September 7, 2026

शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया को लेकर सामने आई गंभीर अनियमितताओं और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता में हस्तक्षेप के खिलाफ आज एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने जोरदार प्रदर्शन किया। एसएफआई ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को कमजोर करके CAG द्वारा चिन्हित 186 नियुक्तियों के मामले को दबाने का प्रयास किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
एसएफआई ने कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक आरोपों पर आधारित नहीं है, बल्कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में 186 नियुक्तियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। CAG की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 से 2023 के बीच HPU में हुई 186 नियुक्तियों के संबंध में EWS प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता और अन्य दस्तावेजों का संबंधित जारीकर्ता संस्थाओं से सत्यापन किए जाने का रिकॉर्ड ऑडिट को उपलब्ध नहीं करवाया गया। CAG ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल मूल प्रमाण पत्र देखकर सत्यापन करने का दावा दस्तावेजों की वास्तविकता स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं था।

इसके अलावा CAG ने HPU में एक ऐसे असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति पर भी सवाल उठाया, जो आवेदन की अंतिम तिथि पर निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करता था। CAG रिपोर्ट में भर्ती प्रक्रिया में UGC मानकों के पालन से संबंधित भी गंभीर टिप्पणियां की गई हैं।
एसएफआई का कहना है कि CAG द्वारा चिन्हित 186 नियुक्तियों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र न्यायिक जांच करवाना सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है। इन नियुक्तियों में वास्तव में नियमों का पालन हुआ या नहीं, दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं हुआ और भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं—इन सभी सवालों का जवाब न्यायिक जांच के माध्यम से प्रदेश के छात्रों और जनता के सामने आना चाहिए।
एसएफआई ने स्पष्ट किया कि हमारी मांग HPU की स्वायत्तता को खत्म करने की नहीं, बल्कि उसे मजबूत करते हुए जवाबदेही सुनिश्चित करने की है। HPU में सभी शिक्षक भर्तियां विश्वविद्यालय के वैधानिक प्राधिकरणों द्वारा ही की जानी चाहिए और निष्पक्ष, पारदर्शी एवं नियमसम्मत भर्ती सुनिश्चित करना विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है।

एसएफआई ने कहा कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता होने पर उसका समाधान विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को छीनना नहीं हो सकता। यदि विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया में कमियां रही हैं तो उन कमियों को दूर किया जाना चाहिए, दोषियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और UGC के नियमों को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए। लेकिन 186 नियुक्तियों की अनियमितताओं का बहाना बनाकर HPU की स्वायत्तता पर हमला करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने 2 सितंबर को कुलपति से मुलाकात कर 186 नियुक्तियों के मामले को उठाया था। इस दौरान कुलपति ने बताया था कि विश्वविद्यालय की ओर से राज्य सरकार को लिखित रूप में प्रस्ताव भेजा गया है, ताकि इस मामले की जांच के लिए न्यायिक समिति गठित की जा सके। एसएफआई ने कहा कि अब राज्य सरकार को इस प्रस्ताव पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और निष्पक्ष न्यायिक जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।

एसएफआई ने कहा कि विश्वविद्यालय को अपनी भर्ती प्रक्रिया स्वयं संचालित करने का अधिकार और जिम्मेदारी दोनों होनी चाहिए। HPU की स्वायत्तता और निष्पक्ष भर्ती एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। बल्कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को बरकरार रखते हुए UGC के नियमों के अनुसार पारदर्शी भर्ती करवाना ही सही रास्ता है।
आज के प्रदर्शन के माध्यम से एसएफआई ने अपनी मांग दोहराई कि CAG द्वारा चिन्हित 186 नियुक्तियों की न्यायिक जांच करवाई जाए, HPU में सभी शिक्षक भर्तियां विश्वविद्यालय द्वारा ही की जाएं, UGC के नियमों को सख्ती से लागू किया जाए और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर किसी भी प्रकार का हमला बंद किया जाए।

एसएफआई ने कहा कि गलत भर्ती का समाधान विश्वविद्यालय की स्वायत्तता खत्म करना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करना है। छात्रों के भविष्य, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
📍 Location: शिमला (शिमला)