Emission Norms: केंद्र सरकार अधिक माइलेज और कम उत्सर्जन वाले वाहन बनाने पर जोर दे रही है। इसके लिए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (CAFE)-III नॉर्म्स ड्राफ्ट जारी किया गया है। इसे 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव है।
सरकार ने जारी किया नया ड्राफ्ट
- Published: 19 Jul 2026, 04:03 PM IST
- Last Updated: 19 Jul 2026, 04:03 PM IST
Emission Norms: अगर आप आने वाले समय में नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। केंद्र सरकार ने ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (CAFE)-III नॉर्म्स का ड्राफ्ट जारी किया है। इसका उद्देश्य वाहनों की फ्यूल एफिशिएंसी बढ़ाना, कार्बन उत्सर्जन कम करना और स्वच्छ ईंधन व नई तकनीकों को बढ़ावा देना है। प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद वाहन निर्माताओं के लिए उत्सर्जन और माइलेज से जुड़े मानक पहले से अधिक सख्त हो जाएंगे।
1 अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव
ड्राफ्ट के अनुसार, CAFE-III नॉर्म्स को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव है। यानी मौजूदा CAFE-II नियम 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रह सकते हैं। इसके बाद नए मानकों के तहत वाहन निर्माताओं को तय लक्ष्यों का पालन करना होगा।
पांच साल तक रहेगा लागू
प्रस्तावित नीति की अवधि वित्त वर्ष 2028 से 2032 तक रखी गई है। नियमों के अनुपालन की समीक्षा दो चरणों में होगी। पहला मूल्यांकन शुरुआती तीन वर्षों के बाद और दूसरा अंतिम दो वर्षों के लिए किया जाएगा।
किन कंपनियों को मिलेगी राहत?
ड्राफ्ट के मुताबिक, जो वाहन निर्माता सालाना 1,000 से कम वाहन बेचते हैं, उन्हें CAFE-III नियमों से छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं बड़े वाहन निर्माताओं के लिए हर साल फ्यूल एफिशिएंसी के लक्ष्य और अधिक कड़े किए जाएंगे, ताकि कम ईंधन खपत और कम उत्सर्जन वाले वाहनों को बढ़ावा मिल सके।
एथेनॉल, बायोफ्यूल और CBG को मिलेगा बढ़ावा
नई नीति के तहत यदि कोई कंपनी एथेनॉल, बायोफ्यूल या कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) से चलने वाले वाहन विकसित करती है, तो उसे कार्बन न्यूट्रैलिटी से जुड़े लाभ दिए जाएंगे। इसका मकसद वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है।
EV, Hybrid और Flex-Fuel वाहनों को मिलेगा सुपर क्रेडिट
ड्राफ्ट में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाली गाड़ियों के लिए सुपर क्रेडिट का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, ईंधन बचाने वाली स्वीकृत तकनीकों के उपयोग पर वाहन कंपनियों को 9 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर तक कंप्लायंस लाभ मिल सकता है।
लागू होगा क्रेडिट-डेबिट सिस्टम
CAFE-III के तहत ऑटो कंपनियों के लिए क्रेडिट-डेबिट सिस्टम भी प्रस्तावित किया गया है। कंप्लायंस क्रेडिट की शुरुआती कीमत 2,500 रुपये प्रति क्रेडिट रखने का प्रस्ताव है, जिसे हर साल 500 रुपये बढ़ाया जाएगा। वहीं, निर्धारित अवधि तक उपयोग न किए गए कंप्लायंस क्रेडिट स्वतः समाप्त हो जाएंगे।
ग्राहकों और कंपनियों पर क्या होगा असर?
प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद वाहन निर्माताओं को नई तकनीकों, बेहतर इंजन, हाइब्रिड सिस्टम और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन पर अधिक निवेश करना पड़ेगा। इससे शुरुआती दौर में नई कारों की कीमतों में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, लंबे समय में ग्राहकों को अधिक माइलेज देने वाली, कम प्रदूषण फैलाने वाली और आधुनिक तकनीक से लैस गाड़ियां मिलने की उम्मीद है। वहीं, जो कंपनियां इन मानकों का पालन नहीं करेंगी, उनके लिए जुर्माने का भी प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
(मंजू कुमारी)