'हम छात्रों के साथ हैं', CJI सूर्यकांत ने BCI को लगा दी फटकार; छात्रों से बोले- जल्दी ले लो लाइसेंस

Published on 14 अग॰ 2026

Aug 14, 2026 11:45 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

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सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, इस उम्र में कभी कोई बात ऐसी कह देता है जो कि हमें गलत लगती है तो उसे वैसे ही रहने दीजिए। सीजेआई ने कहा कि सभी छात्र जल्द लाइसेंस लें और सुप्रीम कोर्ट बार में शामिल हो जाएं। अगर छात्र किसी वजह से हमारा विरोध करते हैं तो इससे बीसीआई का कोई लेना-देना नहीं है।

CJI Suryakant

सीजेआई सूर्यकांत ने छात्रों से कहा कि वे जल्दी लाइसेंस लें और सुप्रीम कोर्ट की बार काउंसिल में शामिल हो जाएं

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के 2026 बैच के लॉ ग्रैजुएट्स का वकील के तौर पर पंजीकरण ना करने का आदेश जारी कर दिया था। हालांकि जब कॉकरोच जनता पार्टी ने सीधा बीसीआई के चेयरमैन मनन मिश्रा को निशाने पर लिया तो वह बैकफुट पर आ गए और अपना आदेश रद्द कर दिया। अब सीजेआई सूर्यकांत ने भी कहा है कि सभी छात्र जल्द से जल्द लाइसेंस लें और सुप्रीम कोर्ट बार में शामिल हो जाएं। यह उन लोगों के लिए करारा जवाब होगा जो उनके करियर में बाधा डालना चाहते हैं। सीजेआई ने कड़े शब्दों में कहा कि हमारे और छात्रों के बीच के मामले का बीसीआई से कोई लेना-देना नहीं है।

हमारे और छात्रों के बीच आने की जरूरत नहीं- CJI

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘इस उम्र में कभी कोई बात ऐसी कह देता है जो कि हमें गलत लगती है तो उसे वैसे ही रहने दीजिए। सीजेआई ने कहा कि सभी छात्र जल्द लाइसेंस लें और सुप्रीम कोर्ट बार में शामिल हो जाएं।’ सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा, ‘अगर छात्र किसी वजह से हमारा विरोध करते हैं तो इससे बीसीआई का कोई लेना-देना नहीं है।’ छात्रों के लिए सीजेआई ने कहा, ‘हम आपके साथ हैं और छात्रों ने हमें पत्र लिखा है। यह पूरी बात हमारे और छात्रों के बीच है। जो भी कदम बीसीआई ने उठाया उसकी कोई जरूरत नहीं थी।’

'छात्रों को विरोध का अधिकार'

सीजेआई ने कहा, एक छात्र के रूप में मैं भी छात्र गतिविधियों में सक्रिय रहा हूं। ये छात्र भी शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे हैं। ऐसे में बीसीआई या फिर राज्य की बार काऊंसिल को छात्रों के खिलाफ कोई ऐक्शन लेने की जरूरत नहीं है।

तेलंगाना में नलसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों ने दीक्षांत समारोह में सीजेआई सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के फैसले पर छात्रों ने विरोध दर्ज करवाया था। पास आउट हो रहे 2026 एलएलबी और एलएलएम बैचों सहित विभिन्न बैचों के छात्रों ने गत 23 जुलाई को कुलपति, कुलसचिव और प्रोफेसरों को ईमेल भेजकर विश्वविद्यालय से सीजेआई को आमंत्रित न करने का अनुरोध किया था।छात्रों ने प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान सीजेआई की टिप्पणियों पर चिंता जताई थी।

छात्रों ने बताया कि उनका विरोध इस बात से शुरू हुआ कि सीजेआई की अगुआई वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर 'चलो संसद' प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया था। उन्होंने सीजेआई की उन टिप्पणियों का भी हवाला दिया, जिनमें उन्होंने कहा था कि जब मुख्य अधिवक्ता ने पुलिस कार्रवाई का फुटेज दिखाने की पेशकश की, तो पीठ ने वीडियो देखने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी।

BCI ने कहा था कि 2026 में उत्तीर्ण होने वाले किसी भी स्नातक को अगले आदेश तक अधिवक्ता के रूप में नामांकित न करें। हालांकि, सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश के बाद बीसीआई ने कुछ ही घंटों के भीतर यह आदेश वापस ले लिया। वकीलों की शीर्ष वैधानिक संस्था ने कहा कि मामले में अंतिम निर्णय उसके समक्ष रखी गई सामग्री पर विचार करने के बाद 19 अगस्त को लिया जाएगा। इसके बाद सोशल मीडिया पर हुए भारी विरोध के बीच बीसीआई ने अपना फैसला बदल दिया। उसने राज्य विधिज्ञ परिषदों को विश्वविद्यालय के वर्ष 2026 के स्नातकों को अधिवक्ता के रूप में नामांकित करने की अनुमति दे दी।