नगर निगम लुधियाना की फाइनांस एंड कांट्रेक्ट कमेटी (F&CC) के दो सदस्यों का चुनाव आज गुरुनानक देव भवन में होगा। दो पदों के लिए कुल चार उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। दो उम्मीदवार सत्तापक्ष यानी आम आदमी पार्टी के हैं जबकि एक उम्मीदवार कांग्रेस और एक भाज
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विपक्षी पार्षद MLA के नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने का विरोध कर रहे हैं, वहीं MLA व मेयर इस बात पर अड़े हैं कि वो मतदान करेंगे। उन्होंने विपक्षी पार्षदों को कह दिया कि अगर उनको कोई आपत्ति है तो वो कोर्ट जाएं। उधर, कांग्रेस उम्मीदवार गौरव भट्टी व भाजपा उम्मीदवार रुचि गुलाटी समेत सभी विपक्षी पार्षदों ने मेयर व कमिश्नर को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने एक्ट से बाहर जाकर विधायकों से वोटिंग करवाई तो वो कोर्ट जाएंगे।

क्या है चुनाव जीतने का गणित सिलसिलेवार जानिए…
- कुल पार्षदों की संख्या: लुधियाना नगर निगम हाउस में कुल 95 पार्षद हैं। इनमें आम आदमी पार्टी (AAP) के 49, कांग्रेस के 25, भाजपा के 19 (जिसमें एक आजाद पार्षद भी है) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के 2 पार्षद शामिल हैं।
- AAP के वोटों का गणित: AAP के कुल 49 पार्षदों में से एक मेयर हैं और एक पार्षद विदेश में हैं। मेयर चुनाव अधिकारी की भूमिका में रहेंगी, इसलिए उन्हें वोट देने का अधिकार होगा या नहीं होगा इस पर संशय है।अगर मेयर को वोट देने का अधिकार नहीं हुआ तो AAP के पास कुल 47 वोट बचते हैं। वहीं आप के पास शहर में सात विधायक हैं। उसमें से एक विधाकय जेल में हैं। अगर छह विधायक भी वोट देते हैं तो आप के पास 53 वोट हाे जाएंगे। यदि विधायकों की वोट अमान्य हुई तो आप के दूसरे उम्मीदवार का जीतना मुश्किल हो जाएगा।
- जीत के लिए न्यूनतम वोट: आप दोनों उम्मीदवारों के पास केवल 53 वोट बचेंगे। अगर क्रॉस वोटिंग नहीं होती है तो जीत के लिए एक उम्मीदवार को पहली वरीयता के कम से कम 26 वोटों की आवश्यकता है। ऐसे में आप के दोनों उम्मीदवारों की जीत तय है। अगर क्रॉस वोटिंग हुई या अकाली दल के पार्षदों ने कांग्रेस उम्मीदवार को वोट दी तो आप के लिए दूसरा उम्मीदवार जिताना मुश्किल हो जाएगा।
- वरीयता वोटिंग: नगर निगम सचिव विवेक वर्मा के अनुसार, F&CC सदस्यों का चुनाव 'सिंगल ट्रांसफेरेबल वोट सिस्टम' यानी वरीयता के आधार पर होगा। पार्षद अपनी पसंद के अनुसार उम्मीदवारों को पहली और दूसरी वरीयता देंगे। यदि पहली पसंद के वोटों में टाई होता है, तो दूसरी पसंद के वोटों की गिनती की जाएगी।

दो विधायकों की शाक दांव पर
विधायक मदनलाल बग्गा व विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू ने अपने-अपने बेटों को एफएंडसीसी में मेंबर बनवा दिया था। कांग्रेस पार्षद गौरव भट्टी ने उनकी नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने स्थानीय निकाय विभाग को नोटिस जारी किया तो विभाग ने दोनों की नियुक्ति को गैरकानूनी बताते हुए रद्द कर दिया। अब चुनाव हो रहे हैं तो दोनों ने अपने-अपने बेटों को फिर से चुनाव मैदान में उतार दिया है। दोनों की शाक अब दांव पर लगी है। ऐसे में दोनों विधायक एक-एक पार्षद की वोट पक्की करने में जुटे हैं।

इसके अलावा 6 विधायकों की वोट भी आप के पास हैं।
आप के नाराज पार्षदों व शिअद के दो पार्षदों पर दारोमदार
हलका वेस्ट से आप के पार्षद नाराज भी चल रहे हैं। ऐसे में नाराज पार्षदों ने अगर क्रॉस वोटिंग की या वो वोट देने नहीं आए तो आम आदमी पार्टी का पूरा गणित बिगड़ सकता है। हालांकि मनीष सिसोदिया व अमन अरोड़ा हलका वेस्ट के पार्षदों से मीटिंग करके उन्हें मना चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ अकाली दल के दो पार्षदों ने अगर कांग्रेस के उम्मीदवार को वोट दिया तो फिर भी आप के दूसरे उम्मीदवार का जीतना मुश्किल हो जाएगा। अब सारा दारोमदार नाराज पार्षदों व शिअद पार्षदों पर है।

मतपत्रों को लेकर जमकर हुआ हंगामा
नगर निगम ने जो मतपत्र जारी किए थे उनके पीछे सीरियल नंबर लिखा था ताकि पता चल सके कि किस पार्षद ने किसे वोट किया है। विपक्षी पार्षदों ने इसका विरोध किया। शुक्रवार देर शाम विपक्षी पार्षदों की मेयर व कमिश्नर के साथ बैठक हुई, जिसके बाद मेयर ने माना कि मतपत्र के पीछे सीरियल नंबर नहीं डाला जाएगा। हालांकि विधायकों केवोट करवाने व खुद के वोट देने पर वो अड़ी रही।
पार्षदों को दे रहे लालच
पार्षद गौरव भट्टी ने बताया कि वीरवार से अफसर कांग्रेस समेत विपक्षी पार्षदाें को लालच दे रहे हैं कि उन्हें अपने जो काम करवाने हैं वो फाइल लेकर आएं तुरंत काम हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी साम-दाम-दंड-भेद की नीति पर काम करने लग गई है। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्षद न तो अफसरों से डरते हैं और न ही उन्होंने कोई गैरकानूनी काम करवाने हैं।