नूरसराय प्रखंड के मध्य विद्यालय परासी में मंगलवार को मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) खाने के बाद करीब 15 बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बच्चों ने गले में तेज जलन और पेट दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, खाने में नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर (सर्फ) मिलाने के आरोपों के बीच जिला शिक्षा पदाधिकारी ने इसे अफवाह करार दिया है।
नमक की जगह सर्फ डालने का आरोप, बच्चों ने बताई पूरी घटना
पीड़ित छात्रा प्रीति कुमारी के अनुसार, मंगलवार को बच्चों को चावल और आलू-सोयाबीन की सब्जी परोसी गई थी। खाना खाते ही उन्हें सर्फ जैसा स्वाद महसूस हुआ। विद्यालय के प्रधानाध्यापक शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि भोजन नगरनौसा के एक एनजीओ से बनकर आता है। दूसरी पंगत में जब बच्चे खाना खा रहे थे, तब कक्षा एक की एक छात्रा, जो रसोइया की नतनी है, ने ऊपर से नमक मांगा। आरोप है कि रसोइया ने भूलवश नमक के बदले सर्फ उठा लिया और दो-चार बच्चों की थाली में डाल दिया। इसके बाद खाना खाते ही बच्चों के गले में जलन होने लगी।
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गले में जलन और पेट दर्द के बाद अस्पताल में कराया भर्ती
बीमार बच्चों में राखी कुमारी, वैष्णवी, प्रीति, शिवानी, चांदनी, आरूषी, लक्ष्मी, सुहानी, अनु, सजनी, गुलशन, सचिन, अजीत, कल्लू और वंदना शामिल हैं। घटना के बाद बच्चों को पहले डेंटल कॉलेज, भागन बीघा ले जाया गया, जहां से उन्हें बिहारशरीफ सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने बताया कि प्राथमिक उपचार के बाद सभी बच्चों की स्थिति स्थिर है और डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है।
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DEO ने सर्फ मिलाने के आरोप को बताया अफवाह
दूसरी ओर, जिला शिक्षा पदाधिकारी हेमचंद्र ने खाने में सर्फ मिलाने की बात को सिरे से खारिज करते हुए इसे अफवाह बताया। उन्होंने तर्क दिया कि उसी एनजीओ की ओर से मंगलवार को 23 हजार बच्चों को खाना परोसा गया था। यदि भोजन में कोई हानिकारक तत्व होता तो उसका व्यापक असर दिखाई देता।
जांच रिपोर्ट के बाद दोषियों पर होगी कार्रवाई
डीईओ ने कहा कि अस्पताल में भर्ती सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें जल्द छुट्टी दे दी जाएगी। मामले की गहन विभागीय जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि कोई भी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।