लुधियाना नगर निगम की शक्तिशाली 'फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट कमेटी' (F&CC) के दो सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होते ही सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर बगावत की स्थिति पैदा हो गई है। पार्टी ने दो उम्मीदवारों का नाम फाइनल किया था जबकि तीसरे पार्
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कमेटी के दो पदों के लिए कुल 5 पार्षदों ने नामांकन पत्र जमा कराए हैं। इनमें आम आदमी पार्टी के 3, कांग्रेस का 1 और भाजपा का 1 उम्मीदवार शामिल है। कांग्रेस की ओर से गौरव भट्टी और भाजपा की ओर से रुचि गुलाटी ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है।
आम आदमी पार्टी की ओर से विधायक मदन लाल बग्गा के बेटे अमन बग्गा और विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू के बेटे युवराज सिंह सिद्धू को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया गया था।
पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री व लुधियाना वेस्ट के विधायक संजीव अरोड़ा के हलके के AAP पार्षदों ने उपेक्षा का आरोप लगाते हुए बगावत कर दी और पार्षद मनिंदर कौर घुम्मन का नामांकन पत्र दाखिल करा दिया। तीसरा उम्मीदवार मैदान में आने से आम आदमी पार्टी की जीत का पूरा समीकरण गड़बड़ा गया है।

नगर निगम हाउस की बैठक में आप पार्षद व मंच पर बैठे मेयर व विधायक।
लुधियाना वेस्ट के पार्षदों की बगावत के कारण जानिए…
- कमेटी में प्रतिनिधित्व की मांग: पार्षदों का कहना है कि लुधियाना नगर निगम में इस समय 'वेस्ट' हलके को कोई बड़ा पद नहीं मिला है। नॉर्थ (उत्तरी) हलके से सीनियर डिप्टी मेयर और आत्म नगर हलके से डिप्टी मेयर हैं। इन दोनों हलकों से पहले ही F&CC के सदस्य मौजूद हैं। यदि विधायकों के बेटों को चुना जाता है, तो उन हलकों से दो-दो सदस्य हो जाएंगे, जबकि वेस्ट हलका खाली रह जाएगा।
- बैठक से 13 पार्षदों का वॉकआउट: 24 अगस्त को जब मेयर और विधायकों ने AAP पार्षदों की बैठक बुलाई और अमन बग्गा व युवराज सिंह सिद्धू के नाम का प्रस्ताव रखा, तो वेस्ट हलके के पार्षदों ने इसका कड़ा विरोध किया। बैठक में हुए हंगामे के बाद 10 स्थानीय पार्षद और 3 अन्य समर्थक पार्षद बैठक छोड़कर चले गए थे।
- रात को मनाने पहुंचे विधायक, पर बेनतीजा रही वार्ता: चुनाव की पूर्व संध्या पर विरोध कर रहे पार्षदों ने सराभा नगर में बैठक की। इसकी भनक लगते ही विधायक पार्षदों को मनाने पहुँचे, लेकिन पार्षद एक पद अपने हलके को देने की मांग पर अड़े रहे। असंतोष को देखते हुए मेयर ने तकनीकी कारणों का हवाला देकर चुनाव को टाल दिया।
- विधायकों की जिद: लुधियाना वेस्ट के पार्षदों द्वारा अपने प्रतिनिधि के नाम की मांग रखने के बावजूद दोनों में से कोई भी विधायक अपने बेटे की उम्मीदवारी वापस लेने को तैयार नहीं हुआ। इसी टकराव के चलते नाराज पार्षदों ने अपना अलग प्रत्याशी मैदान में उतार दिया।

भाजपा व कांग्रेस के उम्मीदवार
क्या है चुनाव जीतने का गणित सिलसिलेवार जानिए…
- कुल पार्षदों की संख्या: लुधियाना नगर निगम हाउस में कुल 95 पार्षद हैं। इनमें आम आदमी पार्टी (AAP) के 49, कांग्रेस के 25, भाजपा के 19 (जिसमें एक आजाद पार्षद भी है) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के 2 पार्षद शामिल हैं।
- AAP के वोटों का गणित: AAP के कुल 49 पार्षदों में से एक मेयर हैं और एक पार्षद विदेश में हैं। मेयर चुनाव अधिकारी (Presiding Officer) की भूमिका में रहेंगी, इसलिए उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होगा। इस तरह AAP के पास कुल 47 वोट बचते हैं।
- वेस्ट हलके के 13 पार्षदों का रुख: AAP के 47 वोटों में से 13 पार्षद मंत्री संजीव अरोड़ा के लुधियाना वेस्ट हलके से आते हैं, जो पार्टी फैसले के खिलाफ जाकर मनिंदर कौर घुम्मन के समर्थन में उतर आए हैं।
- जीत के लिए न्यूनतम वोट: बगावत के बाद आधिकारिक दोनों उम्मीदवारों के पास केवल 34 वोट बचेंगे। जीत के लिए एक उम्मीदवार को पहली वरीयता के कम से कम 26 वोटों की आवश्यकता है। ऐसे में यदि पार्टी अपने 34 में से 26 वोट एक उम्मीदवार को दिलवाती है, तो उसके दूसरे आधिकारिक उम्मीदवार का चुना जाना मुश्किल हो जाएगा।
- वरीयता वोटिंग: नगर निगम सचिव विवेक वर्मा के अनुसार, F&CC सदस्यों का चुनाव 'सिंगल ट्रांसफेरेबल वोट सिस्टम' यानी वरीयता के आधार पर होगा। पार्षद अपनी पसंद के अनुसार उम्मीदवारों को पहली और दूसरी वरीयता देंगे। यदि पहली पसंद के वोटों में टाई होता है, तो दूसरी पसंद के वोटों की गिनती की जाएगी।
- विधायकों के मताधिकार पर संशय: चुनाव में स्थानीय विधायकों को वोट देने का अधिकार है या नहीं, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। विपक्षी दलों ने नगर निगम एक्ट का हवाला देते हुए कहा है कि विधायक इस चुनाव में वोट नहीं डाल सकते। वहीं, मेयर ने 1997 के चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि तब विधायकों ने वोट डाला था, इसलिए वे इस बार भी मतदान कर सकते हैं।
