धनबाद में निकला 'काले धन का कुबेर', कौन है वो कोयला माफिया जिसके घर ED रेड में मिली 600 करोड़ की संपत्ति

Published on 30 जुल॰ 2026

Time Updated: Thursday, July 30, 2026, 9:28 [IST]

ED Raids Dhanbad Coal Syndicate: झारखंड के धनबाद में अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। कोयला खनन, रंगदारी, लेवी वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जांच करते हुए एजेंसी ने शहर के 30 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में बड़े कोयला कारोबारी और बीसीसीएल (BCCL) के आउटसोर्सिंग ठेकेदार लाल बाबू सिंह (एलबी सिंह), कारोबारी अनिल गोयल और उनसे जुड़े लोगों के परिसरों की तलाशी ली गई।

जांच के दौरान 600 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों के दस्तावेज, 160 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड, करोड़ों की नकदी और कई अहम रिकॉर्ड सामने आए हैं। इस कार्रवाई के बाद पूरे कोयलांचल में हलचल मच गई है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। ईडी की रांची जोनल टीम ने सुबह-सुबह धनबाद के सरायढेला, कटरास, झरिया और बैंक मोड़ समेत कई इलाकों में एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान लाल बाबू सिंह और उनके सहयोगियों से जुड़े परिसरों की गहन जांच की गई। एजेंसी को यहां से बड़ी मात्रा में ऐसे दस्तावेज मिले, जो कथित तौर पर अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों की ओर इशारा करते हैं।

ED Raids Dhanbad Coal Syndicate

160 करोड़ के म्यूचुअल फंड फ्रीज, 600 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति सामने आई

जांच के दौरान ईडी ने करीब 160 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड को फ्रीज कर दिया। इसके अलावा 600 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए। इनमें प्लॉट, व्यावसायिक इमारतें, खनन से जुड़े शेयर और अन्य निवेश शामिल बताए जा रहे हैं।

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ईडी के अनुसार, छापेमारी में 200 से अधिक अचल संपत्तियों के मालिकाना दस्तावेज मिले हैं। इनकी अनुमानित कीमत 500 से 600 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है। एजेंसी ने 1.02 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाब नकदी, कई डिजिटल डिवाइस और दर्जनों बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए हैं।

🚨 झारखंड में ED की बड़ी कार्रवाई!

धनबाद में अवैध कोयला कारोबार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 25 से ज्यादा ठिकानों पर ED की छापेमारी।

कार्रवाई में करीब ₹1.5 करोड़ नकद और ₹150 करोड़ से अधिक की संपत्ति व बैंक बैलेंस का पता चला। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इसे झारखंड में ED की अब… pic.twitter.com/O0GzePkGRg

— Gen-Z of India (@GenZ_of_India_) July 29, 2026

धनबाद में लंबे समय से सक्रिय है कोयला सिंडिकेट

धनबाद में अवैध कोयला कारोबार का इतिहास कई दशक पुराना है। बीसीसीएल के राष्ट्रीयकरण के बाद से यहां अवैध खनन और अलग-अलग समूहों का प्रभाव लगातार बना रहा है। 1970 से 2000 के बीच कोयला क्षेत्रों में दबंगों और गैंगों का दबदबा रहा। बाद में खदानों के संचालन में आउटसोर्सिंग कंपनियों की भूमिका बढ़ी और कई ठेकेदारों ने सरकारी खदानों के जरिए अपना नेटवर्क तैयार किया। जांच एजेंसियों का मानना है कि कुछ आउटसोर्सिंग कंपनियों ने सरकारी ठेकों की आड़ में अवैध खनन और लेवी वसूली का समानांतर नेटवर्क खड़ा किया। ईडी अब इसी पूरे नेटवर्क की वित्तीय जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित अवैध कमाई को कहां और कैसे निवेश किया गया।

कौन दे रहा है इन माफियाओं को संरक्षण?

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत यह कार्रवाई की गई है। एजेंसी का उद्देश्य अपराध से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करना है। शुरुआती जांच में बड़ी मात्रा में संपत्तियों का खुलासा होने के बाद अब ईडी उन लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिन पर वर्षों से इस कथित अवैध कोयला नेटवर्क को संरक्षण देने के आरोप लगते रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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