
Shapoor Mistry And Noel Tata
अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचकर पैसे जुटाने के लिए 2.5% हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव टलने के बाद, शापूरजी पल्लोनजी (SP) ग्रुप अब टाटा संस की लिस्टिंग का समर्थन कर रहा है. SP ग्रुप, जिसके पास टाटा संस की लगभग 18.37 फीसदी हिस्सेदारी है, ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के साथ बिक्री पर चर्चा की थी. इसमें बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन को शामिल करते हुए टैक्स-एफिशिएंट स्ट्रक्चर पर विचार किया जा रहा था. मामले की जनकारी रखने वालों ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि टाटा संस में यह प्रस्ताव अटक गया था और इसे औपचारिक रूप से बोर्ड के सामने तभी लाया गया जब RBI के निर्देश ने लिस्टिंग की ज़रूरत पर ध्यान केंद्रित किया.
पहले ये चल रही बात
रिपोर्ट में कहा गया है कि चर्चा तुरंत बड़े पैमाने पर मॉनेटाइजेशन के बजाय सीमित हिस्सेदारी बेचने पर केंद्रित थी. प्रस्ताव में SP ग्रुप को एक तय समय में नकद भुगतान करने की बात थी, जिससे शायद टाटा संस को लिस्टिंग से बचने का मौका मिल सकता था. SP ग्रुप और टाटा ट्रस्ट्स ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की. लोगों ने बताया कि टाटा संस के साथ इस मामले पर हुई पिछली चर्चा में नोएल टाटा ने सुझाव दिया था कि मॉनेटाइजेशन प्रस्ताव की जांच के लिए दोनों पक्षों की अलग-अलग टीमें बनाई जाएं. सूत्रों के मुताबिक, पहले चर्चा किए गए मॉनेटाइजेशन प्लान को टाटा ट्रस्ट्स की ओर से फारुख सुबेदार, टाटा संस का प्रतिनिधित्व करने वाले अंकुर वर्मा और SP ग्रुप के एक प्रतिनिधि संभाल रहे थे.
एसपी ग्रुप ने पकड़ी आईपीओ की राह
SP ग्रुप के चेयरमैन शापूर मिस्त्री ने सार्वजनिक रूप से लिस्टिंग का समर्थन किया था और कहा था कि वह आगे की राह पर टाटा संस के साथ रचनात्मक रूप से काम करने के लिए उत्सुक हैं. अब लिस्टिंग के लिए SP ग्रुप के समर्थन से इस ग्रुप को अपनी हिस्सेदारी से पैसे जुटाने का एक और संभावित रास्ता मिल गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि पब्लिक लिस्टिंग से इसकी हिस्सेदारी का मार्केट-बेस्ड वैल्यूएशन मिल सकता है और IPO से पहले हिस्सेदारी के कुछ हिस्से के लिए निवेशक को आकर्षित करना आसान हो सकता है.
IPO की संभावना बहुत ज्यादा
कैटलिस्ट एडवाइजर्स के फाउंडर केतन दलाल ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि SP ग्रुप के पास टाटा संस की 18% से थोड़ी ज्यादा हिस्सेदारी है और उसका इरादा इस हिस्सेदारी के कुछ हिस्से को किसी न किसी रूप में मॉनेटाइज करने का रहा है. उन्होंने कहा कि अब जब IPO की संभावना बहुत ज्यादा लग रही है, तो OFS या IPO के बाद मॉनेटाइजेशन निश्चित रूप से एक संभावना है. उन्होंने कहा कि लिस्टिंग के बाद लॉक-इन जरूरतों पर विचार करना होगा. दलाल ने कहा कि निवेशक और SP ग्रुप, दोनों के नजरिए से कीमत से जुड़े मुद्दे अहम भूमिका निभाएंगे. जुलाई में आए एक पुराने प्रस्ताव में शेयरों की अदला-बदली (शेयर स्वैप) की बात थी, जिसके तहत SP ग्रुप को टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी के एक हिस्से के बदले लिस्टेड टाटा कंपनियों के शेयरों का एक बास्केट मिलता.
एन चंद्रशेखरन पर मिली मंजूरी
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अगस्त की शुरुआत में घोषणा की थी कि फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल खत्म होने पर वे दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे और इसके बाद हुई चर्चाओं में भी शामिल नहीं हुए. लेकिन उन्होंने अपना पद छोड़ने का फैसला बदल दिया और टाटा संस के बोर्ड द्वारा 17 सितंबर को उनकी दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दिए जाने के बाद, अगले पांच साल तक टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बने रहने पर सहमति जताई. SP ग्रुप की टाटा संस में हिस्सेदारी स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट्स कॉर्प और साइरस इन्वेस्टमेंट्स के जरिए है और इसे लोन लेने के लिए गिरवी रखा गया है. ग्रुप ने जुलाई में 21,500 करोड़ रुपए की रीफाइनेंसिंग पूरी की. इससे पहले उन्होंने निवेशकों को बताया था कि वे 18 महीनों के भीतर लिस्टिंग या शेयर बेचकर टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी के एक हिस्से से पैसा जुटाने की योजना बना रहे हैं. उन्हें सितंबर के आखिर तक लगभग 3,500 करोड़ रुपए का लोन चुकाना है.

सौरभ शर्मा
2008 से शेयर मार्केट, इकोनॉमी और कमोडिटी कवर कर रहे हैं. टीवी9 के साथ जुड़ने से पहले डीएनए, एशियानेट, जनसत्ता, दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका जैसे कई बड़े संस्थानों के साथ भी जुड़े रहे.
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