नवरुणा की अधूरी कहानी; मेहंदी लगाकर सोई, रात में गायब: नाले में मिला कंकाल, मां-बाप पर उठे सवाल, CID-CBI बता न पाई हत्यारा कौन - Patna News

Published on 28 अग॰ 2026

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मुजफ्फरपुर के जॉन्फर लाल रोड का चक्रवर्ती लेन। आसमान में बादल छाए थे, मौसम सुहावना था। हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी। अतुल्य चक्रवर्ती अपने घर में पत्नी मैत्री चक्रवर्ती और छोटी बेटी नवरुणा चक्रवर्ती के साथ बैठे चाय पी रहे थे।

तभी 12 साल की नवरुणा हंसते हुए बोली- ‘मम्मी… एग्जाम खत्म हो गई है। मैं आज रात हाथ में मेहंदी लगाउंगी।’

मां मैत्री चक्रवर्ती ने मुस्कराते हुए टोका- ‘अरे…, मेहंदी लगाकर स्कूल जाओगी तो टीचर डाटेंगे, मार भी पड़ेगी।’

मां के गले से लिपटते हुए नवरुणा बोली- ‘स्कूल की तो 4 दिन की छुट्टी है। जब तक स्कूल खुलेगा तब तक मेहंदी का रंग फीका पड़ जाएगा।’

अतुल्य चक्रवर्ती ने चाय की आखिरी चुस्की लेते हुए कहा-‘ठीक है, लगा लेना, लेकिन पढ़ाई पर ध्यान देना। एग्जाम खत्म हो गया, इसका मतलब यह नहीं कि पढ़ाई छोड़ दो।’

‘ओके पापा’ कहकर नवरुणा कमरे से बाहर चली गई।

फिर मम्मी भी खाना बनाने किचन में चली गई और अतुल्य चक्रवर्ती कमरे में टीवी चालू कर न्यूज देखने लगे।

दरअसल, अतुल्य चक्रवर्ती बंगाली ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। इनके पूर्वज मुजफ्फरपुर में आकर बस गए। वे एक दवा कंपनी में एमआर का काम करते थे। इनकी बड़ी बेटी नवरुपा चक्रवर्ती दिल्ली में पढ़ाई करती थी और छोटी बेटी नवरुणा मुजफ्फरपुर के सेंट जेवियर्स स्कूल में सातवीं क्लास में पढ़ती थी। 17 सितंबर 2012 को नवरुणा का हाफ-यर्ली एग्जाम खत्म हुआ था।

उस रात नवरुणा की मां ने आलू-लौकी की सब्जी बनाई। रात के करीब 9.00 बजे सभी ने एक साथ खाना खाया। उसके बाद नवरुणा अपने हाथ में मेहंदी लगाने बैठ गई। अतुल्य घर के सभी दरवाजे बंद कर ताला लगाने लगे। उनके घर के पीछे वाले साइड में एक होटल था। वहां भी लोहे की छड़ से बना एक दरवाजा था, जिसमें हमेशा ताला लगा रहता था। लास्ट में उसे चेक किया कि दरवाजे में ताला बंद है या खुला। फिर आंगन के बल्ब को जलाया और अपने कमरे में आ गए।

17 सितंबर 2012 की रात 12 साल की नवरुणा घर से गायब हो गई थी। (फाइल फोटो)

17 सितंबर 2012 की रात 12 साल की नवरुणा घर से गायब हो गई थी। (फाइल फोटो)

नवरुणा अपने हाथ की मेहंदी दिखाते हुए बोली-

‘पापा देखो, मैंने कितनी खुबसूरत मेहंदी लगाई है। मेरे हाथ में सुंदर लग रही है न?’

