महिला कर्मचारी को चाइल्ड केयर लीव देने से किया मना, मध्य प्रदेश HC ने अधिकारी पर लगाया 50 हजार का जुर्माना

Published on 8 अग॰ 2026

महिला कर्मचारी को चाइल्ड केयर लीव देने से किया मना, मध्य प्रदेश HC ने अधिकारी पर लगाया 50 हजार का जुर्माना

HC ने अधिकारी पर लगाया 50 हजार का जुर्मानाImage Credit source: Getty Images

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि किसी भी सरकारी विभाग का सर्कुलर या प्रशासनिक नीति अदालत के आदेश से ऊपर नहीं हो सकती. कोर्ट ने कहा कि जब किसी मुद्दे पर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट कानून की व्याख्या कर चुका है, तो उसका पालन करना सभी अधिकारियों के लिए अनिवार्य है और आदेशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है.

यह मामला खंडवा निवासी संविदा महिला कर्मचारी आयशा शेख से जुड़ा है. उन्होंने अपने चाइल्ड केयर लीव (CCL) आवेदन को खारिज किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक ने 16 जुलाई 2026 को उनका आवेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के 22 जुलाई 2023 के सर्कुलर के अनुसार संविदा कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव का लाभ नहीं दिया जा सकता.

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने की. याचिकाकर्ता की ओर से वकील निखिल तिवारी ने कोर्ट को बताया कि संविदा कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव देने के संबंध में हाईकोर्ट की एकलपीठ, खंडपीठ और सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई बार स्पष्ट फैसले दे चुके हैं. इसके बावजूद संबंधित अधिकारी बार-बार उन्हीं पुराने सर्कुलरों का हवाला देकर कर्मचारियों को उनका अधिकार देने से इनकार कर रहे हैं.

‘अदालत के आदेश का पालन करना सभी प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी’

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता को अपने वैधानिक अधिकार के लिए बार-बार अदालत की शरण लेनी पड़ी. कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए कहा कि अदालत ही कानून की अंतिम व्याख्याकार है. जब तक किसी फैसले को बड़ी पीठ या सर्वोच्च न्यायालय बदल नहीं देता, तब तक उसका पालन करना सभी प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है. किसी भी सरकारी सर्कुलर या विभागीय गाइडलाइन के आधार पर न्यायिक आदेशों की अनदेखी नहीं की जा सकती.

संविदा कर्मचारियों को भी मिलना चाहिए चाइल्ड केयर लीव

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 38 और 39 राज्य को कल्याणकारी नीतियां बनाने का दायित्व देते हैं. इसी भावना के अनुरूप मध्य प्रदेश सिविल सेवा (छुट्टी) नियम, 1977 के नियम 38-सी और मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के प्रावधानों को देखते हुए संविदा कर्मचारियों को भी 240 दिनों तक चाइल्ड केयर लीव का लाभ मिलना चाहिए.

राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक पर 50 हजार का जुर्माना

कोर्ट ने राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उनपर 50,000 रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया. यह राशि 30 दिनों के भीतर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराने का निर्देश दिया गया है. साथ ही 16 जुलाई 2026 के उस आदेश को निरस्त कर दिया गया, जिसके जरिए आयशा शेख का अवकाश आवेदन खारिज किया गया था. हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग को तत्काल चाइल्ड केयर लीव स्वीकृत करने का आदेश दिया है. इसके अलावा आदेश की कॉपी प्रमुख सचिव और महाधिवक्ता को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि भविष्य में न्यायिक आदेशों की अवहेलना दोबारा न हो.

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शिव चौबे

शिव चौबे

शिव चौबे को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक दशक का अनुभव है. शिव ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से संस्कृत विषय में शिक्षा प्राप्त की, जिसके बाद उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक अखबार से की. इसके बाद वर्ष 2019 में वे ETV भारत से बतौर संवाददाता जुड़े, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट और शिक्षा से जुड़ी उनकी कई महत्वपूर्ण रिपोर्टों ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी. वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने जान जोखिम में डालकर जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की और व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर किया. उनकी रिपोर्ट्स के बाद जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़े. वर्ष 2021 में शिव चौबे ने TV9 भारतवर्ष में जिला रिपोर्टर के रूप में नई भूमिका की शुरुआत की. इसके बाद वर्ष 2023 में वे PTI (Press Trust of India) से जुड़े. यहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण खोजी रिपोर्टें कीं, जिनमें सिवनी जिले का चर्चित सर्पदंश घोटाला, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय से जुड़ा गोबर घोटाला तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई घोटाले शामिल है. इसके अलावा उन्होंने CAA के दौरान लगे कर्फ्यू, बरगी क्रूज हादसे और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं की जमीनी रिपोर्टिंग कर अपनी अलग पहचान बनाई. निष्पक्ष, जनसरोकारों से जुड़ी और खोजी पत्रकारिता के लिए शिव चौबे को विशेष रूप से जाना जाता है.

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