ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की लड़ाई या मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता का सवाल?

Published on 3 अक्टू॰ 2026
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CJP Protest: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) अभियान के विरोध में और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुंबई के शिवाजी पार्क और आम आदमी पार्टी एवं लेफ्ट के स्टूडेंट विंग आइशा ने दिल्ली में जोरदार आंदोलन किया. हजारों लोग आंदोलन में शामिल हुए. मुंबई में आंदोलन को नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और विशाल ददलानी जैसी फिल्मी हस्तियों का समर्थन मिला. गांधी जयंती पर आयोजित इस विरोध-प्रदर्शन में महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी भी शामिल हुए. संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ आंदोलन के दौरान कभी ‘जन गण मन’ गाया गया, तो कभी ‘वंदेमातरम्’ के नारे लगाये गये. आंदोलन में आये सिंगर विशाल ददलानी ने कहा कि वे लोकतंत्र को बचाने के लिए यहां आये हैं. सभी राजनीतिक दलों को आंदोलन का समर्थन करना चाहिए.

एसएफआई समेत कई संगठन आंदोलन में हुए शामिल

शिवाजी पार्क के आसपास रहने वाले लोगों के विरोध और दादर स्टेशन तक भारी सुरक्षा-व्यवस्था के बावजूद प्रदर्शनकारी क्रांतिकारी नारों, गांधी के उद्धरणों और ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर थामे नजर आये. तिरंगे के साथ ‘ज्ञानू, तुझा डेमोक्रेसी वर भरोसा नाय के?’, ‘ज्ञानेश ब्रो, जस्ट रिजाइन’ और ‘गद्दार ज्ञानू मस्ट गो’ जैसे नारे लिखे पोस्टर लिये स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) समेत विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में युवा इलाके में जुटे.

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मुंबई से जंतर-मंतर पर फिर से आंदोलन की चेतावनी

शिवाजी पार्क में जुटी भीड़ को संबोधित करते हुए सीजेपी के नेता अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी कि अगर ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया, तो जंतर-मंतर पर फिर से आंदोलन शुरू किया जायेगा. दीपके ने भारतीय जनता पार्टी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की जमकर आलोचना की. अभिजीत दीपके का दावा है कि वर्ष 2024 में भाजपा ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव ‘चुरा लिया’, क्योंकि मतदाता सूची में 40 लाख मतदाताओं के नाम जोड़े गये थे. सीजेपी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई समेत निम्नलिखित 5 मांगें रखीं.

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सीजेपी की 5 प्रमुख मांगें

  1. ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए.
  2. जनवरी 2025 की मतदाता सूची को फिर से लागू करो.
  3. SIR विवाद खत्म होने तक देश में कहीं न हो चुनाव.
  4. SIR की जांच के लिए कमेटी बने.
  5. मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए 2023 का कानून खत्म कर नया कानून बनाया जाये.

चुनाव आयोग पर सीजेपी के आरोप

  • 2 वर्षों में 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिये गये.
  • वर्ष 2024 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 97 करोड़ थी.
  • वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए और ‘इंडिया’ गठबंधन के बीच वोट का अंतर 2 प्रतिशत था.
  • चुनाव से 15 दिन पहले ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति ‘अंतर बढ़ाने’ के लिए की गयी.

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5 ज्वलंत सवाल

एसआईआर के मुद्दे पर ममता बनर्जी, कांग्रेस और अब कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बाद सवाल है कि यह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की लड़ाई है या मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता का सवाल. SIR से जुड़े इन 5 सवालों के जवाब हैं जरूरी.

  1. क्या SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी?

एसआईआर के दौरान कितने मतदाताओं के नाम काटे गये. किन वजहों से उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाये गये. कितने लोगों के नाम दोबारा जोड़े गये. कितने मामलों में आपत्तियां आयीं, इस बारे में चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए. पश्चिम बंगाल के संदर्भ में बात करें, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कितने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिये थे, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाये गये.

  1. चुनाव आयोग के भीतर उठी आपत्तियों पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण क्यों नहीं?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियों का जिक्र है. हालांकि, इस पर चुनाव आयोग की ओर से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा गया है कि आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से होते हैं. यह भी कहा गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने सचिव को जो चिट्ठी भेजी है, वह एक अधिकारी से संबंधित है, न कि चुनाव आयोग के कामकाज से. हालांकि, इस पर आधिकारिक रूप से अब तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त या दोनों चुनाव आयुक्तों ने कोई बयान नहीं दिया है.

  1. क्या मतदाता सूची के डिजिटल सिस्टम और डेटा एक्सेस को लेकर उठे सवालों का स्वतंत्र ऑडिट होना चाहिए?

चुनाव आयोग के केंद्रीयकृत सॉफ्टवेयर, डेटा तक पहुंच और संशोधन की प्रक्रिया की पारदर्शिता के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए, ताकि किसी संदेह की कोई गुंजाइश न रहे.

  1. CEC के इस्तीफे की मांग के पीछे CJP के पास कौन-से ठोस दस्तावेजी सबूत हैं?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अभी राजनीतिक आरोप लगा रही है. उसे यह बताना चाहिए कि आरोपों से अलग, उसके पास कौन-से रिकॉर्ड हैं, जिनके आधार पर वह मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है.

  1. अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तो CJP का अगला कदम क्या होगा और आंदोलन की कानूनी सीमा क्या होगी?

सीजेपी ने देशभर में प्रदर्शन और दिल्ली में जंतर-मंतर पर आंदोलन करने का ऐलान किया है. ऐसे आंदोलन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन, पुलिस अनुमति और कानून-व्यवस्था को लेकर उसकी क्या रणनीति है, इसके बारे में भी जनता को बताना चाहिए.

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