Ganesh Ji Aarti Lyrics in Hindi: आज से यानी कि 14 सितंबर 2026 से गणेशोत्सव शुरू हो चुका है. आज गणेश चतुर्थी है और फिर 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के साथ इसका समापन होगा. ऐसे में अब पूरे दस दिनों तक भगवान गणेश जी की नित्य प्रतिदिन आरती की जाएगी. बड़े-बड़े गणपति पंडालों में, घर में और मंदिरों में मुख्य रूप से सुबह और शाम विधिवत पूजा और आरती की जाएगी. क्या आप जानते हैं महाराष्ट्र में गणपति पूजा में की जाने वाली आरती और उत्तर भारत में गणेश जी की आरती अलग-अलग है? जी हां, ये दोनों एक-दूसरे से भिन्न है.
दरअसल, महाराष्ट्र, पुणे, मुंबई और नाशिक जैसे इलाकों में गणपति जी की पूजा में जिस आरती का पाठ किया जाता है, उसमें मराठी संस्कृत के शब्दों का इस्तेमाल किया गया है. वहां के लोगों द्वारा अपनी भाषा में आरती गाई गई, जो आज तक वैसे ही गाई जा रही है. वही, उत्तर भारत और अन्य राज्यों में जय गणेश-जय गणेश-जय गणेश देवा आरती गाई जाती है. इस आरती की रचना संत कवि सूरदास जी ने की थी. महाराष्ट्र की सुखकर्ता-दुखकर्ता आरती की रचना 17वीं शताब्दी में संत समर्थ रामदास ने की थी. इस आरती में मराठी परंपराओं का उल्लेख मिलता है. चलिए पढ़ते हैं इन दोनों आरती के लिरिक्स हिंदी में...
जय गणेश-जय गणेश देवा आरती (Shree Ganesh Aarti Lyrics in Hindi)
जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
एकदन्त दयावन्त,चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे,मूसे की सवारी॥
(माथे पर सिन्दूर सोहे,मूसे की सवारी॥)
पान चढ़े फूल चढ़े,और चढ़े मेवा।
(हार चढ़े, फूल चढ़े,और चढ़े मेवा।)
लड्डुअन का भोग लगे,सन्त करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
अंधे को आंख देत,कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत,निर्धन को माया॥
'सूर' श्याम शरण आए,सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
(दीनन की लाज राखो,शम्भु सुतवारी।
कामना को पूर्ण करो,जग बलिहारी॥ )
जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
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श्री गणपतीची आरती (Marathi Shree Ganapatich Aarti Lyrics)
सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची।
सर्वांगी सुन्दर उटि शेंदुराची।
कण्ठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।
चन्दनाची उटि कुंकुमकेशरा।
हिरे जड़ित मुकुट शोभतो बरा।
रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥
लम्बोदर पीताम्बर फणिवर बन्धना।
सरळ सोण्ड वक्रतुण्ड त्रिनयना।
दास रामाचा वाट पाहे सदना।
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवन्दना॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)