मध्यप्रदेश में किसानों के लिए सरकार ने गेहूं की खरीद को लेकर बड़ा ऐलान किया है। प्रदेश में गेहूं की खरीद 2700 रुपए प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर की जाएगी। इसके साथ ही खाद और बीज के लिए लिए गए कृषि ऋण को चुकाने की समयसीमा में भी राहत दी गई है। अब किसान 31 मार्च की जगह जून-जुलाई में शून्य प्रतिशत ब्याज पर अपना कर्ज चुका सकेंगे। सरकार के इन फैसलों को केवल समर्थन मूल्य बढ़ाने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। सरकार का जोर खेती की लागत कम करने, सिंचाई के लिए बिजली की उपलब्धता बढ़ाने और किसानों को एक से ज्यादा आय के साधन से जोड़ने पर है।
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दिन में बिजली देने की तैयारी
गेहूं और चने की फसल के लिए सिंचाई की जरूरत को देखते हुए किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे किसानों को रात में खेतों में सिंचाई करने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है। इस वर्ष प्रदेश में करीब 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है। वहीं धान की औसत उत्पादकता भी बढ़कर 32 से 36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंचने की बात कही गई।
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खेती के साथ दूसरी आय पर जोर
बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री मोहन यादव किसानों से पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन, दूध उत्पादन और उद्यानिकी को भी अपनाने की अपील कर रहे हैं। किसानों को जागरूक किया जा रहा है किआधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से खेती को ज्यादा लाभ वाला बनाया जा सकता है। किसानों से कृषि जमीन नहीं बेचने की अपील करते हुए उन्होंने आने वाले समय में खेती से बेहतर आमदनी की संभावना जताई।
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मशीनों से खेती की लागत घटाने का प्लान
किसानों को आधुनिक मशीनों का उपयोग करने प्रेरित किया जा रहा है। इसमें रीपर कम बाइंडर, डीएसआर, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ रीपर, थ्रेशर और लेजर लैंड लेवलर जैसी मशीनें शामिल हैं। किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती के साथ नई तकनीकों के इस्तेमाल के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।