Published: Monday, September 28, 2026, 17:44 [IST]
Jammu Kashmir Statehood Resolution: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव सोमवार (28 सितंबर) को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव का बीजेपी को छोड़कर विधानसभा में मौजूद अन्य विपक्षी दलों ने समर्थन किया। बीजेपी विधायकों ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए सदन में धरना दिया और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
मामला इतना बढ़ गया कि प्रस्ताव पर बहस के दौरान बीजेपी और कांग्रेस के कुछ विधायक आमने-सामने आ गए। स्थिति बिगड़ने पर मार्शलों की मदद से कई सदस्यों को सदन से बाहर निकाल दिया गया। बीजेपी ने आरोप लगाया कि सरकार राज्य के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रही है। विधानसभा में पेश प्रस्ताव में केंद्र से जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की गई। सरकार का तर्क है कि जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद अब राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए।
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बीजेपी विधायकों ने इसका विरोध किया और NC सरकार पर आरोप लगाया कि वह जनता को गुमराह कर रही है। बीजेपी सदस्यों ने सरकार से पूछा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के बुनियादी मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय राज्य के दर्जे के मुद्दे को क्यों प्राथमिकता दी जा रही है।
बीजेपी ने क्या कहा?
बीजेपी विधायक सुनील भारद्वाज ने NC सरकार पर 'पाकिस्तान का एजेंडा' लागू करने का आरोप लगाया। बीजेपी नेताओं ने कहा कि सरकार राज्य के दर्जे के मुद्दे के जरिए जनता का ध्यान दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों से हटाने की कोशिश कर रही है। बीजेपी विधायक ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोगों की आंखों में धूल झोंकने और कश्मीर की जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने पिछले दशकों की सरकारों पर आतंकवाद और अन्य मुद्दों को लेकर सवाल भी उठाए। बीजेपी सदस्यों ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। इसी दौरान सदन में बीजेपी और कांग्रेस के कुछ विधायक आमने-सामने आ गए और हंगामा बढ़ गया। इसके बाद कुछ सदस्यों को सदन से बाहर कर दिया गया।
PDP विधायक वहीद पारा ने क्या कहा?
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के विधायक वहीद पारा ने प्रस्ताव को लेकर सरकार की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य के दर्जे से संबंधित प्रस्ताव पहले भी कैबिनेट में लाया गया था और बाद में इसे प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने रखा गया। वहीद पारा के मुताबिक, करीब दो साल बाद एक बार फिर इसी तरह का प्रस्ताव विधानसभा में लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कहीं न कहीं गलतियां हुई हैं। उन्होंने यह भी साफ करने की कोशिश की कि मौजूदा प्रस्ताव अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग नहीं करता। उनके मुताबिक, सरकार फिलहाल 370 की वापसी की मांग नहीं कर रही है।
NC ने राज्य का दर्जा बहाल करने को बताया बड़ी मांग
नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता और विधायक तनवीर सादिक ने राज्य का दर्जा बहाल करने को महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से भी राज्य का दर्जा बहाल करने की बात कही गई थी। तनवीर सादिक ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए था। उनके मुताबिक, दो साल का समय बीतने के बावजूद यह मांग पूरी नहीं हुई है। उन्होंने बीजेपी पर राज्य के दर्जे की बहाली की प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया। सादिक ने कहा कि यदि विधानसभा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करती है और इसके बावजूद केंद्र सरकार इसे लागू नहीं करती है, तो यह निराशाजनक होगा।