गोरखपुर में दर्दनाक हादसा: गोरक्षनाथ घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान स्लैब गिरने से दो अधिवक्ताओं की मौत, सीएमओ, जेई और ठेकेदार पर FIR दर्ज - Up18 News

Published on 7 सित॰ 2026

गोरखपुर। जनपद के गोरक्षनाथ घाट पर रविवार को एक बड़ा और भीषण हादसा सामने आया, जहां अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे दो अधिवक्ता एक गुंबदनुमा छज्जे के नीचे बैठे थे कि अचानक उसका भारी स्लैब भरभराकर उनके ऊपर आ गिरा। इस मलबे के नीचे दबने से अधिवक्ता आलोक अस्थाना (45) और संजय सिंह की दर्दनाक मौत हो गई। इस दुखद हादसे के बाद भारी संख्या में आक्रोशित वकील जिला अस्पताल पहुंच गए। एंबुलेंस के समय पर न पहुंचने का गंभीर आरोप लगाते हुए वकीलों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और गुस्से में आकर एक एंबुलेंस में तोड़फोड़ भी कर डाली। करीब चार घंटे तक चले इस हंगामे के दौरान एसपी सिटी, सीओ समेत कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर मुस्तैद रही।

​ई-रिक्शा से अस्पताल ले जाने पड़े घायल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह दुर्घटना सुबह करीब 11:30 बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों ने खुद मलबा हटाकर दोनों घायल वकीलों को बाहर निकाला। आरोप है कि एंबुलेंस को फोन करने के बावजूद करीब 30 मिनट तक वह मौके पर नहीं पहुंची, जिसके बाद दोनों को मजबूरी में ई-रिक्शा के जरिए जिला अस्पताल ले जाया गया। अधिवक्ता आलोक की हालत बेहद नाजुक थी, जिन्हें डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज रेफर किया, लेकिन रास्ते में ही उनकी सांसे थम गईं। उनका शव बाद में एंबुलेंस से जिला अस्पताल वापस लाया गया, जबकि दूसरे घायल संजय सिंह ने देर रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

अस्पताल और सीएमओ पर लगे लापरवाही के आरोप

मृतक आलोक की पत्नी शालिनी अस्थाना ने अस्पताल में समय पर इलाज न मिलने का गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. राजेश झा और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। शालिनी का यह भी आरोप है कि सीएमओ ने फोन पर बेहद संवेदनहीन टिप्पणी करते हुए कहा था कि “यहां रोज 10 लोग मरते हैं, एक और मर जाएगा तो क्या हो जाएगा।”

​दूसरी तरफ, जिलाधिकारी दीपक मीणा ने इस पूरे मामले में एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों ने घटना के वक्त आकाशीय बिजली गिरने से तेज झटका लगने की बात बताई है, जिसके कारण संभवतः स्लैब गिरा हो सकता है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच कराई जा रही है।

घाट के निर्माण गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर उठे सवाल

हादसे का शिकार हुआ गोरक्षनाथ घाट सिंचाई विभाग द्वारा बनवाया गया था, जिसका लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 16 फरवरी 2021 को किया था। इस घाट के सुंदरीकरण पर करीब 27.85 करोड़ रुपये की लागत आई थी। हालांकि, इसके निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। नगर निगम ने अभी तक इस घाट को औपचारिक रूप से अपने हैंडओवर नहीं लिया है, हालांकि यहां सफाई का कार्य जरूर कराया जाता है। इस बड़ी दुर्घटना के बाद तत्कालीन जूनियर इंजीनियर (JE) और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

​बता दें कि मृतक आलोक अस्थाना पिछले करीब 20 वर्षों से दीवानी कचहरी में वकालत कर रहे थे, जबकि संजय सिंह को वकालत करते हुए लगभग 28 वर्ष हो चुके थे। प्रशासन की ओर से दोनों पीड़ित परिवारों को चार-चार लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान कर दी गई है, और पांच-पांच लाख रुपये की अतिरिक्त मदद के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। घाट पर बने इन चबूतरों का उपयोग आमतौर पर अंतिम संस्कार में आने वाले शोक संतप्त लोगों के बैठने के लिए किया जाता है, लेकिन इस हादसे ने इस तरह के अन्य सार्वजनिक निर्माणों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।