ये प्लॉट खरीदे, वे संस्था के सदस्य नहीं थे। साथ ही इन खरीदारों की ओर से संस्था को राशि दिए जाने का भी मामला सामने आया है। आरोप है कि संस्था के वास्तविक संस्थापक सदस्यों को उनकी जमीन का हिस्सा नहीं मिल सका।
इस पूरे मामले में सहकारिता विभाग ने भी जांच की है। विभाग की ओर से इन रजिस्ट्रियों को शून्य कराने के लिए सिविल कोर्ट में केस दायर किया गया है। अब नगर निगम की ओर से 22 मकानों को लेकर जारी किए गए नोटिस ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि रजिस्ट्रियों और जमीन से जुड़े विवाद का अंतिम फैसला संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा। फिलहाल निगम की कार्रवाई निर्माण की वैधता और स्वीकृत नक्शे से जुड़े पहलुओं पर केंद्रित है।
38 रजिस्ट्रियों की 18.74 करोड़ की राशि संस्था में जमा नहीं हुई
फरवरी 2026 में सहकारिता विभाग की जांच में रजिस्ट्रियों से जुड़ी वित्तीय जानकारी भी सामने आई थी। जांच के अनुसार 2018 से 2023 के बीच वास्तविक सदस्यों को दरकिनार कर बाहरी लोगों के नाम करीब 50 रजिस्ट्रियां की गईं। इनमें से 32 रजिस्ट्रियों को जांच में अवैध पाया गया। इसके अलावा 38 रजिस्ट्रियों से जुड़ी करीब 18.74 करोड़ रुपए की राशि संस्था के खाते में जमा नहीं होने की बात सामने आई।
जांच में रजिस्ट्रियों और संस्था के वित्तीय लेनदेन को लेकर भी सवाल उठे हैं। ऑपरेटर अनिल कुमार रावत की रिपोर्ट में फर्जी दस्तावेज और हैंडराइटिंग में हेरफेर का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इन तरीकों से वास्तविक सदस्यों के अधिकार प्रभावित हुए। ये रजिस्ट्रियां तत्कालीन अध्यक्ष अनिता विष्ट और तत्कालीन प्रबंधक मनोज साहू के कार्यकाल से जुड़ी बताई गई हैं। सहकारिता विभाग की जांच के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी चल रही है।
बिल्डिंग परमिशन पर भी उठे सवाल, अब आगे क्या होगा?
शुभालय विहार मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जिन मकानों को नगर निगम अब अवैध बता रहा है, उनमें से कुछ को बिल्डिंग परमिशन कैसे जारी हुई। नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा की ओर से अनुमति दिए जाने और बाद में उन्हीं निर्माणों को स्वीकृत नक्शे के विपरीत बताकर नोटिस जारी करने से प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं।
फिलहाल 17 मकान मालिकों के पास अवैध निर्माण हटाने के लिए 15 दिन का समय है, जबकि 5 अधूरे मकानों का काम रोकने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर जमीन, प्लॉट और रजिस्ट्रियों से जुड़े मामले सहकारिता विभाग और अदालत की प्रक्रिया में हैं। 18.74 करोड़ रुपए की राशि और 38 रजिस्ट्रियों से जुड़े निष्कर्ष भी जांच का हिस्सा हैं। ऐसे में अब आगे की कार्रवाई संबंधित विभागों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी। मामले में अंतिम स्थिति आने तक सभी दावों और आरोपों को संबंधित जांच और अदालत के निष्कर्षों के संदर्भ में ही देखा जाएगा।
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