Explainer: क्या है ‘दिमागी नक्सल’ जिसका PM मोदी ने लाल किले से किया जिक्र? बयान के बाद क्यों मचा सियासी घमासान

Published on 17 अग॰ 2026

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले की प्राचीर से 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किए जाने के बाद से देश का सियासी पारा गरमा गया है. आइए समझते हैं कि यह पूरा विवाद क्या है और 'दिमागी नक्सल' को लेकर दोनों पक्षों की क्या दलीलें हैं.

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले की प्राचीर से 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किए जाने के बाद से देश का सियासी पारा गरमा गया है. आइए समझते हैं कि यह पूरा विवाद क्या है और 'दिमागी नक्सल' को लेकर दोनों पक्षों की क्या दलीलें हैं.

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PM Modi cooperation from opposition

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Who are Dimagi Naxals: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले की प्राचीर से 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किए जाने के बाद से देश का सियासी पारा गरमा गया है. पीएम ने देशवासियों को ऐसे लोगों से सावधान रहने को कहा था. इस बयान के बाद विपक्ष ने इसे सत्ता पक्ष का नया 'अर्बन नक्सल' तंज मानकर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद बीजेपी और सरकार के मंत्रियों ने मोर्चेबंदी करते हुए इसके सही मायने समझाए. आइए समझते हैं कि यह पूरा विवाद क्या है और 'दिमागी नक्सल' को लेकर दोनों पक्षों की क्या दलीलें हैं.

सरकार की नजर में कौन हैं 'दिमागी नक्सल'?

विपक्षी नेताओं की बयानबाजी के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और बीजेपी सांसद बृजलाल ने इस शब्द को विस्तार से परिभाषित किया. रिजिजू ने स्पष्ट किया कि पीएम मोदी ने किसी विपक्षी नेता को 'दिमागी नक्सल' नहीं कहा था, बल्कि यह उन विचारकों के लिए था जो देश विरोधी मंसूबों का समर्थन करते हैं. बीजेपी के अनुसार, 'दिमागी नक्सल' वे लोग हैं जो: संविधान और अखंडता के विरोधी: ये लोग माओवाद का बचाव करते हैं, धारा 370 के समर्थन में खड़े होते हैं और 'चिकन नेक' को काटकर पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने जैसी अलगाववादी सोच रखते हैं. ये जंगलों में हथियार लेकर नहीं छिपते. ये शहरों में प्रोफेसर, लेखक, NGO संचालक और बुद्धिजीवी का मुखौटा पहनकर रहते हैं.

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युवाओं का ब्रेनवॉश

 ये अपने लेखों और सेमिनारों के जरिए युवाओं के दिमाग में जहर घोलते हैं. ये न्यायपालिका, सुरक्षा बलों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ अविश्वास पैदा करते हैं और हथियारी नक्सलियों का महिमामंडन करके उनके लिए फंडिंग जुटाते हैं. कांग्रेस के दिग्गज नेता पी. चिदंबरम ने सरकार पर तीखा तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि उन्हें 'दिमागी नक्सल' होने पर गर्व है. कांग्रेस के ही जयराम रमेश ने इसे पुरानी 'अर्बन नक्सल' वाली थ्योरी का नया नाम बताया. इसके अलावा टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा समेत कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए.

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बीजेपी का कांग्रेस से सीधा सवाल: मनमोहन सही या चिदंबरम?

पी. चिदंबरम के "गर्व" वाले बयान ने बीजेपी को कांग्रेस पर सीधा हमला करने का मौका दे दिया. बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस की विचारधारा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का वह ऐतिहासिक बयान याद दिलाया जिसमें उन्होंने नक्सलवाद को भारत की "आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा" माना था. बीजेपी ने पूछा कि कांग्रेस साफ करे कि वह मनमोहन सिंह की बात मानती है या चिदंबरम के 'गर्व' वाले रुख का समर्थन करती है? लाल आतंक का खात्मा: बीजेपी ने कांग्रेस सरकार के दौर की याद दिलाते हुए कहा कि पहले 'रेड कॉरिडोर' के तहत 180 जिले नक्सलवाद की आग में जल रहे थे. लेकिन 31 मई 2026 तक मोदी सरकार की नीतियों और गृह मंत्री अमित शाह की सख्ती के कारण नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर शून्य हो गई है. बंदूकों की जगह 'बस्तर ओलंपिक': सरकार ने अपनी उपलब्धि गिनाते हुए बताया कि जिस बस्तर में कभी गोलियां और बारूद गूंजते थे, आज वहां 'बस्तर ओलंपिक' जैसे शानदार खेल कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, जो एक नए और शांत भारत की तस्वीर है.

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