Jammu-Kashmir: आतंकवाद पीड़ित 37 परिवारों को मिली सरकारी नौकरी, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सौंपे नियुक्ति पत्र| Navbharat Live

Published on 5 अग॰ 2026

Updated On: Aug 05, 2026 | 06:20 PM IST

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सार

Terrorism Victims Families: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद पीड़ित 37 परिवारों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे। उन्होंने इसे शहीदों के प्रति न्याय और सम्मान का प्रतीक बताया।

Lieutenant Governor, Shri Manoj Sinha

आतंकवाद पीड़ित 37 परिवारों को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सौंपे नियुक्ति पत्र

विस्तार

Manoj Sinha on Terrorism Victims Families: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को आतंकवादी हमलों में मारे गए 37 नागरिकों के परिजनों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह केवल नौकरी देने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आतंकवाद के पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और शहीदों के सम्मान का प्रतीक है। उपराज्यपाल ने आतंकवादी हमलों में जान गंवाने वाले सभी निर्दोष नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि कई परिवारों ने वर्षों तक दुख और इंतजार सहा है। अब उन्हें नौकरी मिलने से सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद ने कई परिवारों को बर्बाद कर दिया और उनके भविष्य को अनिश्चित बना दिया। किसी भी आंकड़े से उनके दर्द को नहीं समझा जा सकता। यह नियुक्ति पत्र केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि सरकार की ओर से न्याय और भरोसे का संदेश हैं।

5 अगस्त 2019 के बाद बदली तस्वीर

मनोज सिन्हा ने कहा कि 5 अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आतंकवाद के नेटवर्क को कमजोर किया गया, कानून-व्यवस्था मजबूत हुई और लोगों को समान अधिकार मिले। उन्होंने कहा कि इसी बदलाव के कारण लंबे समय से लंबित मामलों में भी अब कार्रवाई संभव हो सकी है।

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अनुच्छेद 370 हटने का बताया लाभ

उपराज्यपाल ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद सभी भारतीय नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित किए गए। उन्होंने कहा कि “एक देश, एक झंडा और एक संविधान” के सिद्धांत को पूरी तरह लागू किया गया, जिससे लोगों को न्याय और समान अवसर मिले।

विस्थापितों और वंचित वर्गों को मिले अधिकार

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आदिवासी समुदाय, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और छंब से विस्थापित परिवारों तथा शरणार्थियों को संविधान के तहत नागरिकता, मतदान का अधिकार और संपत्ति रखने जैसे कानूनी अधिकार मिले हैं।

शिक्षा और रोजगार के नए अवसर

मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में किसान, कारीगर और युवा नए अवसरों का लाभ उठा रहे हैं। विश्वविद्यालय, कॉलेज, अनुसंधान संस्थान और इनक्यूबेशन सेंटर युवाओं को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहे हैं।

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“यह मुआवजा नहीं, बल्कि भरोसे का प्रतीक”

उपराज्यपाल ने कहा कि किसी अपने को खोने की भरपाई कोई नौकरी या आर्थिक सहायता नहीं कर सकती। लेकिन यह नियुक्ति इस बात का भरोसा है कि देश आतंकवाद से प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है और उनके सम्मान व बेहतर भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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