भोपाल स्कॉलरशिप घोटाला: CBI की बड़ी कार्रवाई, बैंक मैनेजर समेत 6 पर FIR दर्ज छात्रवृत्ति में धांधली का खुलासा| Navbharat Live

Published on 14 जुल॰ 2026

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सार

Scholarship Scam In Bhopal MP: भोपाल स्कॉलरशिप घोटाला, 118 फर्जी बैंक खातों से 1 करोड़ की ठगी पर सीबीआई का ऐक्शन, बैंक मैनेजर सहित 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज।

Student scholarship scam in Bhopal exposes alleged financial irregularities and misuse of government funds

भोपाल स्कॉलरशिप घोटाला (सोर्स- एआई जनरेटेड इमेज)

विस्तार

Bhopal Scholarship Scam: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी छात्रवृत्ति योजना में करोड़ों रुपये की अनियमितता का मामला सामने आया है। करीब 1 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा होने के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई की है।

जांच एजेंसी ने इस मामले में एक बैंक मैनेजर समेत कुल 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में छात्रवृत्ति राशि के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।

जानें क्या है पूरा मामला

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह घोटाला वर्ष 2020-21 के दौरान बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था। कॉलेज प्रबंधन और बैंक के कुछ अधिकारियों ने आपसी मिलीभगत से गरीब छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।

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  • फर्जी खातों का जाल: घोटालेबाजों ने एमबीए करने वाले छात्रों के नाम का सहारा लिया। हैरान करने वाली बात यह है कि बिना किसी आवेदन या छात्रों की जानकारी के उनके नाम पर 118 बैंक खाते खुलवा दिए गए।
  • अंधेरे में रहे छात्र: जिन छात्रों के नाम पर ये खाते खोले गए, उनमें से कई को इस बात की भनक तक नहीं थी कि उनके नाम पर बैंक खाता खुला है और उसमें सरकारी राशि आ रही है।
  • सरकारी खजाने को चूना: छात्रों के लिए आई छात्रवृत्ति की पूरी रकम को इन फर्जी खातों के माध्यम से निकाला गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हुआ।

सीबीआई की कार्रवाई और जांच का दायरा

इस मामले में सीबीआई की एंट्री के बाद हड़कंप मच गया है। सीबीआई ने बैंक मैनेजर की भूमिका को संदेह के घेरे में लेते हुए 6 लोगों को आरोपी बनाया है। जांच एजेंसी का मानना है कि यह केवल एक कॉलेज या बैंक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा नेक्सस (गठजोड़) हो सकता है। सीबीआई अब अन्य शैक्षणिक संस्थानों और उन बैंक खातों की भी बारीकी से जांच कर रही है जिनमें संदिग्ध लेनदेन पाया गया है। इस घटना ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और बैंकों की ‘नो योर कस्टमर’ (केवायसी) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि बिना फिजिकल वेरिफिकेशन के इतने सारे खाते कैसे खोले गए।

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गरीब छात्रों के हक पर डाका

स्कॉलरशिप का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को शिक्षा के समान अवसर प्रदान करना है, लेकिन इस घोटाले ने उन असली हकदारों का हक छीन लिया है। यह न केवल एक वित्तीय अपराध है, बल्कि उन युवाओं के विश्वास के साथ भी धोखा है जो अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ने का सपना देख रहे थे।

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