India Pakistan Relation:'हम मोदी से हाथ मिलाने के लिए तरस रहे, वो अब फोन नहीं उठाते' पाकिस्तान का छलका दर्द

Published on 11 जुल॰ 2026

Time Published: Saturday, July 11, 2026, 13:58 [IST]

India Pakistan Relation: भारत से तल्ख रिश्तों का असर अब पाकिस्तान पर साफ दिख रहा है। पाकिस्तान की आर्मी को भले ही न हो लेकिन नेताओं को इस बात का इल्म अब दिखने लगा है कि भारत सरकार से कड़वे रिश्ते उनके विकास के हाजमे के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। ये बात हम नहीं बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ विशेष सलाहकार राणा सनाउल्लाह खान ने कही है। सनाउल्लाह खान ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान दोनों देशों के रिश्तों को लेकर एक ऐसा सच स्वीकार किया है, जिसकी चर्चा बंद कमरों में तो होती थी।

इस इंटरव्यू में सनाउल्लाह ने सीधे तौर पर माना कि साल 2015 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अचानक हुए लाहौर दौरे को पाकिस्तान सही ढंग से संभाल नहीं पाया और आज देश उसी कूटनीतिक असफलता के परिणाम भुगत रहा है। जानेंगे इस मामले में सनाउल्लाह खान ने और क्या बताया जिसके चर्चा अब भारत में हो रही है।

India Pakistan Relation

2015 में पीएम मोदी की यात्रा और अतीत की गलती

दिसंबर 2015 की उस यात्रा को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यदि उस समय घरेलू राजनीति को कूटनीति पर हावी न होने दिया जाता, तो दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की एक ठोस शुरुआत हो सकती थी। पाकिस्तानी समाज और राजनीतिक हलकों के भीतर से आए कड़े विरोध ने इस संभावना को पनपने से पहले ही समाप्त कर दिया। सनाउल्लाह के इस रुख से साफ है कि पाकिस्तान अब खुद को एक ऐसी स्थिति में पाता है जहां वह भारत से संवाद की गुहार तो लगा रहा है, लेकिन अतीत की गलतियों का ठीकरा किसी और के सिर नहीं फोड़ सकता।

बैकचैनल बातचीत जारी है- सनाउल्लाह

राजनयिक बातचीत की इस पूरी कवायद में एक और महत्वपूर्ण तथ्य 'ट्रैक 2 डिप्लोमेसी' को लेकर सामने आया। सनाउल्लाह के दावों के मुताबिक, दोनों मुल्कों के बीच आधिकारिक संपर्क भले ही टूट चुके हों, लेकिन बैकचैनल कूटनीति के खुफिया रास्ते कभी पूरी तरह बंद नहीं हुए। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के कार्यकाल की पैरवी करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि उस दौरान क्षेत्रीय शांति के लिए जो अनुकूल माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही थी, वह इसी खुफिया कूटनीति का ही हिस्सा थी, जो बाद में आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता की भेंट चढ़ गई।

पाक ने गंवा दिया एक बड़ा मौका- सनाउल्लाह

रिश्तों के इस उतार-चढ़ाव का सबसे गहरा असर पाकिस्तान की मौजदा आर्थिक स्थिति पर भी साफ देखा जा सकता है। सलाहकार ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यदि भारत के साथ व्यापारिक और आर्थिक सहयोग सामान्य रहता, तो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान (IMF) और विदेशी कर्जों के आगे इस कदर लाचार नहीं होना पड़ता। सीमा पर शांति होने से व्यापार और क्षेत्रीय निवेश के जो अवसर खुलते, उससे देश की अर्थव्यवस्था खुद-ब-खुद संभल सकती थी। लेकिन राजनीतिक मतभेदों के चलते पाकिस्तान ने एक महत्वपूर्ण मौका और समय गंवा दिया।

भारत ने इस मामले पर क्या कहा?

फिलहाल, इस पूरे मामले पर भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, कूटनीतिक हलकों में इस बात को लेकर नई बहस छिड़ गई है कि क्या 2015 की उस कूटनीतिक खिड़की के बंद होने से इतिहास का रुख बदल गया। बयान ऐसे समय में जरूर आया जब दोनों मुल्कों के बीच बातचीत ठप है। ऐसे में देखना होगा कि आने वाले समय में पाकिस्तान अपनी हरकतें सुधारकर क्या भारत से रिश्ते ठीक करने की कोशिश करता है या नहीं।

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