गोंडा में BJP को झटका! भाजपा छोड़ अखिलेश यादव के साथ आए बृजभूषण शरण सिंह के करीबी भवानी भीख शुक्ला

Published on 16 अक्टू॰ 2026

Gonda: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। गोंडा में जिला पंचायत सदस्य भवानी भीख शुक्ला ने अपने अपने पांच बेटों- भगवान शुक्ला, कृष्ण भगवान शुक्ला, शिव भगवान शुक्ला, विष्णु भगवान शुक्ला और शंकर भगवान शुक्ला और परिवार के साथ समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। अखिलेश यादव की मौजूदगी में हुई इस राजनीतिक एंट्री को बीजेपी के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि शुक्ला परिवार को पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का करीबी माना जाता रहा है।

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लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भवानी भीख शुक्ला और उनके परिवार के सदस्यों ने पार्टी की सदस्यता ली। इस मौके पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी का स्वागत किया। इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि पहली बार इतने भगवान एक साथ पार्टी कार्यालय में आए हैं। हमारे समाज में इन नामों को कोई नहीं भूल सकता। खासकर सनातनी इन नामों को कभी नहीं भूल सकते। गोंडा की राजनीति में इस घटनाक्रम की चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि परिवार का संबंध लंबे समय से बीजेपी के राजनीतिक खेमे से बताया जाता रहा है।

बीजेपी से नाराजगी बनी पार्टी छोड़ने की वजह?

शुक्ला परिवार ने बीजेपी छोड़ने के पीछे पार्टी में उपेक्षा का आरोप लगाया है। परिवार के सदस्यों के मुताबिक, करीब एक साल पहले उन पर हमला हुआ था, जिसमें उन्हें चोटें आईं और अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उनका आरोप है कि इस मामले में संबंधित बीजेपी विधायक के खिलाफ न तो उचित कार्रवाई हुई और न ही मुकदमा दर्ज किया गया। परिवार का कहना है कि लगातार उपेक्षा महसूस होने के कारण उन्होंने समाजवादी पार्टी में शामिल होने का फैसला लिया है।

बृजभूषण शरण सिंह के प्रति सम्मान बरकरार

सपा में शामिल होने के बावजूद शुक्ला परिवार ने बृजभूषण शरण सिंह के प्रति व्यक्तिगत सम्मान बनाए रखने की बात कही है। उनके अनुसार, पार्टी बदलने के फैसले पर बृजभूषण सिंह से कोई बातचीत या सलाह नहीं हुई थी।

2027 के चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?

गोंडा में इस राजनीतिक बदलाव को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। अखिलेश यादव के लिए यह घटनाक्रम स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संदेश देने का अवसर है। हालांकि, भवानी भीख शुक्ला और उनके परिवार के सपा में आने से क्षेत्र के चुनावी समीकरणों पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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