स्कूल ने ब्लॉक किया ChatGPT तो 17 वर्षीय छात्रा ने खड़ा कर दिया AI स्टार्टअप, मां के दर्द से जन्मा अनोखा आइडिया

Published on 29 सित॰ 2026

वाशिंगटन (उत्तम हिन्दू न्यूज): जहां दुनिया भर के शिक्षण संस्थान इस बात से चिंतित हैं कि छात्र होमवर्क और असाइनमेंट के लिए एआई (AI) टूल्स का सहारा लेकर अपनी सोचने-समझने की क्षमता खो रहे हैं, वहीं भारतीय मूल की 17 वर्षीय छात्रा नव्या टुटेजा ने इस पाबंदी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया। वाशिंगटन डी.सी. के प्रतिष्ठित थॉमस जेफरसन हाई स्कूल प्रशासन ने जब स्कूल वाई-फाई पर चैटजीपीटी और क्लाउड जैसे टूल्स पूरी तरह ब्लॉक कर दिए, तो 12वीं में पढ़ने वाली नव्या ने शॉर्टकट ढूंढने के बजाय खुद का दिमाग चलाना शुरू किया। इसी का नतीजा है कि आज नव्या ‘राहा’ (Raaha) नाम के एक सफल एआई स्टार्टअप की फाउंडर बन चुकी हैं, जिसके प्लेटफॉर्म पर 1,000 से अधिक एक्टिव यूजर्स और 20,000 से ज्यादा जॉब लिस्टिंग्स उपलब्ध हैं।

मां की परेशानी ने दिया प्रेरणा, न्यूरोडाइवर्जेंट लोगों के लिए बनाया प्लेटफॉर्म
फॉर्च्यून के अनुसार, नव्या के इस स्टार्टअप की नींव के पीछे एक भावुक कहानी जुड़ी है। नव्या की मां सुनने में अक्षम हैं। नव्या ने बेहद करीब से देखा कि न्यूरोडाइवर्जेंट (विशेष ज़रूरतों और दिमागी भिन्नता वाले) लोगों के लिए नौकरी खोजना कितना मुश्किल और तनावपूर्ण काम होता है। कंपनियां बड़े-बड़े दावों के साथ विज्ञापन तो निकालती हैं, लेकिन दफ्तर का असल माहौल इन लोगों के अनुकूल है या नहीं, यह कोई नहीं बताता। इस समस्या को सुलझाने के लिए नव्या ने खुद कोडिंग और एल्गोरिदम लिखकर एक ऐसा फ्री एआई प्लेटफॉर्म तैयार किया, जो आवेदन करने से पहले ही उम्मीदवारों को यह बता देता है कि संबंधित कार्यस्थल उनके अनुकूल है या नहीं।

‘शॉर्टकट से बेवकूफ बनाता है AI’, स्कूल असाइनमेंट में नहीं करतीं इस्तेमाल
ओईसीडी (OECD) के हालिया आंकड़े बताते हैं कि एआई टूल्स पर अत्यधिक निर्भरता के कारण 15 साल के बच्चों का बौद्धिक स्तर 25 साल के निचले स्तर पर पहुंच चुका है। इसके विपरीत नव्या का नजरिया पूरी तरह अलग है। नव्या का मानना है कि यदि आप बिना दिमाग लगाए एआई का इस्तेमाल करेंगे तो यह आपको धीरे-धीरे बेवकूफ बना देगा। स्कूल में एआई बैन होने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई और प्रोजेक्ट्स के लिए खुद सोचना सीखा और शाम को घर आकर उस बौद्धिक ऊर्जा का इस्तेमाल अपने स्टार्टअप को विकसित करने में किया। आज वे अपने स्कूल के एआई क्लब की प्रेसिडेंट हैं, लेकिन अपनी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी के लिए एआई का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करतीं।

दिल्ली से अमेरिका तक का सफर: माता-पिता के संस्कारों ने गढ़ा भविष्य
नव्या के पिता रोहित टुटेजा जाने-माने साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट हैं और मां दीप्ति टुटेजा ई-ट्रेड व वीडी बैंक जैसी दिग्गज बहुराष्ट्रीय कंपनियों में डेटा मैनेजमेंट हेड रह चुकी हैं। दिल्ली से अमेरिका जाकर बसे इस परिवार ने अपनी बेटी को शुरू से ही शॉर्टकट और नकल से दूर रहने की सीख दी। ‘राहा’ के अलावा नव्या ने ‘लेजिबल’ नाम का एक अन्य टूल भी तैयार किया है, जो स्पेशल नीड वाले बच्चों के जटिल कानूनी और मेडिकल दस्तावेजों को सरल भाषा में समझाता है। इसके लिए वे अमेरिकी शिक्षा विभाग और सीनेटरों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। उनका साफ मानना है कि एआई पर प्रतिबंध लगाने के बजाय इसका सकारात्मक व जिम्मेदार उपयोग सीखना ही समय की मांग है।

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