Free Laptop Scheme : फ्री लैपटॉप बांटने का मैसेज निकला फर्जी, पीआईबी ने छात्रों को किया सावधान - Doon Horizon

Published on 5 सित॰ 2026

व्हाट्सएप पर 9.6 लाख छात्रों को फ्री लैपटॉप देने का दावा पूरी तरह फर्जी निकला है। पीआईबी फैक्ट चेक ने इसे डेटा चोरी का फिशिंग स्कैम बताते हुए सतर्क रहने को कहा है।

दून हॉराइज़न, नई दिल्ली (05 सितंबर): व्हाट्सएप ग्रुप्स और सोशल मीडिया पर इन दिनों मुफ्त लैपटॉप (Free Laptop Scheme) बांटने का एक लुभावना मैसेज तेजी से फॉरवर्ड किया जा रहा है, जिसकी हकीकत बेहद चौंकाने वाली है।

दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ‘स्टूडेंट्स लैपटॉप स्कीम 2026’ (Students Laptop Scheme 2026) के तहत देश भर के 9.6 लाख से अधिक मेधावी छात्रों को मुफ्त लैपटॉप दे रही है। लेकिन इस दावे में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने इसकी गहन पड़ताल करने के बाद साफ कर दिया है कि यह मैसेज पूरी तरह फर्जी और ऑनलाइन ठगी की एक सोची-समझी साजिश है।

डेटा चुराने का खतरनाक जरिया है वायरल लिंक

वायरल हो रहे इस मैसेज में छात्रों से कहा जा रहा है कि वे योजना का लाभ लेने के लिए दिए गए लिंक पर तुरंत रजिस्ट्रेशन करवाएं। जैसे ही कोई यूजर इन संदिग्ध यूआरएल (lc.ke या archive.full-scholarship.online) पर जाता है, वहां एक फॉर्म खुल जाता है।

इस फॉर्म में छात्र का पूरा नाम, आयु, शैक्षणिक योग्यता, मोबाइल नंबर और यहां तक कि बैंक विवरण तक दर्ज करने को कहा जाता है। असल में यह एक क्लासिक फिशिंग स्कैम (Phishing Scam) है। साइबर अपराधी इन विवरणों का इस्तेमाल पहचान की चोरी करने, सिम क्लोनिंग करने और बैंक खातों में सेंध लगाने के लिए करते हैं। एक बार डेटा लीक हो जाने के बाद वित्तीय नुकसान का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

फर्जी और असली सरकारी वेबसाइट की पहचान कैसे करें?

साइबर फ्रॉड से बचने का सबसे आसान तरीका यूआरएल (URL) की बारीकी से जांच करना है। भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल का डोमेन हमेशा .gov.in या .nic.in पर ही खत्म होता है। कोई भी सरकारी योजना कभी भी .online, .tk, .ke या किसी अनजान फ्री डोमेन एक्सटेंशन पर होस्ट नहीं की जाती।

इसके अलावा, सरकार जब भी किसी कल्याणकारी योजना की शुरुआत करती है, तो उसकी विधिवत घोषणा राष्ट्रीय मीडिया, पीआईबी के आधिकारिक बुलेटिन और संबंधित मंत्रालय की वेबसाइट पर की जाती है। किसी अज्ञात व्हाट्सएप फॉरवर्ड के जरिए फॉर्म भरवाने का कोई आधिकारिक प्रावधान नहीं है।

संदिग्ध मैसेज दिखने पर क्या करें?

यदि आपके पास भी ऐसा कोई संदेहास्पद मैसेज या लिंक आता है, तो उस पर भूलकर भी क्लिक न करें और न ही उसे आगे फॉरवर्ड करें। किसी भी अनजान पोर्टल पर अपने जरूरी पहचान दस्तावेज या ओटीपी साझा करने से हमेशा बचें।

अगर आपको किसी सरकारी योजना के दावे पर जरा भी संदेह हो, तो आप सीधे पीआईबी फैक्ट चेक टीम से संपर्क साध सकते हैं। इसके लिए आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर +91 8799711259 पर मैसेज भेजा जा सकता है या फिर [email protected] पर ईमेल करके हकीकत जानी जा सकती है। किसी भी वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।