'पुरानी गाड़ियों के लिए E10 वापस लाएं' मुख्य आर्थिक सलाहकार की सरकार को सलाह

Published on 17 अग॰ 2026

Aug 17, 2026 03:36 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

Follow us on Google News

share

मुख्य आर्थिक सलाहकार का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को वापस लेने या रोकने की जरूरत नहीं है, बल्कि देश की मौजूदा गाड़ियों की फ्लीट को ध्यान में रखते हुए लचीला रुख अपनाने की जरूरत है।

CEA v ananta nageshwaram E20 fuel

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को वापस लेने या रोकने की जरूरत नहीं है

देशभर में E20 यानी 20 फीसदी इथेनॉल मिक्स वाले पेट्रोल को अनिवार्य किए जाने के बाद से ही वाहन चालकों और ऑटोमोबाइल सेक्टर में माइलेज और इंजन की सेहत को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं। इसी बीच भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंथा नागेश्वरन ने एक व्यावहारिक और बड़ा सुझाव देकर इस बहस को नया मोड़ दे दिया है।

इंडियन एक्सप्रेस में लिखे अपने एक लेख में नागेश्वरन ने सुझाव दिया है कि पुरानी गाड़ियों के लिए पेट्रोल पंपों पर E10 ईंधन का विकल्प दोबारा बहाल किया जाना चाहिए, जबकि नए और संगत वाहनों के लिए E20 का विकल्प जारी रहे।

मुख्य आर्थिक सलाहकार का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को वापस लेने या रोकने की जरूरत नहीं है, बल्कि देश की मौजूदा गाड़ियों की फ्लीट को ध्यान में रखते हुए लचीला रुख अपनाने की जरूरत है।

नागेश्वरन ने कहा, "पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ-साथ E10 जैसे कम इथेनॉल मिक्स वाले ईंधन को दोबारा उपलब्ध कराने से आम जनता की बड़ी चिंताओं को शांत किया जा सकता है।"

'इंजन डैमेज' के दावों को नकारा

नागेश्वरन ने इंटरनेट पर चल रहे उन दावों को खारिज किया कि E20 से गाड़ियों के इंजन तुरंत खराब हो रहे हैं या माइलेज 30% तक गिर जाता है।

इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा होती है, जिससे E20 ईंधन से माइलेज में केवल 6 से 7 फीसदी की ही कमी आती है।

देश में लगभग 7.5 से 8 करोड़ ऐसे पुराने टू-व्हीलर (खासतौर से BS-IV से पहले के कार्बोरेटर वाले मॉडल) चल रहे हैं। कार्बोरेटर इंजन मिक्स में मौजूद अतिरिक्त ऑक्सीजन के हिसाब से खुद को एडजस्ट नहीं कर पाते, जिससे वे ज्यादा गर्म होने लगते हैं। इसके अलावा, पुरानी रबर सील और फ्यूल सिस्टम के पार्ट्स इथेनॉल के संपर्क में आकर जल्दी खराब हो सकते हैं।

क्या है 'फूड Vs फ्यूल' की गंभीर चुनौती?

CEA ने अपनी टिप्पणी में इस मुद्दे को पेट्रोल पंप की बहस से आगे ले जाते हुए कृषि और खाद्य सुरक्षा से जोड़ा है।

अगर भारत 20 फीसदी से ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग (जैसे E27 या E30) की ओर बढ़ता है, तो इसके लिए बड़े पैमाने पर मक्का, गन्ना और अन्य अनाजों की जरूरत होगी।

ज्यादा इथेनॉल का मतलब है खेती की जमीन और पानी का इस्तेमाल ईंधन उत्पादन के लिए होना, जिससे खाद्य फसलों और मवेशियों के चारे (जैसे मक्का) की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

एक बार जब किसान, डिस्टिलरी और कृषि ढांचा ईंधन उत्पादन के अनुकूल ढल जाते हैं, तो खाद्य संकट या महंगाई के समय उन्हें वापस बदलना बेहद जटिल हो जाता है।

इसलिए, उन्होंने सलाह दी है कि E20 से आगे का लक्ष्य तय करने से पहले 'भोजन बनाम ईंधन' के बीच के संतुलन का गहराई से लागत-लाभ विश्लेषण किया जाना चाहिए।