Published: Friday, October 16, 2026, 11:02 [IST]
Reliance vs Starlink: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर मुकाबला तेज होने के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एलन मस्क की कंपनी स्टार लिंक (Starlink) को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। रिलायंस का कहना है कि वह सैटेलाइट कम्युनिकेशन के बाजार में किसी भी कंपनी के आने का स्वागत करती है। लेकिन भारत में कारोबार करने वाले हर ऑपरेटर को देश के कानून और सरकारी नियमों का पालन करना होगा।
कंपनी ने यह भी साफ किया कि उसकी अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस Jio को भी अभी सरकारी मंजूरियों का इंतजार है। हालांकि कंपनी ने यह साफ कर दिया कि चाहे घरेलू कंपनी हो या विदेशी, हर खिलाड़ी को भारतीय कानूनों और रेग्युलेटरी नियमों का पूरा पालन करना होगा।
'नियम सबके लिए बराबर हों, हम खुद क्लीयरेंस का इंतजार कर रहे हैं'
रिलायंस ने शुक्रवार (16 अक्टूबर) को जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भारत सरकार हर आवेदक के लिए एक ही प्रक्रिया अपनाती है। कंपनी के मुताबिक, खुद जियो की अपनी सैटेलाइट सर्विस भी अभी सरकारी क्लीयरेंस और मंजूरियों के इंतजार में है। रिलायंस ने जोर देकर कहा कि जो नियम और प्रोसेस बाकी कंपनियों पर लागू होते हैं, वही नियम स्टारलिंक जैसी विदेशी कंपनियों पर भी समान रूप से लागू होने चाहिए।
कंपनी ने कहा,
"रिलायंस में हमने कभी कॉम्पिटिशन से दूरी नहीं बनाई। हम इसे ग्राहक की सबसे अच्छी सेवा करने की कसौटी मानते हैं। स्टारलिंक समेत हर ऑपरेटर को देश के कानूनों के दायरे में रहकर काम करना होगा।"
रिलायंस ने यह भी कहा कि बाजार में कॉम्पिटिशन का असली फायदा ग्राहकों को मिलना चाहिए। कंपनी के लिए मुकाबला कोई डरने वाली बात नहीं, बल्कि यह साबित करने का मौका है कि कौन बेहतर सर्विस देता है। उसका कहना है कि भारत में निवेश और नई तकनीक को बढ़ावा मिलना चाहिए, बशर्ते सभी कंपनियों के लिए नियम एक जैसे हों।
Jio को भी क्यों नहीं मिली मंजूरी?
रिलायंस के बयान का सबसे अहम हिस्सा यह है कि Jio की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाएं भी अभी सरकारी मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। कंपनी ने कहा कि भारत सरकार के मुताबिक, मंजूरी की प्रक्रिया सभी आवेदकों के लिए समान है, चाहे कंपनी भारतीय हो या विदेशी।
इसका मतलब है कि Starlink और Jio जैसी कंपनियों को अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए संबंधित नियामकीय मंजूरियां हासिल करनी होंगी। सिर्फ बाजार में उतरने की तैयारी कर लेने से सर्विस शुरू करने की अनुमति नहीं मिल जाती।
2016 में Jio की एंट्री का क्यों दिया उदाहरण?
रिलायंस ने प्रतिस्पर्धा को लेकर अपना पक्ष मजबूत करने के लिए Jio की टेलीकॉम यात्रा का जिक्र किया। कंपनी के मुताबिक, Jio ने 2016 में भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा था। उस वक्त उसके पास एक भी ग्राहक नहीं था। आज कंपनी के दावे के मुताबिक, Jio के ग्राहकों की संख्या 53 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।
रिलायंस का कहना है कि Jio ने देश में डिजिटल नेटवर्क के विस्तार में योगदान दिया और डेटा सेवाओं को आम लोगों के लिए सस्ता बनाने में मदद की। कंपनी इसी उदाहरण के जरिए बता रही है कि वह नए खिलाड़ियों के बाजार में आने को खतरे के बजाय प्रतिस्पर्धा के तौर पर देखती है।
भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में क्या बदलेगा?
Starlink और Jio की सैटेलाइट सेवाओं को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच भारत में इस बाजार पर नजरें टिकी हैं। सैटेलाइट इंटरनेट उन इलाकों में कनेक्टिविटी देने का विकल्प बन सकता है, जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है। हालांकि सेवाओं की उपलब्धता और शुरुआत संबंधित सरकारी मंजूरियों पर निर्भर करेगी।
रिलायंस ने साफ किया है कि वह घरेलू और विदेशी, दोनों तरह के निवेश का समर्थन करती है। अब देखना होगा कि संबंधित कंपनियों को मंजूरी कब मिलती है और वे ग्राहकों तक अपनी सेवाएं किस तरह पहुंचाती हैं। फिलहाल कंपनी का संदेश साफ है मुकाबले से परहेज नहीं, लेकिन नियम सभी के लिए एक जैसे होने चाहिए।