Dengue Cases in India: डेंगू में उल्टी और सिरदर्द, कब यह सामान्य लक्षण नहीं रहता? एक्सपर्ट से जानें

Published on 17 अग॰ 2026

Dengue Cases in India: डेंगू में उल्टी और सिरदर्द, कब यह सामान्य लक्षण नहीं रहता? एक्सपर्ट से जानें

डेंगू कब बन जाता है खतरनाक

डेंगू को अक्सर तेज बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द और कमजोरी से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन बीमारी के दौरान कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. लगातार उल्टी और तेज या बढ़ता हुआ सिरदर्द ऐसे ही लक्षण हैं, जिन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. डेंगू वायरस से होने वाला संक्रमण है और अधिकांश मरीज उचित निगरानी, आराम तथा चिकित्सकीय सलाह से ठीक हो जाते हैं.

हालांकि, कुछ मरीजों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है. खासकर बुखार कम होने के आसपास का समय महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान चेतावनी वाले लक्षण सामने आ सकते हैं.

लगातार उल्टी को नजरअंदाज न करें डेंगू में मतली और कभी-कभी उल्टी हो सकती है. लेकिन अगर बार-बार उल्टी हो रही है, पानी या तरल पदार्थ भी नहीं रुक पा रहे हैं या उल्टी लगातार बढ़ रही है, तो इसे सामान्य लक्षण मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए. लगातार उल्टी से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है. डेंगू में ये कंडीशन मरीज की कमजोरी और डिहाइड्रेशन को बढ़ा सकती है.

एक्सपर्ट ने क्या कहा

डॉ. प्रखर गर्ग (एसोसिएट डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन, यथार्थ हॉस्पिटल) कहते हैं कि डेंगू में हर उल्टी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन लगातार या बार-बार होने वाली उल्टी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. खासकर पेशेंट लिक्विड न ले पा रहा हो, यूरिन कम हो रहा है, ज्यादा कमजोरी या पेट में तेज दर्द के साथ उल्टी हो रही है, तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. सिरदर्द कब चिंता का विषय बन सकता है? डेंगू में तेज सिरदर्द, विशेषकर आंखों के पीछे दर्द, आम लक्षणों में शामिल हो सकता है.

लेकिन सिरदर्द यदि असामान्य रूप से तेज हो, लगातार बढ़ रहा हो या उसके साथ बार-बार उल्टी, भ्रम, अत्यधिक नींद, बेचैनी, गर्दन में अकड़न, बेहोशी या दौरे जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे केवल डेंगू का नॉर्मल लक्षण मानना सही नहीं है.

किन चेतावनी संकेतों पर तुरंत अस्पताल जाएं?

डेंगू के दौरान कुछ लक्षणों को चेतावनी संकेत माना जाता है. इनमें तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, मसूड़ों या नाक से खून आना, उल्टी या मल में खून, अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी, सांस लेने में परेशानी और बहुत अधिक सुस्ती शामिल हो सकते हैं.

बुखार उतरना खतरा टलने का संकेत नहीं

डेंगू में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बुखार कम होने के बाद भी मरीज की निगरानी जरूरी है. कई बार परिवार को लगता है कि बुखार उतर गया, इसलिए बीमारी खत्म हो रही है. वास्तव में कुछ मरीजों में बुखार कम होने के आसपास गंभीर चेतावनी संकेत विकसित हो सकते हैं. इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार मरीज की स्थिति, तरल पदार्थों का सेवन और आवश्यक रक्त जांच की निगरानी करना महत्वपूर्ण है.

खुद से दवा लेने से बचें

डेंगू के संदिग्ध या पुष्ट मामलों में बुखार और दर्द के लिए दवा डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए. विशेष रूप से ऐसी दर्द निवारक दवाओं से बचना जरूरी है जो रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं. मरीज को पर्याप्त तरल पदार्थ लेने, आराम करने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने की कोशिश करनी चाहिए. डेंगू में हर मरीज की स्थिति अलग हो सकती है. इसलिए केवल किसी एक लक्षण या प्लेटलेट काउंट के आधार पर बीमारी की गंभीरता का अनुमान लगाना उचित नहीं है.

मनीष रायसवाल

मनीष रायसवाल

मनीष रायसवाल वर्तमान में टीवी9 डिजिटल में लाइफस्टाइल बीट पर बतौर टीम लीड काम कर रहे हैं. मनीष के करियर की शुरुआत साल 2015 से इंडिया न्यूज के डिजिटल प्लेटफार्म Inkhabar के साथ बतौर सब एडिटर हुई थी. अलग-अलग पड़ावों को पार करते हुए इन्होंने इंडिया न्यूज, अमर उजाला और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है. 2009 से 2012 के बीच जामिया मिलिया इस्लामिया से बीए ऑनर्स मास मीडिया में ग्रेजुएशन और 2012-13 के बीच देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (दिल्ली) से डिप्लोमा करने के बाद मनीष पत्रकारिता से जुड़े हैं. मनीष लाइफस्टाइल के अलावा, हेल्थ, सोशल, वुमेन और बाल विकास और ट्रैवलिंग जैसे विषयों पर लिखना पसंद करते हैं. लाइफस्टाइल से जुड़े ज्यादातर टॉपिक्स पर इन्हें नई चीजें सीखने का शौक है.

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