Published: Sunday, August 23, 2026, 14:36 [IST]
मौसम विभाग (IMD) ने 23 अगस्त को दोपहर 12:40 बजे (IST) छत्तीसगढ़, ओडिशा और तटीय आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके आसपास के इलाकों में भी तेज बारिश का खतरा जताया गया है। सड़कों पर जलभराव (Waterlogging) की आशंका को देखते हुए कार बायर्स के मन में यह सवाल उठ रहा है कि बाढ़ जैसे हालात में कौन सी मिड-साइज SUV ज्यादा सुरक्षित रहेगी— Hyundai Creta या Kia Seltos? यहां हम बिना किसी भ्रामक दावों के, दोनों कारों के हार्डवेयर, ग्रिप और विजिबिलिटी फीचर्स का सटीक मुकाबला कर रहे हैं।
सबसे पहले बात करते हैं बेसिक ग्राउंड फीचर्स की। दोनों ही SUVs में 190 mm का ग्राउंड क्लीयरेंस मिलता है, जो सड़कों पर भरे पानी और छिपे हुए स्पीड ब्रेकर्स को आसानी से पार करने में मदद करता है। गीली सड़कों पर बेहतर ग्रिप और कंट्रोल के लिए दोनों कारों के सभी वेरिएंट्स में इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) और ऑल-व्हील डिस्क ब्रेक दिए गए हैं। सबसे खास बात यह है कि इनके ऑटोमैटिक वेरिएंट्स में Snow, Mud और Sand जैसे ट्रैक्शन मोड्स मिलते हैं, जो पहियों को फिसलने से बचाते हैं।
Hyundai Creta vs Kia Seltos: वॉटरलॉगिंग में किस SUV का हार्डवेयर है ज्यादा भरोसेमंद?
बारिश और जलभराव के दौरान सिर्फ ग्रिप ही नहीं, बल्कि विजिबिलिटी (साफ दिखना) भी एक बड़ा मुद्दा होती है। Kia Seltos के टॉप ट्रिम्स में रेन-सेंसिंग वाइपर्स के साथ 360-डिग्री कैमरा और ब्लाइंड व्यू मॉनिटर जैसे फीचर्स मिलते हैं। वहीं, Creta में Level-2 ADAS और रियर वाइपर के साथ डिफॉगर तो मिलता है, लेकिन इसके ज्यादातर वेरिएंट्स में ऑटो वाइपर्स नहीं दिए गए हैं। भारी बारिश के स्प्रे और धुंध में Seltos के ऑटो वाइपर्स ड्राइविंग को ज्यादा आसान और सुरक्षित बनाते हैं।
| प्रमुख फीचर्स | Hyundai Creta | Kia Seltos |
|---|---|---|
| ग्राउंड क्लीयरेंस | 190 mm | 190 mm |
| ऑल‑व्हील डिस्क ब्रेक | स्टैंडर्ड | स्टैंडर्ड |
| ट्रैक्शन मोड्स | Snow/Mud/Sand (AT) | Snow/Mud/Wet (AT) |
| ऑटो वाइपर्स | ज्यादातर वेरिएंट्स में गायब | उपलब्ध |
| वेट‑एड कैमरे | हायर ट्रिम्स में 360° | 360° + ब्लाइंड व्यू मॉनिटर |
Hyundai Creta vs Kia Seltos: पानी भरी सड़कों के लिए किसका पॉवरट्रेन है ज्यादा बेहतर?
पानी से भरे बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक (Stop-and-Go) में ऑटोमैटिक गियरबॉक्स की भूमिका अहम हो जाती है। पारंपरिक टॉर्क-कन्वर्टर ऑटोमैटिक गियरबॉक्स ऐसे ट्रैफिक में आसानी से क्रीप (धीरे-धीरे आगे बढ़ना) करते हैं। इसके विपरीत, डुअल-क्लच (DCT) गियरबॉक्स में लगातार क्लच स्लिप होने से गियरबॉक्स ओवरहीट हो सकता है। अगर बारिश के मौसम में आपके रूट पर अक्सर जाम मिलता है, तो दोनों ही SUVs के डीजल या पेट्रोल ऑटोमैटिक वेरिएंट सबसे सहूलियत भरे साबित होते हैं। अगर आप DCT या iMT चुनते हैं, तो भारी ट्रैफिक में लंबे समय तक गाड़ी को रेंगने की स्थिति से बचाएं।
IMD अलर्ट के बीच कार केयर और ड्राइविंग टिप्स
बारिश के मौसम में कंपनी द्वारा बताए गए टायर प्रेशर को ही बनाए रखें, पानी देखकर हवा कम न करें। एक्वाप्लेनिंग (पानी की सतह पर कार फिसलने) से बचने के लिए टायरों का ट्रेड डेप्थ जरूर चेक करें और पानी भरे रास्तों पर गाड़ी की स्पीड धीमी रखें। जलभराव से निकलने के बाद हल्की ब्रेकिंग करके डिस्क को सुखाएं। अगर इंजन बंद होने लगे या कोई वार्निंग लाइट दिखे, तो कार तुरंत बंद कर दें और टो (tow) करवाएं। हाइड्रोलॉक की वजह से इंजन रिपेयर का खर्च अक्सर ₹75,000 से ₹2.5 लाख तक आता है, जबकि इंटीरियर खराब होने पर कुल बिल ₹3 लाख के पार भी जा सकता है। पानी से होने वाले इस नुकसान से बचने के लिए इंश्योरेंस में 'Engine-Protect' एड-ऑन जरूर शामिल करें।