‘हां बढ़िया लग रहा है। चलो अब कुछ देर पढ़ाई कर लो।’ कहते हुए मां किचन में बर्तन धोने चली गई।

इसके बाद ठीक बगल वाले कमरे में नवरुणा पढ़ने चली गई। करीब 1 घंटे बाद अतुल्य उस कमरे में गए तो देखा नवरुणा पढ़ाई कर रही थी।

तभी पिता अतुल्य ने कहा- ‘अब रात हो रही है, चलो सोने।’

नवरुणा ने कहा- ‘पापा मेरे हाथ में मेहंदी लगी है, आज इसी कमरे में सोऊंगी। आप लोगों के साथ सोने पर आप दोनों का कपड़ा खराब हो जाएगा।’

‘ठीक है सो जाओ’ कहते हुए अतुल्य अपने कमरे की ओर बढ़े।

‘ओके पापा… गुड नाइट’ कहकर नवरुणा भी सो गई। यह उसके आखिरी शब्द थे, जो पिता ने सुने थे।

अतुल्य चक्रवर्ती की नींद हर रात करीब 3.30 बजे खुल जाती है। वह 18 सितंबर की तड़के सुबह 3.30 बजे उठे और बाथरूम के तरफ गए। वहां देखा कि आंगन का बल्ब नहीं जल रहा है।

बाथरूम से वापस आकर अतुल्य ने पत्नी से कहा-

‘आंगन के बल्ब को तुमने बुझाया है क्या? रात को तो मैं जलाकर आया था।’

‘नहीं, मैं क्यों बुझाऊंगी, बल्ब फ्यूज तो नहीं हो गया।’ इतना कहते ही मैत्री चक्रवर्ती अपने कमरे से तेजी से निकली और अपने बेटी के कमरे में गई।

कमरे का दरवाजा खुला था। अंदर जाते ही वह सन्न रह गई। देखा कि उनकी बेटी नवरुणा नहीं है। कमरे में इधर-उधर देखा, फिर भी कहीं नहीं दिखी।

मां मैत्री अपने कमरे में आकर घबराते हुए पति से बोली- ‘सोना (नवरुणा के घर का नाम) अपने कमरे में नहीं है।’

‘देखो बाथरूम गई होगी’ यह कहते हुए अतुल्य तेजी से नवरुणा के कमरे की तरफ भागे। कमरे के अंदर गए तो देखा कि नवरुणा का बेड गीला है। फिर उसे घर में चारों तरफ ढूंढा, ‘सोना किधर हो, सोना.. सोना..’ की आवाज लगाई, लेकिन नवरुणा कहीं नहीं दिखी।

इनके घर के ठीक उपर वाले कमरे में अतुल्य के बड़े भाई निर्मल चक्रवर्ती का परिवार रहता था। उन्होंने अपने बड़े भाई को आवाज दी और आंगन का बल्ब जलाया तो देखा कि आंगन का दरवाजा खुला है। यह दरवाजा बाहर होटल की तरफ खुलता है, उसमें लगे लोहे के रॉड को टेढ़ा कर दिया गया है। इतना देखते ही अतुल्य समझ गए कि बेटी के साथ जरूर कुछ गलत हुआ है।

परिवार के सभी लोग नवरुणा को चारों तरफ ढूंढने लगे। घर के अंदर-बाहर, आसपास के इलाके में सभी जगह ढूंढा गया, लेकिन वह कहीं नहीं मिली।

नवरूणा की मां मैत्री चक्रवर्ती और पिता अतुल्य चक्रवर्ती (फाइल फोटो)।

नवरूणा की मां मैत्री चक्रवर्ती और पिता अतुल्य चक्रवर्ती (फाइल फोटो)।

करीब 2 घंटे तक ढूंढने के बाद नवरुणा नहीं मिली तो अतुल्य के बड़े भाई निर्मल अपने पड़ोसी बबलू के पास चिल्लाते हुए गए कि ‘अरे ये बबलू… देखो न अतुल्य कि छोटकी बेटिया कहां गायब हो गई है। चलो थोड़ा थाने में’ इसके बाद बबलू और निर्मल दोनों साथ में थाने गए और इसकी शिकायत की। शिकायत के एक घंटे बाद पुलिस पहुंची।

इस बीच हर संभावित जगह पर घर वालों ने ढूंढ लिया, लेकिन नवरुणा कहीं नहीं मिली। आसपास के लोग कई तरह कि बातें करने लगे। कहने लगे कि ‘जवान हो रही थी, कहीं निकल गई होगी’।

