अंदर से कैसी दिखती है Hydrogen Train? सामने आईं तस्वीरें, कल PM मोदी करने वाले हैं उद्घाटन

Published on 16 जुल॰ 2026

Hydrogen Powered Train: भारतीय रेलवे के इतिहास में 17 जुलाई का दिन एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे. इस ऐतिहासिक शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर इस ट्रेन की अंदर और बाहर की बेहतरीन तस्वीरें साझा की हैं. इन तस्वीरों में आधुनिक ड्राइवर केबिन, यात्रियों के बैठने का शानदार कोच और जींद रेलवे स्टेशन पर खड़ी चमचमाती ट्रेन को साफ देखा जा सकता है. यह भारत की पहली ऐसी ट्रेन होगी जो पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है और पर्यावरण को बिना कोई नुकसान पहुंचाए अपनी रफ्तार भरेगी.

जींद से सोनीपत के बीच का सफर

यह देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलाई जाएगी. जींद से सोनीपत के बीच की कुल दूरी लगभग 89 किलोमीटर है, जिसे यह ट्रेन तकरीबन 2 घंटे में पूरा कर लेगी. इस सफर के दौरान ट्रेन यात्रियों की सुविधा के लिए कुल 12 रेलवे स्टेशनों पर रुकेगी. इन स्टेशनों में जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भम्बेवा, ईशापुर खेड़ी, बुटाना, खंदराई, गोहाना, रभड़ा, लाठ, मोहाना और बड़वासनी शामिल हैं. इस रूट पर ट्रेन के चलने से स्थानीय यात्रियों को सफर का एक बिल्कुल नया और आरामदायक अनुभव मिलेगा.

Next-gen Railway is here!

India’s first hydrogen train is officially being flagged off from Jind to Sonipat by PM @narendramodi tomorrow.

The only thing it leaves behind? Water vapour.
No carbon, all class. Catch the action as it will ditch the smoke for pure energy.… pic.twitter.com/Wah5Z4ubBf

— MyGovIndia (@mygovindia) July 16, 2026

किराया और नियमित संचालन की जानकारी

रेलवे से मिली जानकारी के मुताबिक इस आधुनिक ट्रेन का किराया आम जनता की जेब को ध्यान में रखकर तय किया गया है. ट्रेन का न्यूनतम किराया 5 रुपये से शुरू होकर अधिकतम 25 रुपये तक रहेगा. हालांकि, 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ इसके उद्घाटन सफर की शुरुआत करेंगे. आम यात्रियों के लिए इसकी नियमित सेवा किस तारीख से शुरू की जाएगी, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है. रेलवे बोर्ड ने उत्तर रेलवे को जल्द से जल्द नियमित सेवा की तारीख तय करने का निर्देश दिया है. सबसे खास बात यह है कि इस पूरी ट्रेन को भारत में ही डिजाइन और स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है.

ट्रेन की खासियतें और आधुनिक बनावट

इस हाइड्रोजन ट्रेन को अंदर और बाहर से बेहद खूबसूरत और आधुनिक लुक दिया गया है. ट्रेन के ड्राइवर केबिन को खास तौर पर डिजाइन किया गया है, जहां से ट्रेन के पूरे ऑपरेशन की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी. यात्रियों के बैठने के लिए बने कोच में स्टेनलेस स्टील की शानदार फिटिंग की गई है. खड़े रहने वाले यात्रियों के लिए मजबूत हैंड ग्रिप और ट्रेन के अंदर एक खुला लेआउट दिया गया है, जिससे ज्यादा भीड़ होने पर भी यात्रियों को परेशानी न हो. कोच के अंदर साफ-सफाई और वेंटिलेशन का विशेष ध्यान रखा गया है ताकि सफर आरामदायक बना रहे.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

हाइड्रोजन गैस के इस्तेमाल को देखते हुए रेलवे ने सुरक्षा के बहुत कड़े इंतजाम किए हैं. ट्रेन में कई स्तरों वाली एडवांस सुरक्षा प्रणाली लगाई गई है, जो किसी भी तरह के हाइड्रोजन लीक, असामान्य गर्मी, आग या धुएं का तुरंत पता लगा सकती है. यदि ट्रेन में कोई भी छोटी खराबी या गैस लीक का अंदेशा होता है, तो सिस्टम अपने आप हाइड्रोजन की सप्लाई को तुरंत बंद कर देगा. इसके साथ ही शुरू के तीन महीनों तक ट्रेन में तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम भी तैनात रहेगी, जो सफर के दौरान किसी भी तकनीकी समस्या का तुरंत समाधान कर सकेगी.

पर्यावरण के लिए बड़ी क्रांति

पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में यह ट्रेन पर्यावरण के लिए एक बहुत बड़ा वरदान साबित होगी. यह ट्रेन हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक पर काम करती है, जिसमें हाइड्रोजन और हवा की ऑक्सीजन मिलकर बिजली बनाती हैं और उसी से ट्रेन चलती है. इस पूरी प्रक्रिया में धुएं की जगह सिर्फ पानी की भाप निकलती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन बिल्कुल शून्य रहता है. इसके अलावा यह ट्रेन सामान्य ट्रेनों के मुकाबले बहुत कम आवाज करती है, जिससे ध्वनि प्रदूषण भी नहीं होगा. भारत के इस कदम से दुनिया भर में ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में देश का मान बढ़ेगा.

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