JNU यौन उत्पीड़न मामला: कांग्रेस सांसद पर कार्रवाई की मांग, राष्ट्रपति मुर्मू से मिलीं भाजपा की महिला सांसद | jnu-sexual-harassment-case-bjp-women-mps-president-murmu

Published on 13 अक्टू॰ 2026

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। भाजपा की महिला सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस सांसद और जेएनयू के प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। सांसदों ने मामले में हस्तक्षेप करने और उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। आरोपों की जांच दिल्ली पुलिस कर रही है, जबकि संबंधित सांसद ने आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।

राष्ट्रपति से क्या मांग की गई?

प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा सांसद कमलजीत सहरावत, बांसुरी स्वराज और मालविका देवी शामिल थीं। राज्यसभा सांसद एस. फांगनोन कोन्याक, गीता शाक्य और भाजपा की वरिष्ठ नेता तथा राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रेखा शर्मा भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थीं।

महिला सांसदों ने कथित उत्पीड़न के मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने ज्ञापन में अकोइजम को सांसद पद से हटाने का अनुरोध भी किया। हालांकि, सांसद को पद से हटाने की प्रक्रिया संबंधित संवैधानिक और संसदीय नियमों के अधीन होती है।

भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर उठाए सवाल

बांसुरी स्वराज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व अपने सांसद के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट, अभद्र व्यवहार और अश्लील भाषा के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और आधिकारिक जांच की स्थिति अलग से देखी जानी जरूरी है।

रेखा शर्मा ने दावा किया कि जेएनयू की 11 छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न हुआ। उनके मुताबिक, छात्राओं को फिल्मों के दृश्य दिखाए गए और उनसे निजी संबंधों से जुड़े सवाल पूछे गए। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से पूछा कि पार्टी इस मामले पर क्या कार्रवाई कर रही है। ये आरोप हैं, जिनकी जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं।

जेएनयू ने प्रोफेसर पर क्या कार्रवाई की?

विश्वविद्यालय के आदेश के मुताबिक, जेएनयू ने 9 अक्टूबर को अकोइजम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया था। बताया गया कि आंतरिक समिति की जांच के निष्कर्षों के आधार पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। अकोइजम विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान स्कूल के सामाजिक व्यवस्था अध्ययन केंद्र से जुड़े थे। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।

दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

दिल्ली पुलिस ने जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर 11 अक्टूबर को वसंत कुंज नॉर्थ थाने में प्राथमिकी दर्ज की। मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत दर्ज बताया गया है। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच जारी है।

फिलहाल यह मामला विश्वविद्यालय की आंतरिक कार्रवाई, पुलिस जांच और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच चर्चा में है। आगे की स्थिति जांच के निष्कर्षों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।