पुलिस अगले दिन FIR दर्ज कर जांच में जुटी। नवरुणा के माता-पिता सहित कई करीबियों के बयान दर्ज किए गए। कई संभावित जगहों पर छापेमारी की गई, लेकिन नवरुणा का कुछ पता नहीं चला।

अतुल्य चक्रवर्ती अपना काम छोड़ कर हर रोज थाने के चक्कर लगा रहे थे। रोज थाना प्रभारी (उस वक्त के) जितेंद्र यही कहते- ‘हम बैठे थोड़ी हैं, जांच कर रहे हैं।’

करीब 10 दिन बीत जाने के बाद भी जब नवरुणा का पता नहीं चला तो लोगों के मन में पुलिस के खिलाफ गुस्सा फूटने लगा। लोग पुलिस और सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। सोशल मीडिया पर ‘जस्टिस फॉर नवरुणा’ के कैम्पेन चलाए जाने लगे।

धीरे-धीरे मुजफ्फरपुर से बाहर निकलकर पटना, फिर दिल्ली की सड़कों पर भी लोग प्रदर्शन करने लगे। महिला आयोग, चाइल्ड वेल्फेयर सहित कई एनजीओ ग्रुप नवरुणा के लिए आवाज उठाने लगे। यह मामला धीरे-धीरे तूल पकड़ने लगा। हर तरफ प्रशासन और सरकार की आलोचना होने लगी।

घर से सटे नाले में मिला मानव कंकाल

इसी बीच घटना के ठीक 68 दिन बाद 26 नवंबर 2012 को अतुल्य चक्रवर्ती के मोबाइल पर थानेदार जितेंद्र का फोन आया- ‘अतुल जी आप कहां हैं, आपके घर से सटे नाले में मानव कंकाल मिला है। शायद वह आपकी बेटी का है।’

इतना सुनते ही अतुल्य और उनकी पत्नी मैत्री दहाड़ मारकर रोने लगे। करीब 10 मिनट के अंदर सायरन बजाते हुए पुलिस की गाड़ी पहुंच गई। इलाके को पुलिस वालों ने घेर लिया। लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। हर तरफ खबर फैल गई कि नवरुणा को मारकर उसके ही घर के पास नाले में फेंक दिया गया है।

अतुल्य चक्रवर्ती के घर से सटे नाले में मानव कंकाल मिले थे।

अतुल्य चक्रवर्ती के घर से सटे नाले में मानव कंकाल मिले थे।

लोग कई तरह की चर्चाएं करने लगे। कई लोग तो नवरुणा के माता-पिता को ही हत्यारा बताने लगे। लोग बातें करने लगे कि ‘अरे…. इन दोनों ने मार दिया होगा और नाले में फेंक दिया होगा’ तो कोई कहने लगा- ‘कुछ गलत देखा होगा तो रात में मारकर फेंक दिया होगा।’

पुलिस ने नाले के अंदर कुछ हड्डियां निकाली और उसे जांच के लिए भेज दिया। हड्डियों के साथ कुछ कपड़े भी थे। इसके बाद पुलिस की नजर में भी माता-पिता निशाने पर आ गए। पुलिस ने जांच के लिए माता-पिता के DNA सैंपल लेने की बात कही।

अतुल्य और उनकी पत्नी ने DNA सैम्पल देने से इनकार कर दिया। DNA सैम्पल नहीं देने की खबरें अगले दिन पेपर में छपी। उसके बाद चारों तरफ चर्चा होने लगी कि ‘बेटी को मारने में माता-पिता का ही हाथ है।’

इसपर अतुल्य चक्रवर्ती और उनकी पत्नी ने अपनी बातें रखीं। मैत्री चक्रवर्ती ने कहा कि, ‘हम दोनों को ही फंसाने के लिए किसी ने दूसरे छोटे बच्चे की हड्डियों को हमारे घर के सामने फेंक दिया है।’

