Published: Friday, July 17, 2026, 16:06 [IST]
Iran War Update: अमेरिका ने अपने तीसरे अटैम्पट में ईरान के उस पोर्ट को तबाह कर दिया जिस पर भारत का सबसे ज्यादा इन्वेस्टमेंट था। ये अमेरिकी सेना की तीसरी कोशिश थी जिसमें उसने चाबहार पोर्ट के कंट्रोल टॉवर नेस्तनाबूद कर दिया। ये टॉवर शाहिद कलंतरी पोर्ट पर बना हुआ था जिसके गिरते ही आसमान में धुएं का गुबार देखा गया।
पीट हेगसेथ ने जारी की तस्वीरें
इस हमले के वीडियो और फोटो खुद डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए हैं। शेयर की गई फोटो में दिख रहा है कि धमाके के बाद टावर जैसी एक बिल्डिंग ढह रही है। चाबहार वॉचटवर पर यह अमेरिका का दूसरा मिसाइल हमला है। यह एक सिविलियन फैसिलिटी है, जिसका इस्तेमाल समुद्री सुरक्षा और मछुआरों के रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए किया जाता था।
8 लोगों की गई जान, 20 घायल
शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सैन्य कार्रवाई तेज हो गई, जब दोनों देशों ने मिडिल ईस्ट में एक-दूसरे पर हमले किए। ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने रातभर हवाई हमले कर ईरान के सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया, जिसमें एक एयरपोर्ट, एक रेलवे स्टेशन और दो पुल शामिल हैं। इन हमलों में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए। ईरान का आरोप है कि अमेरिका सिविलियन ठिकानों को टारगेट कर रहा है, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों की तरफ से इन आरोपों पर कोई बयान नहीं आया है।
होर्मुज पर हमला और दोबारा भड़की जंग
यह गोलाबारी वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन के ठीक एक महीने बाद हुई है। पिछले महीने ही दोनों देशों ने फरवरी से चल रही इस जंग को रोकने और तनाव कम करने के लिए एक समझौते पर हसतक्षर किए थे। लेकिन यह व्यवस्था ज्यादा दिन नहीं टिकी और दोबारा दोनों देश जंग के मुहाने पर पहुंच गए। दोबारा तनाव तब बढ़ा जब ईरानी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी।
सेंटकॉम की बमबारी और तबाही का मंजर
इसके बाद यूएस सेंट्रल कमांड ने ईरान के दर्जनों ठिकानों पर लगातार सात घंटे तक बमबारी की। हालांकि, इस गोलाबारी के बावजूद दोनों देशों के बीच बैकचैनल बाचतीत को आधिकारिक तौर पर अभी बंद नहीं किया गया है। वर्तमान में दोनों देश होर्मुज स्ट्रेट के समुद्री ट्रैफिक पर कंट्रोल पाना चाहते हैं। जहां अमेरिका और उसके सहयोगी जहाजों को ओमान के करीब वाले पानी से जाने की सलाह दे रहे हैं, वहीं ईरान का कहना है कि जहाजों को केवल तेहरान द्वारा तय किए गए रास्तों से ही गुजरना होगा।
भारत की क्या चिंता?
इस पोर्ट पर भारत का काफी पैसा खर्च हुआ है साथ ही यहां पर भारत का एक ड्रीम प्रोजेक्ट भी चल रहा है। लिहाजा इस स्ट्राइक के बाद भारत की चिंताएं और बढ़ गई होंगी। फिलहाल इस युद्ध में दूर-दूर तक दोबारा शांतिवार्ता की उम्मीद नहीं दिख रही है। बावजूद इसके पर्दे के पीछे चल रही बातचीत पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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