सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और दूसरे राज्यों में CJP प्रोटेस्ट के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज की गईं एफआईआर को रद्द कर दिया है। केंद्र सरकार ने सीजेआई सूर्यकांत के नेतृत्व वाली बेंच के सामने केस रद्द करने की अपील की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी संवैधानिक ‘ताकत’ का इस्तेमाल करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बुलाए गए आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुईं एफआईआर को रद्द कर दिया है। सीजेआई सूर्यकांत के नेतृत्व वाली बेंच के सामने केंद्र सरकार ने 20-25 जुलाई के बीच दर्ज की गई सभी 13 एफआईआर को खत्म करने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करनी की अपील की थी। हालांकि, गंभीर क्रिमिनल रिकॉर्ड रखने वाले 2873 लोगों के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज करने की कोर्ट ने छूट दे दी है।
बता दें कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर को रद्द करना कॉकरोच जनता पार्टी की दूसरी सबसे बड़ी डिमांड थी। अब उसे सुप्रीम कोर्ट ने पूरा कर दिया है। पहली बड़ी डिमांड नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी। उसे भी सरकार ने पूरा कर दिया था।
सीजेपी आंदोलन के दौरान न सिर्फ दिल्ली में बल्कि देशभर के विभिन्न अन्य राज्यों में भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम में पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज की थी। इन राज्यों में भी आंदोलन हुए थे। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने एफआईआर रद्द करने के लिए संविधान के आर्टिकल 142 का इस्तेमाल किया।
बार एंड बेंच के अनुसार, कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम के अलावा दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसी तरह की एफआईआर पर अब आगे कार्रवाई या जांच नहीं की जाएगी। इसका मतलब है कि उन्हें सभी मकसदों के लिए बंद माना जाएगा। कोर्ट ने कहा, "युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए हम पूरा न्याय करने के लिए संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं।"
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत से अनुरोध किया था कि वह नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ देशभर में 20 से 25 जुलाई तक दर्ज की गई सभी एफआईआर को समाप्त करने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करे। इस बीच सीजेपी ने पांच सितंबर को होने वाला मार्च भी रद्द कर दिया है। सीजेपी ने कोर्ट को बताया कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक के विरोध में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खत्म करने की प्रक्रिया को देखते हुए उसने पांच सितंबर का अपना विरोध प्रदर्शन रद्द किया गया है।
सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने पेश हुए और इस फैसले के बारे में जानकारी दी। सॉलिसिटर जनरल ने बेंच को बताया कि केंद्र सरकार कॉजपा नेताओं को दिए गए आश्वासन को पूरा करने और नीट परीक्षा रद्द होने के बाद अपनी जान देने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए प्रतिबद्ध है। मेहता ने कोर्ट को बताया कि मारे गए छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा और इसके तौर-तरीके तय करने के लिए तीन महीने का समय मांगा।
सोमवार को याचिका दायर करके केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली पुलिस द्वारा 20-25 जुलाई के बीच दर्ज की गईं 13 एफआईआर को रद्द करने की अपील की थी। हालांकि, सरकार ने यह कहा था कि गंभीर क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले 2873 लोगों के खिलाफ केस जारी रखा जाएगा। इसके तहत कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को क्रिमिनल केस दर्ज करने की छूट दे दी।