अतुल्य चक्रवर्ती ने कहा कि, ‘मेरी बेटी 12 साल की है और इन हड्डियों को देखने से ऐसा लग रहा है कि किसी छोटी बच्ची की है। मैं ऐसे कैसे मान लूं कि यह मेरी ही बेटी की हड्डी है। पुलिस किसी भी हड्डी को हमारी बेटी की हड्डी बता कर मामले को खत्म करना चाह रही है। पुलिस अभी तक यह नहीं बता पाई कि मेरी बेटी जिंदा है या नहीं। मेरे घर से किसने अपहरण किया और किसने मारा। हमें ही हत्यारा बताने के लिए अपराधी ने किसी की हड्डी मेरे घर से सटे नाले में फेंक दिया है।’

यह मामला एक बार फिर से तूल पकड़ने लगा। नाले में मिले हड्डी से पुलिस यह साबित नहीं कर पाई कि यह किसकी है। 12 जनवरी 2013 को जांच पुलिस से लेकर CID को दे दिया गया।

CID ने जब जांच शुरू की तो अतुल्य और इनकी पत्नी दोनों का DNA सैंपल लिया गया। जांच रिपोर्ट में आया कि यह स्केलेटन नवरुणा के ही है। लेकिन CID भी यह साबित नहीं कर सकी कि वह हड्डियां किसने फेंकी है? हत्या किसने की है? हत्या करने की मुख्य वजह क्या है? क्या माता-पिता ने ही हत्या कि है या किसी दूसरे ने हत्या की है? जांच के दौरान घरवालों से बातचीत और अन्य सबूत के आधार पर CID ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया। बबलू, श्याम पटेल और सुदीप चक्रवर्ती। सुदीप, अतुल्य का पटिदार है।

परिवार ने सही से जांच करने और बेटी को ढूंढने को लेकर PMO को पत्र लिखे। परिवार मानने को तैयार नहीं था कि वह स्केलेटन नवरुणा के हैं। अतुल्य और उनकी पत्नी दोनों एक साथ नीतीश कुमार (तब के सीएम) के जनता दरबार में पहुंचे और पूरी कहानी बताई।

अतुल्य ने कहा- मेरी बच्ची 12 साल की है और हड्डी देखने पर लग रहा है कि किसी छोटे बच्चे का है। पुलिस, CID किसी ने भी अभी तक इसका पता तक नहीं लगाया कि मेरी बेटी का अपहरण किसने और क्यों किया है। उल्टा हमसे ही सवाल पूछे जा रहे है कि मेरी बेटी जिंदा है या नहीं।’

सीएम ने उनकी पूरी बातें सुनी और तुरंत तत्कालीन DGP को फोन कर पूछा- ‘ई मुजफ्फरपुर के नवरुणा वाला मामलवा काहे नहीं जल्दी उजागर करते हैं जी, बताइए ई दूनू आदमी हमारे पास आए हैं। देखिए इसको जल्दी से अपराधी को पकड़िये। नहीं तो कहिए इसको CBI के हाथ में दे दिया जाए।’

इसके बाद 14 फरवरी 2014 को यह केस CID से लेकर CBI के हाथ में सौंप दी गई। इस केस के पहले इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बने रमेंद्र प्रताप पांडे। CBI की जांच के दौरान कई लोगों के नाम सामने आए। CBI ने अतुल्य और इनकी पत्नी से 100 से अधिक सवाल किए। पूरे घर को फिर से स्कैन किया गया। जहां हड्डी मिली थी, वहां जांच किए गए। जिनसे-जिनसे विवाद था, सबके बारे में पूछा गया।

24 दिसंबर 2014 को रमेन्द्र प्रताप पांडे अतुल्य के घर पहुंचे और कहा कि ‘आपका केस लगभग पूरा हो गया है। जल्दी ही सभी आरोपियों के नाम सामने आ जाएंगे और अपराधी भी पकड़े जाएंगे। इस केस में बहुत बड़े-बड़े लोगों के नाम हैं।’

