Devshayani Ekadashi 2026: देवशयमी एकादशी पर शुरू होगा भगवान विष्णु का शयनकाल, चातुर्मास में जरूर करें ये 4 काम

Published on 22 जुल॰ 2026

Devshayani Ekadashi 2026: आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन विष्णु भगवान शयनकाल में चले जाएंगे. इसी कारण से इस एकादशी व्रत को देवशयमी एकादशी के नाम से जानते हैं. देवशयमी एकादशी पर सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु 4 महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं. इस दौरान 4 महीने के समय को चातुर्मास कहते हैं. यह समय विवाह और शुभ कार्य के लिए वर्जित माना जाता है. इस बार देवशयनी एकादशी कब है और चातुर्मास कब आरंभ हो रहा है. इसके बारे में और विष्णु भगवान के आशीर्वाद के लिए उपायों के बारे में जानते हैं.

कब है देवशयमी एकादशी? (Devshayani Ekadashi Kab Hai)

पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का आरंभ 24 जुलाई की सुबह 9 बजकर 12 मिनट पर होगा. इसका समापन अगले दिन 25 जुलाई को सुबह 11 बजकर 34 मिनट पर होगा. ऐसे में सूर्योदय तिथि के अनुसार, एकादशी तिथि 25 जुलाई शनिवार को मान्य होगी. इस दिन देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी. 25 जुलाई से ही विष्णु भगवान शयनकाल में चले जाएंगे. इसके बाद 20 नवंबर 2026, दिन शुक्रवार को कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष एकादशी यानी देवउठनी एकादशी पर विष्णु जी योग निद्रा से बाहर आएंगे.

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चातुर्मास में करें ये 4 उपाय

दीपदान का महत्व – हिंदू धर्म में दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है. चातुर्मास के दौरान विष्णु जी के आशीर्वाद और शुभ फलों के लिए घर के मुख्य द्वार पर रोजाना दीपक जलाएं. आप विष्णु जी और मां लक्ष्मी के समक्ष दीपक जला सकते हैं.

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ब्रह्मचर्य का पालन – देवशयनी एकादशी के बाद चातुर्मास में भक्तों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. व्यक्ति को सात्विक आहार लेना चाहिए. क्रोध, विवाद और तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए. यह समय आत्मिक शुद्धि और ज्ञान के वृद्धि के लिए अच्छा होता है.

दान करना है शुभ – हिंदू धर्म में दान-पुण्य करने को बेहद शुभ माना जाता है. चातुर्मास के दौरान जरूरतमंद लोगों को अन्न, धन और वस्त्र का दान करें. किसी आश्रम में या मंदिर में इन चीजों को दान कर सकते हैं.

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जमीन पर सोना – चातुर्मास के दौरान 4 महीने तक विष्णु भगवान शयनकाल में रहते हैं. इस दौरान भक्तों को विष्णु जी की उपासना के साथ ही जमीन पर सोने का उपाय करना चाहिए. ऐसा करने से विष्णु जी का आशीर्वाद मिलता है. चातुर्मास में पलंग का त्याग कर जमीन पर सोना शुभ माना जाता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.