Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, सौभाग्य में आ सकती है कमी और रुक सकती है पति की तरक्की

Published on 9 सित॰ 2026

Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, सौभाग्य में आ सकती है कमी और रुक सकती है पति की तरक्की

सनातन धर्म में सुहागिन महिलाओं और मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना रखने वाली कुंवारी कन्याओं के लिए हरतालिका तीज का व्रत सबसे महत्वपूर्ण और कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को यह पावन पर्व मनाया जाता है, जो इस वर्ष 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को पड़ रहा है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की बालू अथवा मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी कठोर तप और व्रत के प्रभाव से माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। शास्त्रों में इस व्रत को निर्जला रखने का विधान है, इसलिए इसमें नियमों का पालन बेहद सूक्ष्मता और निष्ठा से करना अनिवार्य माना गया है। यदि व्रत के दौरान कुछ गलतियां या अज्ञानतावश चूक हो जाए, तो मान्यता है कि व्रत निष्फल हो जाता है और दांपत्य जीवन में परेशानियां आ सकती हैं।

भूलकर भी न करें ये 5 बड़ी गलतियां

धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज के दिन व्रती महिलाओं को इन पांच प्रमुख गलतियों से पूरी तरह बचना चाहिए:

  • 1. निर्जला संकल्प तोड़कर अन्न या जल ग्रहण करना: हरतालिका तीज का व्रत पूर्ण रूप से 'निर्जला' (बिना पानी के) रखा जाता है। व्रत के दौरान दिन या रात में भूलकर भी जल, दूध या फल का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि जानबूझकर व्रत में जल या अन्न ग्रहण करने से व्रत खंडित हो जाता है और तप का पुण्य फल प्राप्त नहीं होता। (गर्भवती, अस्वस्थ या धात्री महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या जल ग्रहण की छूट शास्त्रों में दी गई है)।

  • 2. दिन या रात में सोना (शयन निषेध): शास्त्रों के अनुसार हरतालिका तीज के पावन अवसर पर दिन के समय सोने की सख्त मनाही है। इतना ही नहीं, इस रात चार प्रहर की पूजा का विधान होने के कारण महिलाओं को रात्रि जागरण करना चाहिए। रात भर भजन-कीर्तन, शिव चालीसा और मंत्रों का जाप करना शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन सोने से जातक का सौभाग्य क्षीण होता है और जीवन में आलस्य का वास होता है।

  • 3. काले, नीले या सफेद रंग के वस्त्र पहनना: तीज का पर्व पूर्णतः सुहाग और दांपत्य सुख का प्रतीक है। पूजा और अनुष्ठान के दौरान काले, नीले, कत्थई या सफेद रंग के वस्त्र धारण करने से बचना चाहिए। इस दिन लाल, पीला, हरा, नारंगी या गुलाबी जैसे शुभ व सात्विक रंगों की साड़ियां या वस्त्र पहनना अत्यंत फलदायी और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है।

  • 4. क्रोध, विवाद और अपशब्दों का प्रयोग: व्रत का अर्थ केवल भूखे-प्यासे रहना नहीं, बल्कि मन और वाणी की शुद्धि भी है। हरतालिका तीज के दिन घर में क्लेश, सास-ससुर या पति से वाद-विवाद, किसी की निंदा या अपशब्द बोलने से व्रत का फल नष्ट हो जाता है। मन में शांति, क्षमा और भगवान शिव-पार्वती के प्रति श्रद्धा का भाव बनाए रखना आवश्यक है।

  • 5. व्रत कथा सुने बिना पूजा अधूरी छोड़ना व पारण में जल्दबाजी: हरतालिका तीज की पूजा तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक कि प्रदोष काल में या रात्रि के समय हरतालिका तीज की पौराणिक व्रत कथा का श्रवण न किया जाए। इसके अलावा, पूजा समाप्त होते ही रात में व्रत नहीं तोड़ना चाहिए। व्रत का पारण हमेशा अगले दिन (चतुर्थी तिथि) प्रातःकाल स्नान, दान और शिव-गौरी की आरती के पश्चात ही ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान देकर सात्विक भोजन से करना चाहिए।

पूजन मुहूर्त और सही विधि से मिलेगा मनवांछित फल

हरतालिका तीज पर सुबह और प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास) में पूजा करने का विशेष महत्व है। सुबह स्नान के पश्चात सोलह श्रृंगार कर संकल्प लें। शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मिट्टी की प्रतिमाओं को फूलों, बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र और सुहाग सामग्री (सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेंहदी आदि) अर्पित करें। धूप, दीप और कर्पूर से आरती करें तथा व्रत कथा सुनकर परिवार की सुख-शांति व पति की दीर्घायु और तरक्की की प्रार्थना करें। विधि-विधान से किए गए इस तप से दांपत्य जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।