इसके बाद केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बदल दिए गए। पूरे जांच के दौरान कुल 5 इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (IO) बदले गए, लेकिन CBI यह नहीं बता सकी कि बच्ची जिंदा है या नहीं और अपहरण करने वाला कौन है।

तब अतुल्य ने आरोप लगाया कि ‘हर एजेंसी जांच को लटका रही है। घटना के 33 दिन बीत चुके थे, तब जाकर मेरे घर SP पहुंचे, 40 दिन बाद ADG गुप्तेश्वर पांडे पहुंचे। जब तक फोरेंसिक टीम पहुंची, तब तक तो सारे सबूत खत्म हो गए थे।

2019 में सीबीआई ने मुजफ्फरपुर कलेक्ट्रेट में नवरूणा अपहरण व हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में मदद करने वालों को 10 लाख का इनाम देने का पोस्टर चस्पा किया था।

2019 में सीबीआई ने मुजफ्फरपुर कलेक्ट्रेट में नवरूणा अपहरण व हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में मदद करने वालों को 10 लाख का इनाम देने का पोस्टर चस्पा किया था।

CBI ने अपने जांच के दौरान 7 लोगों को गिरफ्तार किया। शाह आलम शब्बू, ब्रजेश सिंह, राकेश सिंह, अभय गुप्ता, राकेश कुमार सिन्हा, पप्पू और एक अन्य। CBI ने सभी को 4-4 बार रिमांड पर लिया।

जांच के दौरान अतुल्य ने CBI को बताया था कि उनके घर के पीछे वाले दरवाजे के पास एक होटल चलता है। वह अपना कचरा मेरे घर की तरफ फेंकता था। उससे कई बार विवाद हो चुका है। मेरी बेटी को पीछे वाले गेट के लोहा मोड़कर होटल के ही रास्ते ले जाया गया है। होटल वाले की इसमें मिलीभगत है।

अतुल्य ने यह भी आरोप लगाया कि वह अपनी मुजफ्फरपुर की जमीन बेचकर दिल्ली शिफ्ट होने वाले थे। मुकेश ठाकुर से जमीन दे रहे थे। उसमें उनका पटिदार सुदीप हिस्सा मांग रहा था। वहीं, बबलू चाह रहा था कि जमीन ब्रजेश ठाकुर को बेच दें। बबलू के साथ श्याम पटेल पर बच्ची को बेहोश कर घर से उठा ले जाने की शंका जताई गई थी।

CBI ने यह दावा किया कि हत्या जमीन के विवाद में ही हुई है। गिरफ्तार सभी लोग जमीन कारोबार से ही जुड़े थे, जिनका अतुल्य के साथ विवाद चल रहा था।

हालांकि, सैकड़ों लोगों से पूछताछ, कई लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी CBI यह पता नहीं लगा सकी कि नवरुणा का किसने अपहरण किया है, वह जिंदा है या नहीं? 14 दिसंबर 2019 में अतुल्य की मुलाकात CBI से सुप्रीम कोर्ट में हुई। 2020 में नवरुणा की गुत्थी सुलझा देने वाले को 10 लाख रुपए का इनाम रखा गया।

24 नवंबर 2020 को CBI ने मुजफ्फरपुर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किया। CBI ने अपनी दलील दी कि 6 साल तक जांच करने के बाद भी यह साबित नहीं हो सका है कि अपराध किसने किया है। सबूत के अभाव में सारे आरोपी बरी हो गए।

इधर नवरुणा के माता-पिता अपनी बड़ी बेटी नवरूपा के साथ दिल्ली में रहते हैं। नाले से मिली हड्डियों कि जांच से यह पुष्टि हो गई है कि नवरुणा की मृत्यु हो गई है, लेकिन परिवार के लोगों को विश्वास है कि वह जिंदा है। उन्होंने उसकी साइकिल, गुल्लक, गुड़िया, रुमाल, टोपी अभी भी संभाल कर रखा है।

(यह पूरी स्टोरी नवरुणा के पिता अतुल्य चक्रवर्ती से बातचीत पर आधारित है)