Bihar Liquor Ban : महिलाओं के नाम पर बनी शराबबंदी... और अब वही महिलाएं कर रहीं शराब तस्करी! आखिर किस दिशा में जा रहा है बिहार?

Published on 22 जुल॰ 2026

Bihar Liquor Ban : बिहार में जब शराबबंदी लागू की गई थी, तब इसे सिर्फ एक कानून नहीं बल्कि सामाजिक क्रांति बताया गया था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दावा किया था कि शराबबंदी से सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं को होगा। कहा गया था कि शराब से टूटते परिवार बचेंगे, घरेलू हिंसा कम होगी और महिलाओं का सम्मान बढ़ेगा। लेकिन अब जो तस्वीरें और घटनाएं सामने आ रही हैं, वे इस दावे पर बड़े सवाल खड़े करती हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस शराबबंदी को महिलाओं के हित में लागू किया गया था, आखिर उसी बिहार में महिलाएं ही शराब तस्करी के नेटवर्क का हिस्सा क्यों बन रही हैं? क्या शराबबंदी ने शराब का कारोबार खत्म किया या उसे सिर्फ अंडरग्राउंड कर दिया? क्या कानून का डर खत्म हो चुका है? या फिर बेरोजगारी और मुनाफे की लालच ने महिलाओं को भी इस अवैध धंधे में धकेल दिया है? इन्हीं सवालों के बीच मुजफ्फरपुर से सामने आया एक मामला शराबबंदी व्यवस्था की हकीकत को उजागर करता नजर आ रहा है।

मुजफ्फरपुर उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर प्रकाश कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ महिला शराब तस्कर उत्तर प्रदेश से ट्रेन के जरिए विदेशी शराब की बड़ी खेप लेकर बिहार आ रही हैं। सूचना के अनुसार महिलाएं छपरा रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद एक ऑो में सवार होकर मुजफ्फरपुर की ओर रवाना हुई थीं।

सूचना मिलते ही उत्पाद विभाग हरकत में आया और तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम की कमान एएसआई नीरज कुमार और एएसआई रिंकू कुमारी को सौंपी गई। इसके बाद पूरी टीम ने सदर थाना क्षेत्र के पताही स्थित छपरा-मुजफ्फरपुर मुख्य मार्ग पर घेराबंदी कर दी।

कुछ ही देर बाद एक संदिग्ध ऑटो को रोककर उसकी तलाशी ली गई। जांच के दौरान जो खुलासा हुआ, उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया। ऑटो में बैठी पांचों महिलाओं के पास से विदेशी शराब बरामद हुई। इसके बाद सभी महिलाओं को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

इस मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह भी सामने आया कि जिस ऑटो से महिलाएं छपरा से मुजफ्फरपुर पहुंच रही थीं, उस ऑटो चालक को भी इस बात की भनक तक नहीं थी कि उसके वाहन में शराब की तस्करी की जा रही है। यानी तस्करों ने अपना नेटवर्क और तरीका इतना शातिर बना लिया है कि सामान्य लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं हो पाती।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि गिरफ्तार पांचों महिलाएं मुजफ्फरपुर जिले के सिकंदरपुर ओपी क्षेत्र के अखाड़ाघाट की रहने वाली हैं। उत्पाद विभाग के अनुसार ये महिलाएं लंबे समय से उत्तर प्रदेश से ट्रेन के जरिए शराब लाकर मुजफ्फरपुर में उसकी बिक्री कर रही थीं। यानी यह कोई पहली घटना नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

उत्पाद इंस्पेक्टर प्रकाश कुमार ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई। गिरफ्तार महिलाओं के पास से विदेशी शराब बरामद हुई है और अब उनसे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि इनके पीछे कौन लोग हैं, शराब कहां से खरीदी जाती थी और किन-किन इलाकों में इसकी सप्लाई की जाती थी। लेकिन इस पूरी कार्रवाई के बाद कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब सरकार और प्रशासन दोनों को देना होगा।

अगर बिहार में शराबबंदी पूरी तरह सफल है तो फिर उत्तर प्रदेश से लगातार शराब की खेप बिहार कैसे पहुंच रही है? अगर सीमाओं पर निगरानी इतनी मजबूत है तो तस्कर ट्रेन और सड़क दोनों रास्तों से शराब लाने में कैसे सफल हो रहे हैं? और सबसे अहम सवाल, आखिर महिलाएं इतनी बड़ी संख्या में इस अवैध कारोबार में क्यों उतर रही हैं? क्या यह शराबबंदी की विफलता का संकेत है? क्या कानून ने शराब की मांग खत्म नहीं की बल्कि तस्करी का नया बाजार खड़ा कर दिया? या फिर अपराधियों ने महिलाओं को ढाल बनाकर नया नेटवर्क तैयार कर लिया है?

यह घटना सिर्फ पांच महिलाओं की गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि बिहार की शराबबंदी व्यवस्था के सामने खड़े उन सवालों की याद दिलाती है जिन पर लंबे समय से बहस होती रही है। एक ओर सरकार शराबबंदी को अपनी बड़ी उपलब्धि बताती है, वहीं दूसरी ओर आए दिन शराब बरामदगी, तस्करी और गिरफ्तारी की खबरें सामने आती रहती हैं।

अब देखना यह होगा कि इस कार्रवाई के बाद उत्पाद विभाग सिर्फ पांच महिलाओं तक ही सीमित रहता है या फिर इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचकर उन बड़े चेहरों को भी बेनकाब करता है, जो पर्दे के पीछे बैठकर इस अवैध कारोबार को चला रहे हैं। क्योंकि अगर सिर्फ छोटे तस्कर पकड़े जाते रहेंगे और सरगना बचते रहेंगे, तो शराबबंदी पर उठते सवाल शायद कभी खत्म नहीं होंगे।