परिसीमन बिल पर DMK ने खोल दिए अपने पत्ते, बता दिया क्या करने वाले हैं?

Published on 16 जुल॰ 2026

परिसीमन बिल को लेकर देशभर में सियासी पारा हाई है. दरअसल इस मानसून सत्र में माना जा रहा है कि एनडीए इस बिल को पास कराने की भरसक कोशिश करेगी. इसको लेकर संख्या बल की तैयारी को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है.

परिसीमन बिल को लेकर देशभर में सियासी पारा हाई है. दरअसल इस मानसून सत्र में माना जा रहा है कि एनडीए इस बिल को पास कराने की भरसक कोशिश करेगी. इसको लेकर संख्या बल की तैयारी को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है.

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Stalin DMK Chief

परिसीमन बिल को लेकर देशभर में सियासी पारा हाई है. दरअसल इस मानसून सत्र में माना जा रहा है कि एनडीए इस बिल को पास कराने की भरसक कोशिश करेगी. इसको लेकर संख्या बल की तैयारी को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है. वहीं सियासी गलियारों में एनडीए के बहुमत की राह में जो सबसे बड़ी समर्थक या रोड़ा कहा जा रहा है वह है डीएमके.

जी हां डीएमके अगर एनडीए को इस बिल पर समर्थन देते ही तो एनडीए की राह काफी आसान होने वाली है. लेकिन सत्र में अगर डीएमके ने अपना हाथ खींच लिया और एनडीए को समर्थन नहीं दिया तो उनको संख्याबल पूरा करने के लिए बहुत ज्यादा जोर लगाना होगा. इस बीच डीएमके ने अपना रुख साफ कर दिया है. 

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क्या है डीएमके का रुख?

मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है. इसके शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शुरू होगी परिसीमन बिल को लेकर घमासान. इस घमासान में एनडीए का पलड़ा काफी भारी है. हालांकि बीते सत्र में एनडीए इस बिल को पास नहीं करवा पाया क्योंकि उसके पास संख्या बल कम था. लेकिन इस बार माना जा रहा है कि एनडीए अपनी तैयारी लगभग पूरी कर ली है. इस तैयारी में डीएमके का भी अहम रोल है. वहीं डीएमके की ओर से जो प्रतिक्रिया सामने आई है उसके मुताबिक फिलहाल उन्होंने कोई निर्णय नहीं लिया है. डीएमके का कहना है कि सत्र शुरू होने के बाद स्थिति के मुताबिक उनकी ओर से निर्णय या फैसला लिया जाएगा. 

इसका मतलब है कि फिलहाल डीएमके अपने पत्ते खोल भी रहा है और छिपा भी रहा है. हो सकता है इस तरह के रिएक्शन के पीछे किसी तरह समझौता हो. जिसके लिए एनडीए को संकेत दिया जा रहा हो. किन उनकी शर्त पूरी कर ली जाए तो वह अपना समर्थन दे देंगे. 

कैसे डीएमके बदल सकती है तस्वीर?

आपको बता दें कि डीएमके के 22 सांसदों का साथ मिलने और एनसीपी के सपोर्ट से एनडीए को अपनी संख्या बल का लगभग आंकड़ा मिल जाएगा. क्योंकि एनडीए के पास फिलहाल 298 वोट हैं. वहीं पश्चिम बंगाल में बीते दिनों हुए टीएमसी के हाल के बाद बागी गुट में गए 20 सांसदों का सपोर्ट भी एनडीए को मिलता दिख रहा है. यही नहीं शिवसेना यूबीटी के 6 सांसद भी एनडीए के सहयोगी दल शिवसेना में आ चुके हैं. 

ऐसे में एनडीए की ताकत इन 26 सांसदों के बाद 324 हो जाएगी. अब इस संख्या में 8 एनसीपी सांसदों का समर्थन जोड़ दिया जाए तो संख्या होती है 332. बस इसके बाद डीएमके की ओर से 22 सांसद मिला लिए जाएं तो एनडीए अपना बहुमत का आंकड़ा छूने से 6 अंक पीछे रह जाती है. माना जा रहा है कि ये 6 अंक भी एनडीए बड़ी आसानी से जुटा लेगी. 

एनसीपी की प्रतिक्रिया का इंतजार

वहीं दूसरी तरफ एनसीपी की ओर से भी प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है. अब तक जो भी रिएक्शन सामने आए हैं उसके मुताबिक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है कि एनसीपी क्या करेगी. लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एनसीपी ने एनडीए को अपना समर्थन दे देगी. वहीं इन सबके बीच एक बार कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी पत्र लिखा है और बिना चर्चा के बिल पेश न करने के लिए कहा है. कांग्रेस अध्यक्ष ने सर्वदलीय बैठक के लिए भी कहा है जहां पर इस मुद्दे पर चर्चा की जाए. 

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